दो जिलों के पुलिस के धुरंधर फेल, सेटिंग से सरेंडर में मोनू जाट पास

ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत Updated Sun, 02 Oct 2016 04:04 PM IST
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सोनीपत पुलिस की गिरफ्त में मोनू अौर नितिन
सोनीपत पुलिस की गिरफ्त में मोनू अौर नितिन - फोटो : अमर उजाला

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बागपत। 50 हजार के इनामी कुख्यात मोनू जाट को पकड़ने में पुलिस के  धुरंधर फेल साबित हुए। जबकि दो जिलों की पुलिस फोर्स और एसटीएफ को चकमा देकर मोनू सेटिंग से सरेंडर करने में कामयाब रहा। अफसर फोर्स लेकर रोहटा और टीकरी के जंगल की खाक छानते रह गए। जबकि मोनू ने सोनीपत पहुंचकर खुद को सेफ साइड कर लिया।
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रोहटा निवासी अमित उर्फ मोनू जाट रंगदारी न देने पर लोगों की हत्या कर रहा था। गांव में दहशत का माहौल था। मोनू ने गांव के करीब 25 लोगों को रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दे रखी थी। करीब 10 लोगों को वह मार चुका था। रोहटा में पुलिस और पीएसी का पहरा लगा तो मोनू ने गैंग में अपने साथी नितिन उर्फ छोटू समेत तीन लोगों को शामिल कर लिया। मोनू ने नितिन के गांव टीकरी बागपत में भी दो लोगों की हत्या कर दी। एक के बाद दोनों जनपदों में हत्या होने पर डीजीपी ने मोनू पर 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया। 
एसएसपी मेरठ जे. रविंदर गौड़ ने मोनू को दबोचने के लिए महकमे के काबिल और धुरंधर अफसर और सिपाही लगाए। दो एएसपी, तीन सीओ, बीस दरोगा और तीन इंस्पेक्टरों के अलावा 50 पुलिसकर्मियों की टीम उसकी तलाश में लगी थी। एसटीएफ ने अलग से जाल बिछा रखा था। उसकी लोकेशन मेरठ और बागपत के जंगलों में ही मिलने के दावे किए जा रहे थे। लेकिन उसका सुराग तक नहीं लग पाया।

धरे रह गए बड़े-बड़े दावे
सूत्रों के मुताबिक मोनू जाट को पुलिस अफसरों ने जिंदा या मुर्दा दबोचने की कसम तक खा ली थी। एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन, सीओ सरधना बृजेश सिंह और तेजतर्रार इंस्पेक्टर राजेश वर्मा ने कसम खाई थी कि मोनू को वह जिंदा या मुर्दा पकड़कर गोली मारेंगे। सीओ सरधना का सहारनपुर ट्रांसफर हो गया था, बावजूद उनको मोनू ऑपरेशन के लिए रोका गया। एसपी देहात ने तो एलान किया था कि मोनू को दो गोली तो वह जरूर मारेंगे। 

मोनू ने खेला शातिर दांव

मोनू ने ऐसा शातिर दांव खेला कि धुरंधर अफसर चित हो गए। ऐसा नहीं कि उसे पुलिस अफसरों का खौफ नहीं था। वह जानता था कि अगर मेरठ या बागपत में वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो बचेगा नहीं। इसलिए उसने योजना के मुताबिक बृहस्पतिवार और शुक्रवार को ही अफवाह फैलवा दी कि वह मेरठ-बड़ौत मार्ग पर रोहटा के पास जंगल में नलकूप पर छिपा है। ऐसी ही अफवाह उसने बागपत के टिकरी के जंगल में छिपे होने की फैला दी। पुलिस का पूरा अमला  यहां लगा रहा और उसने सोनीपत में सरेंडर कर दिया। वहीं, चर्चा है कि मोनू को सोनीपत में सरेंडर कराने में दिल्ली पुलिस के एक सिपाही का  हाथ है। इस सिपाही ने ही सेटिंग कराई। मेरठ पुलिस भी स्वीकार कर रही है कि मोनू सेटिंग से सरेंडर हुआ है। 
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