{"_id":"5ee907668ebc3e42de7784d6","slug":"do-not-let-children-feel-lonely-baraut-news-mrt4866246116","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों को महसूस न होने दें अकेलापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों को महसूस न होने दें अकेलापन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत। बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। 34 साल की उम्र में अभिनेता का यूं चले जाना बालीवुड से लेकर आम लोगों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। इस घटना का आम लोगों पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। इसे लेकर महिलाओं का कहना है कि कभी भी अपने बच्चों को अकेलापन महसूस न होने दें। ज्यादा से ज्यादा उनसे बातचीत करें और मुश्किल कड़ी में बच्चों का साथ देकर उनका मनोबल बढ़ाएं।
ग्रहणी उमेश तोमर का कहना है कि उन्होंने इस घटना से सीख ली है कि अपने बच्चों के साथ छोटी से छोटी बात करनी चाहिए। जिससे उन्हें पता चल सके की बच्चों के दिमाग में क्या चल रहा है।
ग्रहणी मंजू देवी का कहना है कि उनके दो बच्चे है, जो बाहर नौकरी करते और पढ़ते भी है। बताया कि मैं उनसे ज्यादा बात नहीं करती थी, लेकिन युवा अभिनेता के द्वारा उठाए गए इस कदम से वो भी अपने बच्चों को लेकर सतर्क हो गई है। इसलिए वे रोज उनसे बात करेंगी।
विज्ञापन
ग्रहणी राजेश का कहना है कि बच्चे जब बड़े हो जाते है तो कैरियर को लेकर काफी चिंतित रहते है, ऐसे में एक-दो बार नाकाम होने पर युवा गलत कदम उठा लेते है। इसलिए अपने बच्चों को अकेलापन महसूस न होने दें और कड़ी मेहनत के लिए उन्हें सकारात्मक बनाएं रखे।
विज्ञापन
ग्रहणी उमेश तोमर का कहना है कि उन्होंने इस घटना से सीख ली है कि अपने बच्चों के साथ छोटी से छोटी बात करनी चाहिए। जिससे उन्हें पता चल सके की बच्चों के दिमाग में क्या चल रहा है।
विज्ञापन
ग्रहणी मंजू देवी का कहना है कि उनके दो बच्चे है, जो बाहर नौकरी करते और पढ़ते भी है। बताया कि मैं उनसे ज्यादा बात नहीं करती थी, लेकिन युवा अभिनेता के द्वारा उठाए गए इस कदम से वो भी अपने बच्चों को लेकर सतर्क हो गई है। इसलिए वे रोज उनसे बात करेंगी।
विज्ञापन
ग्रहणी राजेश का कहना है कि बच्चे जब बड़े हो जाते है तो कैरियर को लेकर काफी चिंतित रहते है, ऐसे में एक-दो बार नाकाम होने पर युवा गलत कदम उठा लेते है। इसलिए अपने बच्चों को अकेलापन महसूस न होने दें और कड़ी मेहनत के लिए उन्हें सकारात्मक बनाएं रखे।