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गवाही मतलब मौत, ऐसे में कौन करेगा पैरवी
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:37 AM IST
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परिजनों से वारदात की जानकारी लेेते सहायक पुलिस अधीक्षक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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न्याय के लिए लड़ रहे लोगों की हत्या से पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लचर जांच और गवाहों के मुकरने से आरोपियों के बच निकलने के मामले पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं। कई बार कोर्ट की टिप्पणी भी आई है। यदि किसी मामले में गवाह और पैरवी करने वाले मजबूत है तो पुलिस उनकी सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है।
जिले में गवाह और पैरवी करने वालों की हत्या की घटनाओं की फेहरिस्त दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। पुलिस से भरोसा टूट रहा है तो रंजिशें भी गहरा रही है। पुरा गांव के दोहरे हत्याकांड से एक बार फिर यही साबित हुआ। बबीता अपने पति धीरज की हत्या करने वालों को सजा दिलाना चाहती थी।
लेकिन उसे भी मौत ही मिली। आरोपी सजा से बचने के लिए वादी और गवाहों को निशाने पर लेते हैं। उन्हें डराते-धमकाते हैं। ऐसे भी कई मामले हैं, जब सुरक्षा के बीच भी वादी और गवाहों को मौत के घाट उतारा गया। लोग पुलिस से पूछ रहे हैं कि यही हाल रहा तो कौन गवाही देने को आगे आएगा।
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ः खून से लाल हुई गांगनौली की धरती
गांगनौली गांव के युवक परीक्षित की हत्या के केस की उसकी मां सविता देवी पैरवी कर रही थी। कई बार उसे धमकी दी गई। 10 अक्टूबर 2016 को सविता, उसकी बेटी प्रीति, पिता मांगेराम चौधरी और उनकी सुरक्षा में लगे पीएसी के एचसीपी राकेश शर्मा और पुलिस लाइन के कांस्टेबल विजय कुमार की हत्या कर कर दी गई थी।
ः सजा दिलाने की कोशिश में चार की और जान गई
गांगनौली गांव में ही युवक प्रवीण की रंजिश के चलते 12 सितंबर 2012 को हत्या कर दी गई थी। केस में समझौते के लिए परिवार तैयार नहीं हुई तो माता-पिता, चेचरे दो भाईयों को जान गवानी पड़ी थी। तीन हत्या तो पुलिस सुरक्षा में हुई थी। अभी भी परिवार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।
ः हेडमास्टर ने गंवाई जान, बेटे का घर छूटा
सिंघावली अहीर गांव के हेड मास्टर सत्यपाल शर्मा के बेटे की जमीनी रंजिश में हत्या कर दी गई थी। सत्यपाल शर्मा केस की पैरवी कर रहे थे। आरोपियों ने उसकी भी 23 अप्रैल 2016 को खिंदौड़ा गांव के स्कूल में हत्या कर दी थी। पैरवी कर रहे परिवार का घर छूट गया है, लेकिन पुलिस को इसकी कोई चिंता अब तक नहीं है।
ः धनौरा सिल्वरनगर में भाई की गई जान
धनौरा सिल्वरनगर गांव के किसान देवी सिंह के भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी। देवी सिंह केस की पैरवी कर रहे थे। उसकी पिछले साल पुलिस सुरक्षा में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। बबीता का बेटा कुंज उसके शामली के भाज्जू गांव में अपनी मौसी के घर रह रहा है। मौसा हरेंद्र ने एसपी डी प्रदीप कुमार से कुंज की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
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जिले में गवाह और पैरवी करने वालों की हत्या की घटनाओं की फेहरिस्त दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। पुलिस से भरोसा टूट रहा है तो रंजिशें भी गहरा रही है। पुरा गांव के दोहरे हत्याकांड से एक बार फिर यही साबित हुआ। बबीता अपने पति धीरज की हत्या करने वालों को सजा दिलाना चाहती थी।
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लेकिन उसे भी मौत ही मिली। आरोपी सजा से बचने के लिए वादी और गवाहों को निशाने पर लेते हैं। उन्हें डराते-धमकाते हैं। ऐसे भी कई मामले हैं, जब सुरक्षा के बीच भी वादी और गवाहों को मौत के घाट उतारा गया। लोग पुलिस से पूछ रहे हैं कि यही हाल रहा तो कौन गवाही देने को आगे आएगा।
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ः खून से लाल हुई गांगनौली की धरती
गांगनौली गांव के युवक परीक्षित की हत्या के केस की उसकी मां सविता देवी पैरवी कर रही थी। कई बार उसे धमकी दी गई। 10 अक्टूबर 2016 को सविता, उसकी बेटी प्रीति, पिता मांगेराम चौधरी और उनकी सुरक्षा में लगे पीएसी के एचसीपी राकेश शर्मा और पुलिस लाइन के कांस्टेबल विजय कुमार की हत्या कर कर दी गई थी।
ः सजा दिलाने की कोशिश में चार की और जान गई
गांगनौली गांव में ही युवक प्रवीण की रंजिश के चलते 12 सितंबर 2012 को हत्या कर दी गई थी। केस में समझौते के लिए परिवार तैयार नहीं हुई तो माता-पिता, चेचरे दो भाईयों को जान गवानी पड़ी थी। तीन हत्या तो पुलिस सुरक्षा में हुई थी। अभी भी परिवार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।
ः हेडमास्टर ने गंवाई जान, बेटे का घर छूटा
सिंघावली अहीर गांव के हेड मास्टर सत्यपाल शर्मा के बेटे की जमीनी रंजिश में हत्या कर दी गई थी। सत्यपाल शर्मा केस की पैरवी कर रहे थे। आरोपियों ने उसकी भी 23 अप्रैल 2016 को खिंदौड़ा गांव के स्कूल में हत्या कर दी थी। पैरवी कर रहे परिवार का घर छूट गया है, लेकिन पुलिस को इसकी कोई चिंता अब तक नहीं है।
ः धनौरा सिल्वरनगर में भाई की गई जान
धनौरा सिल्वरनगर गांव के किसान देवी सिंह के भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी। देवी सिंह केस की पैरवी कर रहे थे। उसकी पिछले साल पुलिस सुरक्षा में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। बबीता का बेटा कुंज उसके शामली के भाज्जू गांव में अपनी मौसी के घर रह रहा है। मौसा हरेंद्र ने एसपी डी प्रदीप कुमार से कुंज की सुरक्षा की गुहार लगाई है।