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'अब तक नहीं समझे, क्या हो गया था अपनों को’

Thu, 08 Sep 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Thu, 08 Sep 2016 01:03 AM IST
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Story of Muzaffarnagar riots
बागपत के पुराना कस्बे में रह रहे मुजफ्फरनगर के मोहम्मदपुर रायसिंह निवासी डा. समीर के परिजन दंगे के दौरान की घटना बयां करते हुए। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 मुजफ्फरनगर दंगे की आग बागपत तक भी पहुंची थी। आठ सितंबर की रात में वाजिदपुर गांव में फायरिंग हुई। बच्चे समेत दो लोगों की मौत के बाद जिले में तनाव फैल गया था। काठा और किरठल गांव में दंगे का असर देखने को मिला। मुजफ्फरनगर के सैकड़ों परिवार बागपत में रह रहे हैं। दंगे का जिक्र छिड़ते ही वह गमजदा हो जाते हैं। कहते हैं  न जाने हमारे अपनों का ही क्या हो गया था। जिनके साथ जिंदगी गुजारी, वही हवा के रुख की तरह बदले और खून बहाने लगे। कुदरत से दुआ है कि फिर कभी किसी को ऐसे दिन न देखने पड़ें।
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बामनौली में महिला का कत्ल
दोघट क्षेत्र के बामनौली गांव में अख्तरी नाम की महिला की पांच सितंबर को हत्या कर दी गई थी। परिवार के लोग गांव छोड़ गए। अख्तर का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। मामले में सात लोग नामजद किए गए थे।
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राज बन गए किरठल के कारतूस ः बागपत के किरठल गांव से दंगे के दौरान एके 47 के कारतूस बरामद हुए थे। यह कारतूस कहां से आए और किरठल तक कैसे पहुंचे यह अब तक राज ही बना हुआ है।
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बागपत से गायब मासूम नहीं मिला ः बागपत के सुभाष गेट के पास से दंगे के दौरान एक मासूम लापता हो गया था, जिसका आज तक कोई सुराग नहीं लग सका है। पीड़ित परिवार पुलिस से गुहार लगाकर थक चुका है।

रात में छोड़ा था मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर के भौरा कलां थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर राय सिंह की वृद्धा हसीना का कहना है कि सात सितंबर की रात में उनके  जेठ दौड़े हुए घर आए थे। वह आराम कर रहे थे। बोले, दंगा भड़क गया है। उनके गांव में भी रहीसू की हत्या कर दी गई है। जल्दी अभी निकलना है। इसके बाद वह रात में किसी तरह बुढ़ाना और बड़ौत हुए बागपत तक पहुंचे। हसीना का कहना है कि वह दुआ करते हैं कि फिर कभी ऐसी रात न आए।

वाजिदपुर में बहाया गया था खून
बड़ौत से सटे वाजिदपुर गांव में आठ सितंबर की रात खून-खराबा हुआ था। किशोर शोहेब की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इकबाल ने अस्पताल में दम तोड़ा था। धार्मिक स्थल में आगजनी की गई।


किशोर का परिवार गांव से पलायन कर गया और अब तक गांव नहीं लौटा, लेकिन इकबाल के परिजनों को पूरे क्षेत्र के लोग मनाने पहुंचे और वह आज भी अपने गांव में रहते हैं। इकबाल के परिवार का कहना है कि कुदरत किसी को ऐसे दिन कभी न दिखाए। अब गांव के लोग बेहद प्यार  से रहते हैं।
 
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