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बागपत में बेटियां महफूज नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 15 Oct 2017 01:32 AM IST
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जनपद बागपत में बेटियां सुरक्षित नहीं है। गली-मोहल्ले से लेकर बस, ट्रेन यहां तक की स्कूल बसों में छेड़छाड़ के सामने सामने आ रहे हैं। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर चलती बस में मनचलों ने सहारनपुर की एमबीबीएस की छात्र के साथ छेड़छाड़ की, विरोध करने पर भाई को पीटा। दो दिन पहले ही स्कूल बस के हेल्पर ने किशोरी को अश्लील वीडियो दिखाने का मामला सामने आया।
सरकार के तमाम दावे हैं, लेकिन हकीकत उल्टी है। महिलाएं सुरक्षित नहीं है। पिछले छह माह में सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन छेड़छाड़ के प्रकरणों को थानों में समझौता कर निपटा दिया जाता है। कहीं लोक लाज का डर तो कहीं आरोपियों की ताकत के सामने ही पीड़ित लाचार हो जाते हैं।
केस : 1
बागपत के मुख्य बाजार से जुलाई माह में एक युवती अपने सहेलियों के साथ सामान खरीदकर घर लौट रही थी। रास्ते में एक युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ की थी। विरोध करने पर आरोपी ने युवती का सिर फोड़ दिया । पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। मामला विचाराधीन है।
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केस : 2
छपरौली क्षेत्र की एक युवती अधिवक्ता के पास से डेढ़ माह पहले अपने घर जा रही थी। कलक्ट्रेट के पास कार सवार एक युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ कर अपने साथियों के साथ गाड़ी में खींचने का प्रयास किया , लेकिन मौके पर सैकड़ों लोगों की भी जुट गई। आरोपी भाग गए थे।
केस : 3
दिल्ली से रोडवेज बस में सवार होकर मेडिकल की छात्रा, अपने भाई के साथ सहारनपुर जा रही थी। सरूरपुर गांव के पास छात्रा के साथ मनचलों ने छेड़छाड़ की थी। विरोध करने पर उसके भाई को चलती बस से फेंकने का प्रयास किया था। मामला सुर्खियां बना, लेकिन पीड़ित ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई से इंकार कर दिया था।
पहले गिरफ्तारी, फिर करेंगे अंतिम संस्कार
रमाला। आत्महत्या करने वाली किशोरी का शव जैसे ही गांव पहुंचा ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि पहले आरोपियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। इससे पुलिस के हाथ पैर फूल गए। करीब ढाई घंटे तक ग्रामीणों ने किशोरी का अंतिम संस्कार नहीं किया। इस पर पुलिस हरकत में आई।
सीओ रमाला आनंद कुमार पांडेय ग्रामीणों के बीच पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना देते हुए ग्रामीणों को मनाया। इसके बाद ग्रामीण मान गए और अंतिम संस्कार किया। इस दौरान ब्राह्मण समाज के योगेश शर्मा समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
छेड़छाड़ के 70, रेप के 26 मुकदमे
इस वर्ष अब तक छेड़छाड़ के 70 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि रेप के 26 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस भले ही बेटियों के सुरक्षित होने का दावा करती हो, लेकिन आंकड़े पुलिस के दावों को झुठला रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड में अब तक छेड़छाड़ के 70 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। एंटी रोमियो स्कवॉयड भी बेअसर साबित हो रहा है। थाना स्तर पर गठित टीम निष्क्रिय है।
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सरकार के तमाम दावे हैं, लेकिन हकीकत उल्टी है। महिलाएं सुरक्षित नहीं है। पिछले छह माह में सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन छेड़छाड़ के प्रकरणों को थानों में समझौता कर निपटा दिया जाता है। कहीं लोक लाज का डर तो कहीं आरोपियों की ताकत के सामने ही पीड़ित लाचार हो जाते हैं।
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केस : 1
बागपत के मुख्य बाजार से जुलाई माह में एक युवती अपने सहेलियों के साथ सामान खरीदकर घर लौट रही थी। रास्ते में एक युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ की थी। विरोध करने पर आरोपी ने युवती का सिर फोड़ दिया । पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। मामला विचाराधीन है।
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केस : 2
छपरौली क्षेत्र की एक युवती अधिवक्ता के पास से डेढ़ माह पहले अपने घर जा रही थी। कलक्ट्रेट के पास कार सवार एक युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ कर अपने साथियों के साथ गाड़ी में खींचने का प्रयास किया , लेकिन मौके पर सैकड़ों लोगों की भी जुट गई। आरोपी भाग गए थे।
केस : 3
दिल्ली से रोडवेज बस में सवार होकर मेडिकल की छात्रा, अपने भाई के साथ सहारनपुर जा रही थी। सरूरपुर गांव के पास छात्रा के साथ मनचलों ने छेड़छाड़ की थी। विरोध करने पर उसके भाई को चलती बस से फेंकने का प्रयास किया था। मामला सुर्खियां बना, लेकिन पीड़ित ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई से इंकार कर दिया था।
पहले गिरफ्तारी, फिर करेंगे अंतिम संस्कार
रमाला। आत्महत्या करने वाली किशोरी का शव जैसे ही गांव पहुंचा ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि पहले आरोपियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। इससे पुलिस के हाथ पैर फूल गए। करीब ढाई घंटे तक ग्रामीणों ने किशोरी का अंतिम संस्कार नहीं किया। इस पर पुलिस हरकत में आई।
सीओ रमाला आनंद कुमार पांडेय ग्रामीणों के बीच पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना देते हुए ग्रामीणों को मनाया। इसके बाद ग्रामीण मान गए और अंतिम संस्कार किया। इस दौरान ब्राह्मण समाज के योगेश शर्मा समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
छेड़छाड़ के 70, रेप के 26 मुकदमे
इस वर्ष अब तक छेड़छाड़ के 70 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि रेप के 26 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस भले ही बेटियों के सुरक्षित होने का दावा करती हो, लेकिन आंकड़े पुलिस के दावों को झुठला रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड में अब तक छेड़छाड़ के 70 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। एंटी रोमियो स्कवॉयड भी बेअसर साबित हो रहा है। थाना स्तर पर गठित टीम निष्क्रिय है।