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यमुना में मिली पप्पू की गर्दन
ब्यूरो/अमर उजाला, छपरौली
Updated Tue, 13 Oct 2015 12:59 AM IST
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शेरपुर गांव के दो सगे भाई पप्पू और विकास की अपहरण कर गर्दन काटकर की गई हत्या के मामले में सोमवार सुबह पप्पू की गर्दन बदरखा गांव में यमुना से मिल गई है। पुलिस ने उसे कब्जे में लेकर डीएनए टेस्ट को लखनऊ भेजने की तैयारी कर ली है।
मृतकों के भाई तरसपाल सिंह का कहना है कि सोमवार सुबह बदरखा गांव के यमुना खादर में कुछ लोग अपने पशुओं को चरा रहे थे। इसी दौरान उन्हें यमुना में कटी हुई गर्दन दिखाई दी। उन लोगों ने इसकी जानकारी फोन से उन्हें दी। वे तुरंत वहां पर पहुंचे। उन्होंने दांतों से पप्पू की गर्दन के रूप में शिनाख्त की। मौके पर काफी लोग इकट्ठे हो गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने खोपड़ी को कब्जे में ले लिया है। 15 दिन पूर्व इसी स्थान पर विकास की कटी हुई गर्दन पड़ी मिली थी। उस समय लोगों ने पप्पू की गर्दन को काफी तलाश किया था। हालांकि सफलता नहीं मिल पाई थी। छपरौली थाना प्रभारी धर्मेंद्र पंवार का कहना है कि बदरखा खादर में मिली खोपड़ी प्रथम दृष्टयता पप्पूृ की प्रतीत हो रही है। सहीं पता लगाने के लिए खोपड़ी का सैंपल डीएनए को भेजा जाएगा।
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यह है मामला
बागपत। शेरपुर लुहारा गांव के पप्पू को 15 जुलाई 2015 को फोन करके घर से बुलाया था। उसके भाई विकास को गांव के हिस्ट्रीशीटर अमरपाल ने पहले से ही अपने कब्जे में ले रखा था। दो दिन बाद उनकी गर्दन कटी लाश बदरखा गांव के खादर में यमुना किनारे पड़ी मिली थी।
परिजनों ने गांव के ही हिस्ट्रीशीटर अमरपाल, वीरसैन, सुरेश, नरेश, धर्मदत्त और अरविंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने 21 जुलाई को आरोपी अमरपाल को गिरफ्तार कर केस का खुलासा कर दिया था। अमरपाल ने खुलासा किया था कि उसने अपने 12 साथियों के सहयोग से विकास और पप्पू का अपहरण, हत्या कर उन्हें ठिकाने लगाया है।
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मृतकों के भाई तरसपाल सिंह का कहना है कि सोमवार सुबह बदरखा गांव के यमुना खादर में कुछ लोग अपने पशुओं को चरा रहे थे। इसी दौरान उन्हें यमुना में कटी हुई गर्दन दिखाई दी। उन लोगों ने इसकी जानकारी फोन से उन्हें दी। वे तुरंत वहां पर पहुंचे। उन्होंने दांतों से पप्पू की गर्दन के रूप में शिनाख्त की। मौके पर काफी लोग इकट्ठे हो गए।
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सूचना पर पहुंची पुलिस ने खोपड़ी को कब्जे में ले लिया है। 15 दिन पूर्व इसी स्थान पर विकास की कटी हुई गर्दन पड़ी मिली थी। उस समय लोगों ने पप्पू की गर्दन को काफी तलाश किया था। हालांकि सफलता नहीं मिल पाई थी। छपरौली थाना प्रभारी धर्मेंद्र पंवार का कहना है कि बदरखा खादर में मिली खोपड़ी प्रथम दृष्टयता पप्पूृ की प्रतीत हो रही है। सहीं पता लगाने के लिए खोपड़ी का सैंपल डीएनए को भेजा जाएगा।
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यह है मामला
बागपत। शेरपुर लुहारा गांव के पप्पू को 15 जुलाई 2015 को फोन करके घर से बुलाया था। उसके भाई विकास को गांव के हिस्ट्रीशीटर अमरपाल ने पहले से ही अपने कब्जे में ले रखा था। दो दिन बाद उनकी गर्दन कटी लाश बदरखा गांव के खादर में यमुना किनारे पड़ी मिली थी।
परिजनों ने गांव के ही हिस्ट्रीशीटर अमरपाल, वीरसैन, सुरेश, नरेश, धर्मदत्त और अरविंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने 21 जुलाई को आरोपी अमरपाल को गिरफ्तार कर केस का खुलासा कर दिया था। अमरपाल ने खुलासा किया था कि उसने अपने 12 साथियों के सहयोग से विकास और पप्पू का अपहरण, हत्या कर उन्हें ठिकाने लगाया है।