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नर्सिंगहोम में गर्भवती की मौत, हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Thu, 15 Sep 2016 01:17 AM IST
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बागपत में वंदना चौक के पास हाईवे पर गाड़ी के आगे लेटकर जाम लगाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेरठ रोड पर स्थित नैन मेडिकल सेंटर में प्रसव के दौरान महिला की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। इस दौरान कुछ लोगों ने तोड़फोड़ करने का भी प्रयास किया।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। गुस्साए लोगों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर रख कर जाम लगाया। लोगों की पुलिस अफसरों से नोकझोंक भी हुई। उन्होंने कहा यदि दो दिन में आरोपी चिकित्सक की गिरफ्तारी नहीं की तो आंदोलन होगा।
पुराना कस्बे के तेलियान मोहल्ला निवासी बाबू पुत्र मजीद ने बताया उसकी पत्नी नरगिस को प्रसव पीड़ा होने पर वह मंगलवार की रात में शहर के नैन मेडिकल सेंटर में पहुंचा। वहां की डॉ. शुचि नैन ने जांच कर 25 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा। सामान्य प्रसव की बात कही थी। नरगिस को भर्ती कर इंजेक्शन लगाकर डॉक्टर अपने कमरे में चली गई। आरोप है इसके बाद नरगिस को देखने कोई नहीं आया।
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इस दौरान गर्भवती की हालत बिगड़ गई। उनके चिल्लाने पर सुबह करीब पांच बजे डॉ. शुचि नैन अपने पति के साथ पहुंची। उसको इंजेक्शन लगाने लगी, लेकिन तब तक नरगिस की मौत हो चुकी थी। आरोप लगाया चिकित्सकों ने मृत नरगिस को घसीट कर अस्पताल के बाहर फेंक दिया। विरोध करने पर उन्हें भी धक्का देकर बाहर निकाल दिया। आरोप लगाया शुचि नैन के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है।
मौके पर काफी लोग इकट्ठे हो गए और हंगामा किया। कई लोगों ने तो अस्पताल में तोड़फोड़ करने का भी प्रयास किया। इस दौरान गुस्साएं लोगों की पुलिस के साथ नोकझोंक भी हुई। बाद में पालिका चेयरमैन राजूद्दीन ने समझा बुझाकर क्षुब्ध लोगों को शांत किया। बाबू ने कोतवाली में तहरीर दी, इसमें डॉ. शुचि नैन के खिलाफ (धारा 304 आईपीसी) रिपोर्ट दर्ज की गई।
पोस्टमार्टम होने के बाद सैकड़ों महिला और पुरुष आरोपी महिला चिकित्सक की गिरफ्तारी और अस्पताल पर सील लगाने की मांग को लेकर शव के साथ पहले कोतवाली पहुंचे। इसके बाद दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित राष्ट्र वंदना चौक पर पहुंच गए। वहां शव को रखकर जाम लगा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही एएसपी अजीजुल हक, खेकड़ा एसडीएम आदित्य प्रजापति, सीओ राजवीर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
उनकी लोगों से काफी नोकझोंक भी हुई। बाद में उन्होंने जाम खुलवाया। इसके बाद कोतवाली में पहुंचकर एएसपी अजीजुल हक और चेयरमैन राजूद्दीन ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। एएसपी अजीजुल हक ने कहा घटना की रिपोर्ट दर्ज हो गई है। आरोपी महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
नरगिस को होना था पांचवां बच्चा
बागपत। परिजनों के मुताबिक नरगिस के तीन बेटी मुस्कान (8), कौसर (6), साजिया (2) और एक बेटा नवाजिश (4) है। घटना से परिवार में कोहराम मचा है।
हॉस्पिटल में नहीं हुई नरगिस की मौत : नैन
नैन मेडिकल सेंटर के संचालक डॉ. वीर भयंकर नैन का कहना है कि महिला नरगिस को उसके परिजन बुधवार सुबह करीब पांच बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने के कारण उन्होंने उसे प्राथमिक उपचार देकर मेरठ के लिए भेज दिया था। रास्ते में ही उसकी मौत हुई है। इसके बाद उसके परिजन शव को लेकर अस्पताल पहुंचे। हॉस्पिटल के गेट पर शव को रखकर परिजनों ने हंगामा किया। उन पर लगाया आरोप गलत है।
अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते चली गई नरगिस की जान
बागपत। बाबू ने बताया वह दो दिन पहले अपनी पत्नी नरगिस को प्रसव पीड़ा होने पर बागपत सीएचसी लेकर गया। वहां के चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल भेजा। वहां की महिला चिकित्सकों ने नरगिस की जांच करने के बाद वापस घर भेज दिया और बोली, अभी डिलीवरी नहीं होगी, इसको टहलाओ। इसके बाद वह शहर के निजी नर्सिंग होम में लेकर गया। वहां भी उसका इलाज नहीं हुआ।
मंगलवार की रात में दर्द ज्यादा होने पर सीएचसी लेकर गया। वहां स्टाफ नहीं मिला तो नैन मेडिकल सेंटर में चला गया। नतीजा यह हुआ कि उसकी पत्नी की जान चली गई। उन्होंने कहा चिकित्सकों की लापरवाही के कारण नरगिस की जान गई है। इससे पहले मंगलवार की रात में वह अपनी मां नूरजहां के साथ नरगिस को रात करीब दो बजे लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचा, वहां स्टाफ नहीं मिला। फिर नर्सिंगहोम पहुंचा था।
मामले की होगी जांच : सीएमओ
सीएमओ डॉ. रविंद्र कुमार मिश्र ने कहा पूरे मामले की जांच की जा रही है। इसी के आधार पर कार्रवाई होगी।
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पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। गुस्साए लोगों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर रख कर जाम लगाया। लोगों की पुलिस अफसरों से नोकझोंक भी हुई। उन्होंने कहा यदि दो दिन में आरोपी चिकित्सक की गिरफ्तारी नहीं की तो आंदोलन होगा।
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पुराना कस्बे के तेलियान मोहल्ला निवासी बाबू पुत्र मजीद ने बताया उसकी पत्नी नरगिस को प्रसव पीड़ा होने पर वह मंगलवार की रात में शहर के नैन मेडिकल सेंटर में पहुंचा। वहां की डॉ. शुचि नैन ने जांच कर 25 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा। सामान्य प्रसव की बात कही थी। नरगिस को भर्ती कर इंजेक्शन लगाकर डॉक्टर अपने कमरे में चली गई। आरोप है इसके बाद नरगिस को देखने कोई नहीं आया।
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इस दौरान गर्भवती की हालत बिगड़ गई। उनके चिल्लाने पर सुबह करीब पांच बजे डॉ. शुचि नैन अपने पति के साथ पहुंची। उसको इंजेक्शन लगाने लगी, लेकिन तब तक नरगिस की मौत हो चुकी थी। आरोप लगाया चिकित्सकों ने मृत नरगिस को घसीट कर अस्पताल के बाहर फेंक दिया। विरोध करने पर उन्हें भी धक्का देकर बाहर निकाल दिया। आरोप लगाया शुचि नैन के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है।
मौके पर काफी लोग इकट्ठे हो गए और हंगामा किया। कई लोगों ने तो अस्पताल में तोड़फोड़ करने का भी प्रयास किया। इस दौरान गुस्साएं लोगों की पुलिस के साथ नोकझोंक भी हुई। बाद में पालिका चेयरमैन राजूद्दीन ने समझा बुझाकर क्षुब्ध लोगों को शांत किया। बाबू ने कोतवाली में तहरीर दी, इसमें डॉ. शुचि नैन के खिलाफ (धारा 304 आईपीसी) रिपोर्ट दर्ज की गई।
पोस्टमार्टम होने के बाद सैकड़ों महिला और पुरुष आरोपी महिला चिकित्सक की गिरफ्तारी और अस्पताल पर सील लगाने की मांग को लेकर शव के साथ पहले कोतवाली पहुंचे। इसके बाद दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित राष्ट्र वंदना चौक पर पहुंच गए। वहां शव को रखकर जाम लगा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही एएसपी अजीजुल हक, खेकड़ा एसडीएम आदित्य प्रजापति, सीओ राजवीर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
उनकी लोगों से काफी नोकझोंक भी हुई। बाद में उन्होंने जाम खुलवाया। इसके बाद कोतवाली में पहुंचकर एएसपी अजीजुल हक और चेयरमैन राजूद्दीन ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। एएसपी अजीजुल हक ने कहा घटना की रिपोर्ट दर्ज हो गई है। आरोपी महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
नरगिस को होना था पांचवां बच्चा
बागपत। परिजनों के मुताबिक नरगिस के तीन बेटी मुस्कान (8), कौसर (6), साजिया (2) और एक बेटा नवाजिश (4) है। घटना से परिवार में कोहराम मचा है।
हॉस्पिटल में नहीं हुई नरगिस की मौत : नैन
नैन मेडिकल सेंटर के संचालक डॉ. वीर भयंकर नैन का कहना है कि महिला नरगिस को उसके परिजन बुधवार सुबह करीब पांच बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने के कारण उन्होंने उसे प्राथमिक उपचार देकर मेरठ के लिए भेज दिया था। रास्ते में ही उसकी मौत हुई है। इसके बाद उसके परिजन शव को लेकर अस्पताल पहुंचे। हॉस्पिटल के गेट पर शव को रखकर परिजनों ने हंगामा किया। उन पर लगाया आरोप गलत है।
अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते चली गई नरगिस की जान
बागपत। बाबू ने बताया वह दो दिन पहले अपनी पत्नी नरगिस को प्रसव पीड़ा होने पर बागपत सीएचसी लेकर गया। वहां के चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल भेजा। वहां की महिला चिकित्सकों ने नरगिस की जांच करने के बाद वापस घर भेज दिया और बोली, अभी डिलीवरी नहीं होगी, इसको टहलाओ। इसके बाद वह शहर के निजी नर्सिंग होम में लेकर गया। वहां भी उसका इलाज नहीं हुआ।
मंगलवार की रात में दर्द ज्यादा होने पर सीएचसी लेकर गया। वहां स्टाफ नहीं मिला तो नैन मेडिकल सेंटर में चला गया। नतीजा यह हुआ कि उसकी पत्नी की जान चली गई। उन्होंने कहा चिकित्सकों की लापरवाही के कारण नरगिस की जान गई है। इससे पहले मंगलवार की रात में वह अपनी मां नूरजहां के साथ नरगिस को रात करीब दो बजे लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचा, वहां स्टाफ नहीं मिला। फिर नर्सिंगहोम पहुंचा था।
मामले की होगी जांच : सीएमओ
सीएमओ डॉ. रविंद्र कुमार मिश्र ने कहा पूरे मामले की जांच की जा रही है। इसी के आधार पर कार्रवाई होगी।