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Baghpat News: एक ऐसे पूर्व सैनिक...24 साल नौकरी और 48 साल से पेंशन

Mon, 23 Jun 2025 12:53 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jun 2025 12:53 AM IST
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ex soldier news
बागपत। पुरानी पेंशन योजना का फायदा कोई ढिकौली गांव के पूर्व सूबेदार लच्छीराम से पूछिए...इन्होंने सेना में 35 रुपये प्रतिमाह वेतन से नौकरी शुरू करके 24 साल देश सेवा की। लच्छीराम पिछले 48 साल से पेंशन ले रहे हैं और अब उनको 55 हजार रुपये पेंशन मिल रही है। बेशक 90 साल के हो गए, मगर उनमें आज भी वही जज्बा और जोश है।
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यूं तो ढिकौली गांव की पहचान सैनिकों से है। यहीं के लच्छीराम को पिता चौ. बिशंभर की तरह देश की सेना की वर्दी पहनने का जुनून था। पिता ने हौसला बढ़ाया, लेकिन समझाया कि पहले कुछ पढ़ लिख लो। लच्छीराम कक्षा नौ उत्तीर्ण करने के बाद सीधे मेरठ छावनी पहुंचकर वर्ष 1953 में पंजाब रेजिमेंट में सिपाही भर्ती हो गए। पहला वेतन मिला 35 रुपये, जो उस समय काफी मायने रखता था। कुछ साल बाद पंजाब रेजिमेंट से जाट रेजिमेंट में भेज दिए गए।
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वह बताते हैं कि वर्ष 1962 में चीन से जंग में हिस्सा लेकर दुश्मन फौज से लड़े। इसके बाद वर्ष 1965 और 1971 में पाकिस्तान की फौज से जंग लड़ी। जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में तैनात रहे थे। 1971 की जंग में लेह के अग्रिम मोर्चे पर दुश्मन फौज के दांत खट्टे किए। इस जंग में दुश्मन फौज का बम आकर गिरा तो पहाड़ी ढाल बन गई थी। वर्ष 1977 में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त होने पर 95 रुपये पेंशन मिली, मगर अब हर माह 55 हजार रुपये मिल रही है। वह बताते हैं कि पहले सेना में कम पेंशन थी, मगर 15 साल से पेंशन बढ़ी है।
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अब बटन दबाने से दुश्मन ढेर
पूर्व सूबेदार लच्छीराम कहते हैं कि पहले आमने-सामने की जंग होती थी। अब तकनीक से जंग लड़ी जाती है। अब मिसाइल व ड्रोन का बटन दबाकर दुश्मनों को ढेर करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था। सीज फायर न होता तो पाकिस्तान का वजूद नहीं बचता। जिंदगी की इस सांझ में भी उनके अंदर देश सेवा का जज्बा कायम है।

सेना में अब चौथी पीढ़ी
पूर्व सूबेदार लच्छीराम के पिता चौ. बिशंभर सिंह भी सेना में रहे। भारत की ओर से 1942 के द्वितीय विश्व युद्ध में सिंगापुर में लड़े और वहां पकड़े जाने पर जेल में भी रहे। सिंगापुर से छूटने के बाद पुलिस में भर्ती हुए। वर्तमान में लच्छीराम के दो बेटे रामबीर और राजकुमार सेना में हवलदार हैं। इन दोनों सैनिकों के बेटे भी सुनील व दीपक सेना में रहकर देश सेवा कर रहे हैं।
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