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जनपद में टयूबवेल उपभोक्ताओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे ऊर्जा निगम

Mon, 10 Jan 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jan 2022 12:21 AM IST
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Electricity corporation treating tubewell consumers step-motherly
मुख्यमंत्री की 50 फीसदी बिजली बिल में छूट का लाभ नहीं ले पाएंगे हजारों उपभोक्ता
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वर्ष 2008 में प्रदेश के एकमात्र जनपद बागपत में बढ़ाई गई थीं विद्युत हार्स पावर
फोटो संख्या 3
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। मुख्यमंत्री ने भले ही निजी नलकूपों के बिजली बिलों पर 50 फीसदी की छूट कर दी है, लेकिन बागपत जिले के हजारों ट्यूबवेल उपभोक्ताओं को इसका लाभ न के बराबर मिलेेगा। वर्ष 2008 में ऊर्जा निगम के अफसरों ने मनमानी कर विद्युत दरें साढ़े 12 हार्स पावर कर दी थीं। सूबे के अन्य जनपदों में पांच से साढ़े सात हार्स पावर विद्युत दरें आज भी हैं। इसको लेकर हंगामा-प्रदर्शन हुए परंतु विद्युत दरें नहीं घटाई गईं।
किसानों के लिए फ्री हो बिजली
किसान अधिकार आंदोलन के जिला संयोजक नरेंद्र राणा ने बताया कि वर्ष 2008 में प्रदेश में पांच व साढ़े सात हॉर्स पावर बिजली चल रही थी परंतु बागपत जनपद में ऊर्जा निगम के अफसरों ने मनमानी कर बढ़ाकर साढ़े 12 हार्स पावर कर दी थी। इतना ही नहीं जनपद के उपभोक्ता साढ़े बारह हार्स पावर की बजाए 13 हार्स पावर का भुगतान कर रहे हैं। क्योंकि ऊर्जा निगम के कंप्यूटर सिस्टम में साढ़े बारह हार्स पावर का प्रावधान नहीं है। बताया कि किसानों से केपिसिटर चार्ज भी वसूला जाता है। इन कारणों से मुख्यमंत्री द्वारा घोषित बिजली के बिल पर छूट का ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा। यदि 50 प्रतिशत छूट भी मिलती है तो भी उपभोक्ताओं को साढ़े छह से सात हार्स पावर का बिल देना पड़ेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से हरियाणा की तर्ज पर किसानों को बिजली फ्री देने की मांग उठाई।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान
चौबीसी खाप के चौधरी सुभाष का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने के बावजूद बढ़ी विद्युत दरों का भुगतान करना किसानों को महंगा पड़ रहा है। बिजली बिल जमा न करने रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। उन्हाेंने कहा कि किसानों को बिजली फ्री मिलनी चाहिए।
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बेहताशा बढ़ीं विद्युत दरें
किसान धर्मपाल चेयरमैन, किसान देवेंद्र व अजय ढ़िकौली ने बताया कि कांग्रेस के शासनकाल में 150 रुपये दो माह का घरेलू बिल वसूला जाता था। मायावती शासन में 250 व अखिलेश यादव की सरकार में 450 रुपये तथा योगी सरकार में एक माह का बिजली का बिल ही एक हजार रुपये हो गया है। सरकार को किसानों की आर्थिक स्थिति देखनी चाहिए और बिजली फ्री कर देनी चाहिए।
ट्यूबवेल कनेक्शन पर भी वसूली जा रही अधिक धनराशि
थांबा चौधरी ब्रजपाल व विक्रम आर्य का कहना है कि बागपत जनपद के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, शामली समेत अन्य जनपदों में में नए विद्युत कनेक्शन के लिए किसानों को 14 से 18 हजार रुपये देने पड़ते हैं। उन्हें अलग से विद्युत ट्रासंफार्मर भी मिलता है। ऊर्जा निगम के अधिकारियों के मुताबिक साढे 12 हार्स पावर के 14 हजार किसान हैं जबकि इससे ऊपर के 250 किसान हैं।

ये बोले एसई
किसान बढ़ी विद्युत दरों को वापस किए जाने की कई बार मांग उठा चुके हैं। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह मामला है। उन्होंने बताया कि किसान अपने यहां पर लोड चेक करा सकता है। उसके हिसाब से ही बिजली बिल वसूला जाएगा।-रणविजय सिंह, एसई ऊर्जा निगम
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