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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Exclusive: In this district of UP, two and a half thousand women, who feed thousands, did not get the money for distribution of dry ration for a year

एक्सक्लूसिव : यूपी के इस जिले में हजारों का पेट भरने वाली ढाई हजार महिलाएं खुद 'भूखी', एक साल से नहीं मिला सूखाा राशन वितरण का पैसा

Thu, 03 Feb 2022 04:14 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत
मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 03 Feb 2022 04:14 PM IST
सार

हजारों का पेट भरने वाली ढाई हजार महिलाएं खुद भी भूखी हैं। इन्हें सूखे राशन वितरण का पैसा पिछले एक साल से नहीं मिला है। ये महिलाएं सहूकारों से कर्ज लेकर जीवन व्यापन को मजबूर हैं।

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Exclusive: In this district of UP, two and a half thousand women, who feed thousands, did not get the money for distribution of dry ration for a year
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) - फोटो : amar ujala

विस्तार

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एनआरएलएम से जुड़कर स्वावलंबन का सपना संजो रहीं जनपद की ढ़ाई हजार महिलाएं इस समय सहूकारों से कर्ज लेकर जीवन व्यापन करने को मजबूर हैं। आलम यह है कि सूखा राशन बांटकर हजारों का पेट भरने वाली ये महिलाएं आज खुद भूखी है। क्योंकि पिछले एक साल से उन्हें सूखा राशन वितरण करने के रूप में मिलने वाला मानदेय नहीं मिल रहा है। ऊपर से हर माह आंगनबाडी केन्द्रों से राशन के उठान मेें उनके हजारों खर्च हो रहे हैं। रोजाना महिलाएं कर्ज के बोझ तले दबती जा रही हैं, बावजूद इसके न तो विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी।

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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों से सूखा राशन उठाकर वितरण करने की जिम्मेदारी सौंपी थी और प्रत्येक महिला को पांच हजार रुपये मानदेय देने के निर्देश दिए थे। इसी के अंतर्गत पिछले अक्टूबर माह 2020 से समूह से जुड़ी हजारों महिलाएं सूखा राशन वितरण कर रही है, लेकिन गत एक साल से इन महिलाओं को सूखा राशन वितरण करने के नाम पर एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। नतीजन, अब महिलाएं सहूकारों से कर्ज लेकर जीवन व्यापन करने को मजबूर हैं।

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ढ़ाई हजार महिलाओं का फंसा 16 25 करोड़ रुपया
बड़ौत जनपद में 244 ग्राम पंचायतें हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक समूह को सूखा राशन वितरण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक समूह में दस से बारह महिलाएं जुडी है, जो हर माह आंगनबाडी केंद्रों से राशन उठाकर गांव में जरूरतमंद लोगों को सूखा राशन वितरण करती हैं। क्योंकि एक महिला को सूखा राशन वितरण के एवज में पांच हजार रुपये मानदेय मिलता है, ऐसे में ढ़ाई हजार महिलाओं का विभाग में लगभग 16 25 करोड़ रुपये फंसा हुआ हैं।

राशन उठाने के नाम पर महिलाओं का खर्च हो चुका लगभग तीन करोड़ रूपये
एक तो ऊपर से महिलाओं को सूखा राशन वितरण करने का मानदेय नहीं मिल रहा हैए ऊपर से विभागीय अफसरों के दबाव के चलते हर माह राशन उठाने के नाम पर महिलाएं खुद अपनी जेब से एक हजार रूपये लगाकर आंगनबाडी केंद्रों से राशन उठाने को मजबूर हैं। ऐसे मेें एक साल के अंदर इन ढ़ाई हजार महिलाओं का लगभग तीन करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं। अब महिलाएं खर्च हुई धनराशि की भी मांग कर रही है।

ये बोली महिलाएं......
बड़ौत के आरिफपुर खेड़ी गांव की रहने वाली खुशी स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला सुनील देवी का कहना है कि पिछलें एक साल से सूखा राशन वितरण कर रहे है, लेकिन मानदेय के नाम पर एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। जिस कारण अब घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है।

शिव शंकर स्वयं सहायता समूह से जुडी जौहड़ी गांव की महिला शालू का कहना है कि यह सोचकर समुह में काम करना शुरू किया था कि उन्हें रोजगार मिलेगा और परिवार के पालन पोषण में मदद मिलेगी, लेकिन न तो पिछलें एक साल से सूखा राशन वितरण का मानदेय मिला है और न ही हर माह आंगनबाडी केन्द्र से राशन उठान का।

गुलाब स्वयं सहायता समूह से जुडी अंगदपुर गांव की रहने वाली अनिता का कहना है कि मानदेय न मिलने के कारण परिवार का पालन-पोषण करने में दिक्कतें हो रही है। कई बार अधिकारियों से भी शिकायत की जा चुकी है, कोई सुनवाई नहीं हो रही।

सरस्वती समूह से जुडी महावतपुर बावली की जबून, रविदास समूह से जुडी ढ़िकाना गांव की सुमन का कहना है कि अक्टूबर माह 2020 से सूखा राशन वितरण का कार्य कर रहे है। सरकार ने अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर का तो भुगतान कर दिया, लेकिन गत जनवरी 2021 से मानदेय के नाम पर एक पैसा नहीं दिया। ऊपर से हर माह आंगनबाडी केंद्र से राशन उठान के नाम पर एक हजार से लेकर 1200 रूपये तक खर्च हो रहे हैं।

जयमाता स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला सुषमाए गणेश स्वयं सहायता समूह से जुडी हिलवाडी गांव की सविता व रजनीश का कहना है कि एक साल से सूखा राशन वितरण का मानदेय रूका हुआ है, ऐसे में सहूकारों से कर्ज लेकर किसी तरह परिवार का खर्च चला रहे हैए ऊपर से हर माह आंगनबाडी केन्द्र से राशन उठाने का खर्च भी बढ़ गया है, अब तो समूह छोड़ने का मन बन रहा है।

ये बोले डीसी एनआरएलएम
इस संबंध में जब डीसी एनआरएलएम ब्रजभूषण सिंह से बातचीत की गई तो उनका कहना है कि समूह से जुडी महिलाओं के एकांउट का सत्यापन कार्य चल रहा है, जल्द ही सभी के एकाउंट का सत्यापन कर रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाएगी। वहीं से ही सीधे महिलाओं के एकांउट में धनराशि भेजी जाएगी। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र भेजा जा चुका हैए जल्द ही महिलाओं का भुगतान कराएं जाने का प्रयास किया जा रहा है।

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