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नई शिक्षा नीति से मातृभाषा में दी जाएगी शिक्षा : सत्यपाल
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 31 Dec 2017 12:54 AM IST
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केंद्रीय राज्यमंत्री डा.सत्यपाल सिंह को सम्मानित करते अतिथिगण।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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केंद्रीय मानव संसाधन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति पर मंथन चल रहा है। मातृभाषा में भी बच्चों को शिक्षा दी जानी चाहिए। एनसीईआरटी ने छह करोड़ किताबों की व्यवस्था की है।
सीबीएसई के स्कूल और बच्चे प्राइवेट पब्लिकेशन के बजाए इन किताबों से पढ़ाई करें। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा। ऑनलाइन लाइब्रेरी से शिक्षक और विद्यार्थी लाभ ले सकते हैं।
डीएवी पब्लिक स्कूल में शिक्षा गुणवत्ता पर सहारनपुर और मेरठ मंडल के सीबीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्यों का सेमिनार आयोजित किया। इसमें केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों की शिक्षा को लेकर संवेदनशील हैं।
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जब तक शिक्षा का स्तर नहीं बदलेगा, देश नहीं बदल सकता। नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर मंथन किया जा रहा है। यह व्यवस्था करने का प्रयास रहेगा कि अंग्रेजी के अलावा मातृभाषा में ही बच्चों को शिक्षा दी जाए, ताकि उनका बेहतर विकास हो सके। प्रधानाचार्यों से कहा कि प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें न पढ़ाएं, इससे अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलेगी।
अंग्रेजी के साथ-साथ मातृभाषा का ज्ञान दिया जाना जरूरी है। शिक्षक जिम्मेदारी लें कि नकलविहीन परीक्षा कराई जाएगी। नकल से देश के भविष्य बच्चों को नुकसान होता है। शिक्षक के पास ही सृजन और विध्वंश की ताकत होती है। शिक्षक भगवान जैसे होते हैं, वह देश और बच्चों के भविष्य के लिए सृजन यानि निर्माण का कार्य करें।
बीएसई देहरादून रीजन के चेयरमैन डॉ. रणवीर सिंह, सचिव अनुराग त्रिपाठी, डीएवी प्रबंध समिति के डायरेक्टर डॉ वी. सिंह, डीएवी मेरठ की प्रधानाचार्य डॉ. अल्पना शर्मा, बागपत के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यशाला का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बावली में बनेगा केंद्रीय विद्यालय, यूनिवर्सिटी का प्रयास
बागपत। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि वह जिले में मेडिकल कॉलेज बनवाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके अलावा जेवी कॉलेज बड़ौत को यूनिवर्सिटी का दर्जा, बड़ौत में लाइब्रेरी, जिले में राष्ट्रीय खेल संस्थान के लिए वह प्रयास कर रहे हैं। इनके बन जाने से जिले के लोगों को लाभ हो सकेगा। बावली मेें अगले वर्ष केंद्रीय विद्यालय का निर्माण कराया जाएगा। इससे क्षेत्र के बच्चों को बड़ा लाभ होगा।
आर्य बाहर से नहीं आए, भारत के बाशिंदे
बागपत। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि बच्चों को इतिहास में कई चीजें भ्रामक पढ़ाई जाती है। पढ़ाया जा रहा है कि इंसान का जन्म बंदर से हुआ, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं हुआ है।
धरती पर इंसान का जन्म इंसान से हुआ है। इंसान ने ही सृष्टि का निर्माण किया है। उन्होंने कहा इतिहास में पढ़ाया जा रहा है कि आर्य बाहर से आए। सवाल उठता है कि यदि आर्य बाहर से आए तो भारत का नाम आर्य वृत्त कैसे पड़ गया।
आर्य बाहर से नहीं आए बल्कि यहीं के रहने वाले थे। उन्होंने शिक्षकों और बच्चों से कहा कि मां-बाप का सम्मान करें तो वृद्धा आश्रम की जरूरत नहीं पड़ेगी। संसद में भी वह यह बात कह चुके हैं। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, इस कारण अब माता-पिता को बोझ समझा जाने लगा है।
उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा के कई अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि कक्षा छह में एबीसीडी सीखी, संयुक्त परिवार था, खेत में गए। बिजली नहीं थी, लैंप से पढ़ाई की। उन्होंने प्रधानाचार्यों से कई सवाल पूछे, जिन पर सबने अलग-अलग जवाब दिए। यही नहीं यह भी कहा कि बच्चों को प्रैक्टिकल शिक्षा देने की भी आवश्यकता है।
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सीबीएसई के स्कूल और बच्चे प्राइवेट पब्लिकेशन के बजाए इन किताबों से पढ़ाई करें। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा। ऑनलाइन लाइब्रेरी से शिक्षक और विद्यार्थी लाभ ले सकते हैं।
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डीएवी पब्लिक स्कूल में शिक्षा गुणवत्ता पर सहारनपुर और मेरठ मंडल के सीबीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्यों का सेमिनार आयोजित किया। इसमें केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों की शिक्षा को लेकर संवेदनशील हैं।
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जब तक शिक्षा का स्तर नहीं बदलेगा, देश नहीं बदल सकता। नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर मंथन किया जा रहा है। यह व्यवस्था करने का प्रयास रहेगा कि अंग्रेजी के अलावा मातृभाषा में ही बच्चों को शिक्षा दी जाए, ताकि उनका बेहतर विकास हो सके। प्रधानाचार्यों से कहा कि प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें न पढ़ाएं, इससे अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलेगी।
अंग्रेजी के साथ-साथ मातृभाषा का ज्ञान दिया जाना जरूरी है। शिक्षक जिम्मेदारी लें कि नकलविहीन परीक्षा कराई जाएगी। नकल से देश के भविष्य बच्चों को नुकसान होता है। शिक्षक के पास ही सृजन और विध्वंश की ताकत होती है। शिक्षक भगवान जैसे होते हैं, वह देश और बच्चों के भविष्य के लिए सृजन यानि निर्माण का कार्य करें।
बीएसई देहरादून रीजन के चेयरमैन डॉ. रणवीर सिंह, सचिव अनुराग त्रिपाठी, डीएवी प्रबंध समिति के डायरेक्टर डॉ वी. सिंह, डीएवी मेरठ की प्रधानाचार्य डॉ. अल्पना शर्मा, बागपत के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यशाला का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बावली में बनेगा केंद्रीय विद्यालय, यूनिवर्सिटी का प्रयास
बागपत। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि वह जिले में मेडिकल कॉलेज बनवाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके अलावा जेवी कॉलेज बड़ौत को यूनिवर्सिटी का दर्जा, बड़ौत में लाइब्रेरी, जिले में राष्ट्रीय खेल संस्थान के लिए वह प्रयास कर रहे हैं। इनके बन जाने से जिले के लोगों को लाभ हो सकेगा। बावली मेें अगले वर्ष केंद्रीय विद्यालय का निर्माण कराया जाएगा। इससे क्षेत्र के बच्चों को बड़ा लाभ होगा।
आर्य बाहर से नहीं आए, भारत के बाशिंदे
बागपत। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि बच्चों को इतिहास में कई चीजें भ्रामक पढ़ाई जाती है। पढ़ाया जा रहा है कि इंसान का जन्म बंदर से हुआ, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं हुआ है।
धरती पर इंसान का जन्म इंसान से हुआ है। इंसान ने ही सृष्टि का निर्माण किया है। उन्होंने कहा इतिहास में पढ़ाया जा रहा है कि आर्य बाहर से आए। सवाल उठता है कि यदि आर्य बाहर से आए तो भारत का नाम आर्य वृत्त कैसे पड़ गया।
आर्य बाहर से नहीं आए बल्कि यहीं के रहने वाले थे। उन्होंने शिक्षकों और बच्चों से कहा कि मां-बाप का सम्मान करें तो वृद्धा आश्रम की जरूरत नहीं पड़ेगी। संसद में भी वह यह बात कह चुके हैं। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, इस कारण अब माता-पिता को बोझ समझा जाने लगा है।
उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा के कई अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि कक्षा छह में एबीसीडी सीखी, संयुक्त परिवार था, खेत में गए। बिजली नहीं थी, लैंप से पढ़ाई की। उन्होंने प्रधानाचार्यों से कई सवाल पूछे, जिन पर सबने अलग-अलग जवाब दिए। यही नहीं यह भी कहा कि बच्चों को प्रैक्टिकल शिक्षा देने की भी आवश्यकता है।