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अफसरों की लापरवाही से ढाई हजार महिलाओं को वेतन के लाले

Wed, 02 Feb 2022 10:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 10:33 PM IST
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Due to the negligence of the officers, two and a half thousand women have to pay salaries
एक साल में भी पूरा नहीं किया गया सूखा राशन वितरण करने वाली महिलाओं के बैंक खातों का सत्यापन
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खुद के खर्च से कर रही सरकार का भला, बावजूद इसके विभागीय अधिकारी सुध लेने को तैयार नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर स्वावलंबन का सपना संजोने वाली जनपद की ढाई हजार महिलाओं को अफसरों की लापरवाही से वेतन के लाले पड़े हुए है। करीब एक साल में भी बैंक खातों का सत्यापन पूरा नहीं होने से सूखा राशन बांटकर हजारों का पेट भरने वाली ये महिलाएं खुद के खर्च से सरकार योजना का क्रियान्वयन कर रही है। इन्हें उम्मीद है कि एक ना एक दिन वेतन उनके खाते में आएगा। मगर, न तो विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे है और न ही प्रशासनिक अधिकारी। (संवाद)
ये थी योजना
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केन्द्रों से सूखा राशन उठाकर वितरण करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके लिए प्रत्येक महिला को पांच हजार रुपये मानदेय देने के निर्देश दिए गए थे। इसी योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक स्वयं सहायता समूह को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। अक्तूबर 2020 से प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं सूखा राशन वितरण कर रही है। शुरूआत में अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर का वेतन कलस्टर के माध्यम से दिया गया, लेकिन इसके बाद से वेतन नहीं मिला।
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ढाई हजार महिलाओं का फंसा 16.25 करोड़ रुपया
बागपत जनपद में 244 ग्राम पंचायतें है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक स्वयं सहायता समूह को सूखा राशन वितरण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक समूह में दस से 12 महिलाएं जुडी है, जो हर माह आंगनबाड़ी केन्द्रों से राशन उठाकर गांव में जरूरतमंद लोगों को सूखा राशन वितरण करती है। एक महिला को इसके लिए पांच हजार रुपये मानदेय मिलता है। ऐसे में करीब ढाई हजार महिलाओं के वेतन का एक साल का 16.25 करोड़ रुपया बैंक खातों का सत्यापन न होने से अटका हुआ है।
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सोचा था रोजगार मिलेगा, अब तो परिवार चलाने में हो रही परेशानी
आरिफपुर खेड़ी गांव के खुशी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला सुनील देवी ने बताया कि खुद अपनी जेब से करीब एक हजार रुपये लगाकर आंगनबाड़ी केंद्रों से राशन उठाने को मजबूर है। इनमें राशन की पैकिंग करना और लोगों तक पहुंचाने का काम भी शामिल है। शिव शंकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जौहड़ी गांव की शालू का कहना है कि यह सोचकर समूह में काम करना शुरू किया था कि उन्हें रोजगार मिलेगा और परिवार के पालन-पोषण में मदद मिलेगी, लेकिन अब परेशानी हो रही है। गुलाब स्वयं सहायता समूह से जुड़ी अंगदपुर गांव की रहने वाली अनीता, सरस्वती समूह से जुड़ी महावतपुर बावली की जबून, रविदास समूह से जुड़ी ढ़िकाना गांव की सुमन, जयमाता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला सुषमा, गणेश स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हिलवाड़ी गांव की सविता व रजनीश का कहना है कि मानदेय न मिलने के कारण परिवार का पालन-पोषण करने में दिक्कतें हो रही है। कई बार अधिकारियों से भी शिकायत की जा चुकी है, कोई सुनवाई नहीं हो रही।

समूह से जुड़ी महिलाओं के अकाउंट का सत्यापन कार्य चल रहा है। जल्द ही सभी के एकाउंट का सत्यापन कर रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाएगी। वहीं से ही सीधे महिलाओं के अकाउंट में धनराशि भेजी जाएगी। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र भेजा जा चुका है, जल्द ही महिलाओं का भुगतान कराएं जाने का प्रयास किया जा रहा है। - ब्रजभूषण सिंह, डीसी एनआरएलएम
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