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विधान में श्रद्धालुओं ने अर्घ्य अर्पित किए
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बरनावा के जैन मंदिर में विधान में भाग लेते श्रद्धालु।
- फोटो : BARAUT
बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांति विधान में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर अर्घ्य अर्पित किए।
ब्रह्मचारी प्रदीप पीयूष निर्देशन में श्रद्धालुओं ने सुबह शांतिधारा, नित्य नियम पूजन और भगवान का अभिषेक किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के अंतर्मन में जब ईर्ष्या की ज्वाला भड़कती है, तो इसमें उसके सारे सद्गुण जलकर खाक हो जाते हैं। क्योंकि दावानल अग्नि से ईर्ष्या की अग्नि अनंत गुना ज्यादा खतरनाक होती है। यह परमाणु बम से भी विस्फोटक होती है।
उन्होंने बताया कि ईर्ष्या धार्मिक व्यक्ति को भी शैतान और राक्षस बना देती है, ऐसी आत्मा का विश्व के किसी धर्म में प्रवेश नहीं है। पारिवारिक रिश्तों में भी यह कड़वाहट घोल देती है। भाई को भाई का दुश्मन बना देती है। स्वयं की सुख शांति समृद्धि सब कुछ छीन लेती है। धन वैभव परिवार का त्याग कर जो जीव चंद्रप्रभ भगवान की आराधना करता है। वह ईर्ष्या का परित्याग कर देता है।
इससे मुक्ति पाना चंद्रप्रभु भगवान के श्री चरणों में संभव है। किसी को आगे बढ़ते देखकर ईर्ष्या करने की बजाय उसे आदर्श मानते हुए उसका अनुसरण करना चाहिए यही मानवता है। विधान में पंकज जैन, संदीप जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, लता जैन, ममता जैन, बादामी देवी मौजूद रहे।
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ब्रह्मचारी प्रदीप पीयूष निर्देशन में श्रद्धालुओं ने सुबह शांतिधारा, नित्य नियम पूजन और भगवान का अभिषेक किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के अंतर्मन में जब ईर्ष्या की ज्वाला भड़कती है, तो इसमें उसके सारे सद्गुण जलकर खाक हो जाते हैं। क्योंकि दावानल अग्नि से ईर्ष्या की अग्नि अनंत गुना ज्यादा खतरनाक होती है। यह परमाणु बम से भी विस्फोटक होती है।
उन्होंने बताया कि ईर्ष्या धार्मिक व्यक्ति को भी शैतान और राक्षस बना देती है, ऐसी आत्मा का विश्व के किसी धर्म में प्रवेश नहीं है। पारिवारिक रिश्तों में भी यह कड़वाहट घोल देती है। भाई को भाई का दुश्मन बना देती है। स्वयं की सुख शांति समृद्धि सब कुछ छीन लेती है। धन वैभव परिवार का त्याग कर जो जीव चंद्रप्रभ भगवान की आराधना करता है। वह ईर्ष्या का परित्याग कर देता है।
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इससे मुक्ति पाना चंद्रप्रभु भगवान के श्री चरणों में संभव है। किसी को आगे बढ़ते देखकर ईर्ष्या करने की बजाय उसे आदर्श मानते हुए उसका अनुसरण करना चाहिए यही मानवता है। विधान में पंकज जैन, संदीप जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, लता जैन, ममता जैन, बादामी देवी मौजूद रहे।
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