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‘ब्रह्मचर्य व्रत के बिना साधना का विकास संभव नहीं’
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बागपत के दिगंबर जैन मंदिर में पूजा करते श्रद्घालु
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत/छपरौली। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे दश लक्षण पर्व के अंतिम दिन श्री 1008 वासुपूज्य भगवान के विधान का आयोजन किया। श्रद्धालुओं ने श्रीजी को अर्घ्य चढ़ाकर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की।
पंडित सुलभ जैन शास्त्री व मयंक जैन शास्त्री के निर्देशन में श्री 1008 अजीतनाथ भगवान, शांतिनाथ भगवान, नेमिनाथ भगवान, पारस नाथ भगवान का अभिषेक किया। नमन जैन, राजेश जैन, संगीता जैन, ऋषभ जैन, अभिषेक जैन, अजय जैन, गुंजन जैन, राजा जैन, भारती जैन ने शांतिधारा और पालकी जैन ने आरती संपन्न कराई गई। इसके उपरांत श्री 1008 श्री वासुपूज्य भगवान विधान की क्रियाएं शुरू कराईं। विधान में श्रद्धालुओं ने श्रीजी को 74 अर्घ्य मांडले पर अर्पित किए।
शाम को शास्त्र सभा में पंडित सुलभ जैन व पंडित मयंक जैन ने कहा कि आज उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का दिन है। ब्रह्म अर्थात अपने शुद्ध आत्मा में आचरण करना, रमना ही ब्रह्मचर्य धर्म है। ब्रह्मचर्य व्रत एक महानतम व्रत है, जिसके अभाव में साधना का विकास संभव नहीं है। मनुष्य की ऊर्जा इंद्रिय द्वार से निरंतर बाहर की ओर बह रही है, जिससे मनुष्य क्षीण हो रहा है। ब्रह्मचर्य उस ऊर्जा को केंद्रित कर आत्म स्फूर्ति, तेजस्विता और बल प्रदान करता है।
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ब्रह्मचर्य की यात्रा संयम आत्मा का विकास है। असंयम से जुड़कर कोई भी ब्रह्म में लीन नहीं हो सकता है। जीवन में निम्न तल से ऊपर उठने के लिए ब्रह्मचर्य अनिवार्य है। उत्तम ब्रह्मचर्य दशलक्षण महापर्व का अंतिम कलशारोहण है। इसके बाद संगीतमय महा आरती हुई। महिलाओं और बच्चों ने दीपक लेकर नृत्य किया। कार्यक्रम में विनीत जैन, संजीव जैन, सार्थक जैन, यश जैन, तरुण जैन, निशू जैन, ऋषभ जैन, कमल जैन मौजूद रहे।
उधर, छपरौली कस्बे के जैन मंदिर में भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक कार्यक्रम का आयोजन किया। भगवान वासुपूज्य जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर थे। श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू़ अर्पित कर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को आत्मसात करने का संकल्प लिया और अनंत चतुर्दशी का उपवास रखा। मौके पर राजीव जैन, राहुल जैन, मदनलाल जैन, अंकुर जैन, अचिन जैन, सुखमाल चंद जैन, मयंक मौजूद रहे।
श्रीजी की शोभायात्रा निकाली
अग्रवाल मंडी टटीरी/अमीनगर सराय। कस्बे के जैन मंदिर में पंडित चंद्रभन जैन ने दशलक्षण पर्व पर चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान पाठ संपन्न कराया। उन्होंने कहा कि आत्मा ही ब्रह्मा है और उस ब्रह्म स्वरूप आत्मा में रमन करना ब्रह्मचर्य है। मौके पर वैभव जैन, प्रमोद जैन, महेश जैन, मुकेश जैन, जिनेंद्र जैन, सक्षम जैन, प्रवीण जैन, संजय जैन, अमित जैन, सुनील जैन, सुधा, मधु, रेनू, गीता, दीपा, माया मौजूद रहे। उधर, कस्बा अमीनगर सराय के जैन मंदिर में शुक्रवार को श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने व्रत-उपवास कर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की। शाम को संगीत कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में जैन समाज की ओर से आचार्य शिवम शास्त्री व सहयोगियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में धार्मिक नृत्य प्रतियोगिता हुई। इसमें मानसी जैन, प्रिंसी जैन, कलश जैन अव्वल को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। संवाद
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पंडित सुलभ जैन शास्त्री व मयंक जैन शास्त्री के निर्देशन में श्री 1008 अजीतनाथ भगवान, शांतिनाथ भगवान, नेमिनाथ भगवान, पारस नाथ भगवान का अभिषेक किया। नमन जैन, राजेश जैन, संगीता जैन, ऋषभ जैन, अभिषेक जैन, अजय जैन, गुंजन जैन, राजा जैन, भारती जैन ने शांतिधारा और पालकी जैन ने आरती संपन्न कराई गई। इसके उपरांत श्री 1008 श्री वासुपूज्य भगवान विधान की क्रियाएं शुरू कराईं। विधान में श्रद्धालुओं ने श्रीजी को 74 अर्घ्य मांडले पर अर्पित किए।
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शाम को शास्त्र सभा में पंडित सुलभ जैन व पंडित मयंक जैन ने कहा कि आज उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का दिन है। ब्रह्म अर्थात अपने शुद्ध आत्मा में आचरण करना, रमना ही ब्रह्मचर्य धर्म है। ब्रह्मचर्य व्रत एक महानतम व्रत है, जिसके अभाव में साधना का विकास संभव नहीं है। मनुष्य की ऊर्जा इंद्रिय द्वार से निरंतर बाहर की ओर बह रही है, जिससे मनुष्य क्षीण हो रहा है। ब्रह्मचर्य उस ऊर्जा को केंद्रित कर आत्म स्फूर्ति, तेजस्विता और बल प्रदान करता है।
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ब्रह्मचर्य की यात्रा संयम आत्मा का विकास है। असंयम से जुड़कर कोई भी ब्रह्म में लीन नहीं हो सकता है। जीवन में निम्न तल से ऊपर उठने के लिए ब्रह्मचर्य अनिवार्य है। उत्तम ब्रह्मचर्य दशलक्षण महापर्व का अंतिम कलशारोहण है। इसके बाद संगीतमय महा आरती हुई। महिलाओं और बच्चों ने दीपक लेकर नृत्य किया। कार्यक्रम में विनीत जैन, संजीव जैन, सार्थक जैन, यश जैन, तरुण जैन, निशू जैन, ऋषभ जैन, कमल जैन मौजूद रहे।
उधर, छपरौली कस्बे के जैन मंदिर में भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक कार्यक्रम का आयोजन किया। भगवान वासुपूज्य जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर थे। श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू़ अर्पित कर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को आत्मसात करने का संकल्प लिया और अनंत चतुर्दशी का उपवास रखा। मौके पर राजीव जैन, राहुल जैन, मदनलाल जैन, अंकुर जैन, अचिन जैन, सुखमाल चंद जैन, मयंक मौजूद रहे।
श्रीजी की शोभायात्रा निकाली
अग्रवाल मंडी टटीरी/अमीनगर सराय। कस्बे के जैन मंदिर में पंडित चंद्रभन जैन ने दशलक्षण पर्व पर चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान पाठ संपन्न कराया। उन्होंने कहा कि आत्मा ही ब्रह्मा है और उस ब्रह्म स्वरूप आत्मा में रमन करना ब्रह्मचर्य है। मौके पर वैभव जैन, प्रमोद जैन, महेश जैन, मुकेश जैन, जिनेंद्र जैन, सक्षम जैन, प्रवीण जैन, संजय जैन, अमित जैन, सुनील जैन, सुधा, मधु, रेनू, गीता, दीपा, माया मौजूद रहे। उधर, कस्बा अमीनगर सराय के जैन मंदिर में शुक्रवार को श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने व्रत-उपवास कर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की। शाम को संगीत कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में जैन समाज की ओर से आचार्य शिवम शास्त्री व सहयोगियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में धार्मिक नृत्य प्रतियोगिता हुई। इसमें मानसी जैन, प्रिंसी जैन, कलश जैन अव्वल को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। संवाद