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ककौर-नांगल मार्ग में गहरे गड्ढे, क्षेत्रवासी परेशान
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बड़ौत। यमुना मेें अवैध रेत खनन का खामियाजा ककौर-नांगल मार्ग से जुड़कर गांवों के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ओवरलोड वाहनों के कारण यह मार्ग पूरी तरह से टूट चुका है। हालत ऐसी है कि पैदल चलने में भी परेशानी होती है। क्षेत्रवासियों ने इस मार्ग को जल्द से जल्द बनवाने की मांग की।
सचिन सरोहा का कहना है कि छपरौली क्षेत्र का यह मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन बदरखा, ककौर, शबगा, नांगल आदि गांवों के सैकड़ों लोग यहां से गुजरते है। मगर, अब यह मार्ग चलने लायक नहीं रहा।
आदित्य का कहना है कि ओवरलोड खनन वाहनों के कारण यह मार्ग गहरे गड्ढों में तब्दील हुआ है। दो साल से अधिक समय हो चुका है, अभी तक इस मार्ग का निर्माण नहीं कराया गया।
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विजय व गुन्नू का कहना है कि फिलहाल लोगों को शबगा गांव से होकर बड़ौत आना पड़ रहा है। जो पांच किलोमीटर लंबा है। सबसे ज्यादा परेशानी छात्र-छात्राओं को होती है।
बिट्टू का कहना है कि यदि जल्द इस मार्ग का निर्माण नहीं हुआ तो क्षेत्र के लोग एकत्रित होकर डीएम मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
लखनऊ भेजा जा चुका इस्टीमेट
मार्ग का निर्माण जल्द कराया जाएगा। फिलहाल इसका इस्टीमेट बनाकर लखनऊ भेजा जा चुका है। स्वीकृति व धनराशि आवंटित होते ही मार्ग के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - एसके गौतम, अभियंता अधिशासी, पीडब्ल्यूडी।
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सचिन सरोहा का कहना है कि छपरौली क्षेत्र का यह मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन बदरखा, ककौर, शबगा, नांगल आदि गांवों के सैकड़ों लोग यहां से गुजरते है। मगर, अब यह मार्ग चलने लायक नहीं रहा।
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आदित्य का कहना है कि ओवरलोड खनन वाहनों के कारण यह मार्ग गहरे गड्ढों में तब्दील हुआ है। दो साल से अधिक समय हो चुका है, अभी तक इस मार्ग का निर्माण नहीं कराया गया।
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विजय व गुन्नू का कहना है कि फिलहाल लोगों को शबगा गांव से होकर बड़ौत आना पड़ रहा है। जो पांच किलोमीटर लंबा है। सबसे ज्यादा परेशानी छात्र-छात्राओं को होती है।
बिट्टू का कहना है कि यदि जल्द इस मार्ग का निर्माण नहीं हुआ तो क्षेत्र के लोग एकत्रित होकर डीएम मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
लखनऊ भेजा जा चुका इस्टीमेट
मार्ग का निर्माण जल्द कराया जाएगा। फिलहाल इसका इस्टीमेट बनाकर लखनऊ भेजा जा चुका है। स्वीकृति व धनराशि आवंटित होते ही मार्ग के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - एसके गौतम, अभियंता अधिशासी, पीडब्ल्यूडी।