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इकनोमिक कॉरिडोर का नया विवाद, कागजों में कम तो अधिग्रहण ज्यादा जमीन का हुआ

Sat, 21 May 2022 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 11:24 PM IST
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Economic Corridor: Occupation of more land by reducing acquisition
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का किया गया अधिग्रहण
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किसानों ने मौके पर ज्यादा व कागजों में कम जमीन होने की बात कहते हुए दोबारा पैमाइश कराने की मांग उठाई
एडीएम ने तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों से जांच करके जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन पर प्रशासन ने जहां कब्जा लेना शुरू कर दिया है। वहीं, इसको लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। किसानों ने कागजों में कम जमीन अधिग्रहण करने तथा मौके पर ज्यादा जमीन पर कब्जा लेने का आरोप लगाया। उन्होंने दोबारा पैमाइश कराने की मांग उठाई है। इसके लिए किसानों ने अधिकारियों से मुलाकात की और जमीन ज्यादा मिलने पर उसकी अधिसूचना कराने की मांग की। जिससे किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत में मवीकलां से मुजफ्फरनगर की सीमा तक 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। यहां 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन भी अधिगृहीत की गई है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। किसान अब मुआवजा उठाकर कब्जा भी दे रहे हैं। इस बीच नया विवाद शुरू हो गया है। बाघू गांव के डॉ. फरमान अहमद, बिजरौल के वेद सिंह आर्य, गांगनौली के सतेंद्र राठी, सतीश कुमार, हरेंद्र राठी, तिरसपाल आदि शनिवार को एडीएम अमित कुमार से मिले। उन्होंने बताया कि कागजों में जितनी जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उससे ज्यादा मौके पर जमीन मौजूद है। इसलिए इस तरह के किसानों की जमीन की दोबारा पैमाइश कराई जाए और अतिरिक्त जमीन का भी मुआवजा दिलाया जाए।
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तीन बीघा तक ज्यादा है मौके पर जमीन
किसानों ने बताया कि तीन बीघा तक ऐसी जमीन है। वह कागजों में कम है, जबकि मौके पर ज्यादा है। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है। इस मामले में एडीएम अमित कुमार ने तहसीलदार व अन्य अधिकारियों को मामले की जांच करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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किसानों ने कागजों में कम व मौके पर जमीन ज्यादा होने की बात कही है। वे पैमाइश कराने की मांग कर रहे हैं। इसमें तहसीलदार व अन्य को लगाया है कि किसानों का दावा कितना सही है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।-अमित कुमार, एडीएम
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