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डीएम ऑफिस में किसान ने किया आत्महत्या का प्रयास
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 23 Oct 2015 11:48 PM IST
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बागपत में बकाया गन्ना भुगतान नहीं होने से उपचार के अभाव में बहू की मौत हो गई। इससे व्यथित किसान ने शुक्रवार को डीएम आफिस में अधिकारियों के सामने ही फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की। वहां मौजूद लोगों ने बड़ी मुश्किल से उसे बचाया और समझाकर शांत किया। एडीएम ने डीसीओ को शीघ्र ही उसका गन्ना भुगतान कराने का निर्देश दिया है।
शुक्रवार को जिलाधिकारी आफिस आए छपरौली निवासी सहदेव सिंह ने अधिकारियों को अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि उसका गन्ने का मलकपुर मिल पर साढे़ तीन लाख रुपये बकाया है। उसकी पुत्रवधू गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। पहले मेरठ में इलाज कराया, लेकिन मेरठ से जवाब दे दिया तो सांसद के सहयोग से एम्स में भर्ती कराया।
एम्स में बहू का इलाज कराने में उसका सब कुछ चला गया। कर्जा लेकर इलाज कराया। उपचार के लिए और पैसे ही जरूरत पड़ी। उसने गन्ना अधिकारियों के चक्कर काटे, अर्जी लगाई, लेकिन अधिकारी उसे टालते रहे। आखिरकार उसकी बहू की मौत हो गई, लेकिन उसे मिल पर बकाया अपना रुपया ही नहीं मिला।
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उसने कहा वह कर्जदार हो गया, साहूकार दरवाजे पर वसूली के लिए चक्कर काट रहा है। लेकिन मिल अभी भी पैसा नहीं दे रही है। न जाने और किस नुकसान का इंतजार कर रही है।
यह सब कहते हुए किसान सहदेव की आंखों से आंसू छलक पडे़ और उसने जिलाधिकारी कक्ष में अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार मालपाणी, जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार और अन्य किसानों के सामने अपने ही गमछे से अपने गले में फांसी की गांठ लगा ली और आत्महत्या का प्रयास किया।
यह देख वहां हड़कंप मच गया। लोगों ने किसी तरह से उसे बचाया और समझा बुझाकर शांत किया। वह काफी देर तक किसान कोने में बैठा सुबकता रहा। अन्य किसानों ने उसे आश्वासन दिया। एडीएम राकेश कुमार मालपाणी ने डीसीओ सुशील कुमार को सहदेव का प्राथमिकता के आधार पर गन्ने का भुगतान कराने के निर्देश दिए।
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शुक्रवार को जिलाधिकारी आफिस आए छपरौली निवासी सहदेव सिंह ने अधिकारियों को अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि उसका गन्ने का मलकपुर मिल पर साढे़ तीन लाख रुपये बकाया है। उसकी पुत्रवधू गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। पहले मेरठ में इलाज कराया, लेकिन मेरठ से जवाब दे दिया तो सांसद के सहयोग से एम्स में भर्ती कराया।
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एम्स में बहू का इलाज कराने में उसका सब कुछ चला गया। कर्जा लेकर इलाज कराया। उपचार के लिए और पैसे ही जरूरत पड़ी। उसने गन्ना अधिकारियों के चक्कर काटे, अर्जी लगाई, लेकिन अधिकारी उसे टालते रहे। आखिरकार उसकी बहू की मौत हो गई, लेकिन उसे मिल पर बकाया अपना रुपया ही नहीं मिला।
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उसने कहा वह कर्जदार हो गया, साहूकार दरवाजे पर वसूली के लिए चक्कर काट रहा है। लेकिन मिल अभी भी पैसा नहीं दे रही है। न जाने और किस नुकसान का इंतजार कर रही है।
यह सब कहते हुए किसान सहदेव की आंखों से आंसू छलक पडे़ और उसने जिलाधिकारी कक्ष में अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार मालपाणी, जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार और अन्य किसानों के सामने अपने ही गमछे से अपने गले में फांसी की गांठ लगा ली और आत्महत्या का प्रयास किया।
यह देख वहां हड़कंप मच गया। लोगों ने किसी तरह से उसे बचाया और समझा बुझाकर शांत किया। वह काफी देर तक किसान कोने में बैठा सुबकता रहा। अन्य किसानों ने उसे आश्वासन दिया। एडीएम राकेश कुमार मालपाणी ने डीसीओ सुशील कुमार को सहदेव का प्राथमिकता के आधार पर गन्ने का भुगतान कराने के निर्देश दिए।