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बेटियां खुलकर बोलें, चुप्पी साधने का मतलब अपराध को बढ़ावा

Fri, 31 Jan 2020 11:18 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jan 2020 11:18 PM IST
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Daughters speak openly, keeping silence means promoting crime
बड़ौत के माउंट लिटरा स्कूल में अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं को आत्मसुरक्षा के टिप्स देती महि - फोटो : BARAUT
बेटियां खुलकर बोलें, चुप्पी साधने का मतलब अपराध को बढ़ावा
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बड़ौत। माउंट लिटरा स्कूल में शुक्रवार को अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत पुलिस पाठशाला का आयोजन किया गया। एसडीएम दुर्गेश मिश्रा और सीओ आलोक सिंह ने कहा कि अपने साथ घटित होने वाली किसी भी अप्रिय घटना पर बेटियां चुप्पी न साधें, बल्कि खुलकर बोलें। चुप्पी साधने का मतलब है अपराध को बढ़ावा देना।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एसडीएम दुर्गेश मिश्रा, सीओ आलोक सिंह, कोतवाली प्रभारी अजय कुमार शर्मा, स्कूल के चेयरमैन हंसकुमार जैन व बिजेंद्र जैन, डायरेक्टर हिमांशु जैन, प्रधानाचार्य विनय चौधरी, मीडिया प्रभारी ओपी शर्मा, महिला सब इंस्पेक्टर साक्षी सिंह व कोआर्डिनेटर हरि दत्त शर्मा ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। एसडीएम ने कहा कि बेटियां आज किसी से कम नहीं हैं। वे सीमा पर देश की सुरक्षा भी कर रही हैं, साथ ही चंद्रयान को चंद्रमा पर भेजने के काम में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं। जरूरत तो बस आत्मविश्वास की है। उन्होंने सीबीएसई व यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों से आह्वान किया कि तनावमुक्त रहें और कड़ी मेहनत करें।
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सीओ आलोक सिंह ने 1090 वुमंस पावर लाइन की जानकारी दी। कहा कि यदि किसी लड़की के साथ कोई छेड़खानी कर रहा है, तो 1090, 181 पर फोन करें। लड़की की सूचना गोपनीय रखते हुए आरोपी को पुलिस सबक सिखा देगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं द्वारा पूछे गए सवालों का उत्तर दिया। कोतवाल अजय कुमार शर्मा व महिला सब इंस्पेक्टर साक्षी सिंह ने कहा कि लड़कियां सोशल मीडिया का सावधानी से इस्तेमाल करें। फेसबुक पर अपरिचित लोगों से दोस्ती न करें और अपनी व्यक्तिगत जानकारियां किसी से शेयर न करें। महिला कांस्टेबल उमेश ने बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस के टिप्स दिए।
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ये दिए टिप्स
1- छात्राओं को अगर कोई राह चलते परेशान करे तो 1090 या 112 पर कॉल करें। पुलिस मदद करेगी। साथ ही पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
2- छात्राएं किसी भी बात को छिपाएं नहीं, घर में माता-पिता व अन्य परिजनों से परेशानी को साझा करें, ताकि उसका समाधान किया जा सके।
3- छात्राएं कानूनी अधिकारों की जानकारी रखें। जागरूकता जीवन में अहम होती है।
4- छात्राएं अपने फोन में हेल्पलाइन नंबरों के साथ ही पुलिस अफसरों और थाने का नंबर रखें। जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ली जा सके।
बोली छात्राएं.....
डायल 112 और महिला हेल्पलाइन 1090 की आज बेहतर तरीके से जानकारी मिली है। यह जानकारी हर लकड़ी के लिए जरूरी है। - वृतिका।
जरा सी दिक्कत होने पर पुलिस को सूचना की जाएं तो वह मदद के लिए मौके पर हाजिर होती है। बालिका भयमुक्त होकर स्कूल जाएं। - शगुन।
किसी भी समस्या का समाधान तभी होगा, जब हम उसे अपने परिजनों, गुरुजनों के साथ साझा करेंगे। परेशानी छिपाकर नहीं रखनी चाहिए।- विदुषी
छोटी सी समस्या समय के साथ बड़ी हो जाती है। परिजनों और पुलिस की मदद से समय पर ही समाधान बेहतर होता है। - अन्नू।
इस तरह के आयोजन छात्राओं को जागरूक करने का अच्छा माध्यम हैं। छात्राओं को अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। - प्रिया।
पुलिस हमारी मदद के लिए है, तो फिर पुलिसकर्मियों को परेशानी बताने में झिझक कैसी। परेशानी बताने पर ही समाधान होगा। - मीनाक्षी।
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