{"_id":"6ac007c98b56fed1bc06df16","slug":"cultural-news-baghpat-news-c-28-1-smrt1003-159807-2026-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: सौहार्द की चुनरी में सितारे सजा रहीं मुस्लिम महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: सौहार्द की चुनरी में सितारे सजा रहीं मुस्लिम महिलाएं
विज्ञापन
बड़ौत। नवरात्र के लिए हिलवाड़ी गांव की मुस्लिम महिलाएं मां दुर्गा की चुनरी सजाने के लिए जुटी हुई हैं। गोटा और सितारे लगाकर तैयार की गई इन चुनरियों की मांग बागपत के साथ दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड के साथ ही आसपास के जिलों तक है। महिलाओं के लिए यह काम रोजगार का जरिया होने के साथ आपसी सौहार्द की मिसाल भी बन गया है।
हिलवाड़ी गांव में 250 मुस्लिम परिवार रहते हैं। इनमें 100 परिवार नवरात्र से पहले चुनरी तैयार करने के काम में जुट जाते हैं। घर की महिलाएं, युवतियां, बच्चे और अन्य सदस्य सुबह से शाम तक चुनरी पर गोटा और सितारे लगाने का काम करते हैं। यहां तैयार चुनरियां हरिद्वार के चंडी देवी और मनसा देवी मंदिरों तक भी पहुंचती हैं।
मां तो मां होती है, धर्म से क्या लेना
नीमा और उसका परिवार करीब डेढ़ दशक से मां की चुनरी तैयार कर रहा है। उनका कहना है कि इस काम से परिवार का गुजारा करने में मदद मिलती है और साथ ही आपसी सौहार्द का संदेश भी जाता है। खुर्शीदा और सानिया ने बताया कि मां तो मां होती है, इसका धर्म से क्या लेना। इसीलिए मुस्लिम होकर मां दुर्गा की चुनरी तैयार करने में हमें कभी कोई झिझक नहीं हुई। उनका कहना है कि आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए यह अच्छी मिसाल है।
विज्ञापन
एक दिन में तैयार होती हैं 25 से 30 चुनरियां
रुखसाना और रूबी ने बताया कि चुनरी बनाने में करीब एक घंटे का समय लगता है। एक चुनरी पर गोटा और सितारे लगाने के आठ से 10 रुपये मिलते हैं। परिवार का एक सदस्य दिनभर में 25 से 30 चुनरियां तैयार कर लेता है। इससे होने वाली आमदनी परिवार के खर्च में सहयोग करती है।
गांव में चुनरियां तैयार होने के बाद कोई भी एक परिवार उन्हें विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेता है। बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड तक इनको पहुंचाते हैं। बाजार में यही चुनरियां करीब 100 से 150 रुपये में बिकती हैं।
विज्ञापन
हिलवाड़ी गांव में 250 मुस्लिम परिवार रहते हैं। इनमें 100 परिवार नवरात्र से पहले चुनरी तैयार करने के काम में जुट जाते हैं। घर की महिलाएं, युवतियां, बच्चे और अन्य सदस्य सुबह से शाम तक चुनरी पर गोटा और सितारे लगाने का काम करते हैं। यहां तैयार चुनरियां हरिद्वार के चंडी देवी और मनसा देवी मंदिरों तक भी पहुंचती हैं।
विज्ञापन
मां तो मां होती है, धर्म से क्या लेना
नीमा और उसका परिवार करीब डेढ़ दशक से मां की चुनरी तैयार कर रहा है। उनका कहना है कि इस काम से परिवार का गुजारा करने में मदद मिलती है और साथ ही आपसी सौहार्द का संदेश भी जाता है। खुर्शीदा और सानिया ने बताया कि मां तो मां होती है, इसका धर्म से क्या लेना। इसीलिए मुस्लिम होकर मां दुर्गा की चुनरी तैयार करने में हमें कभी कोई झिझक नहीं हुई। उनका कहना है कि आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए यह अच्छी मिसाल है।
विज्ञापन
एक दिन में तैयार होती हैं 25 से 30 चुनरियां
रुखसाना और रूबी ने बताया कि चुनरी बनाने में करीब एक घंटे का समय लगता है। एक चुनरी पर गोटा और सितारे लगाने के आठ से 10 रुपये मिलते हैं। परिवार का एक सदस्य दिनभर में 25 से 30 चुनरियां तैयार कर लेता है। इससे होने वाली आमदनी परिवार के खर्च में सहयोग करती है।
गांव में चुनरियां तैयार होने के बाद कोई भी एक परिवार उन्हें विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेता है। बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड तक इनको पहुंचाते हैं। बाजार में यही चुनरियां करीब 100 से 150 रुपये में बिकती हैं।