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कोर्ट की अवहेलना में फंसे बड़ौत के इंस्पेक्टर
अमर उजाला / ब्यूरो/ बागपत
Updated Wed, 19 Apr 2017 12:51 AM IST
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बागपत। मनमानी करने पर बड़ौत कोतवाल न्यायालय की अवहेलना में फंस गए। कोर्ट के आदेश पर समय से मुकदमा दर्ज न करने और सहीं आख्या प्रस्तुत न करने पर उनके खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज हुआ है। उनको अपना पक्ष रखने के लिए चार मई तक का समय दिया।
अभियोजन अधिकारी एसके सिंह के मुताबिक एक जनवरी 2017 से 12 अप्रैल 2017 तक बड़ौत कोतवाली से संबंधित 17 प्रार्थना पत्र पर सीजेएम कोर्ट ने संज्ञान लेकर 156(3) आईपीसी के तहत कोतवाल को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए और 24 घंटे में कोर्ट में एफआईआर की कॉपी पेश करने के आदेश दिए । कोतवाल मुकेश कुमार ने किसी भी केस को समय से दर्ज नहीं किया।
एक सप्ताह, 10 दिन और 15 दिन में केस दर्ज किया। एक मामले को तो पांच महीने बाद पंजीकृत किया। इनमें से एक केस की रिपोर्ट दर्ज न होने पर पीड़ित ने दोबारा न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने मामले को संज्ञान लेकर कोतवाल से जानकारी मानी तो आख्या जानबूझकर गलत पेश की। कोतवाली में केस 7 जनवरी को दर्ज हुआ और कोतवाल की रिपोर्ट में 22 दिसंबर को बताया। इसके अलावा कोर्ट से 97 गैर जमानती वारंट जारी किए थे।
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इस संबंध में कोतवाल ने त्रुटि पूर्ण रिपोर्ट पेश की। वहीं कोर्ट द्वारा जारी साक्षीगण के सम्मन भी कोतवाल ने जीडी में दर्ज नहीं किया। जांच करने पर इसका पता चला। कोर्ट ने माना कोतवाल मुकेश कुमार द्वारा न्यायिक आदेश की जानबूझकर अवहेलना की जा रही है। जो न्यायिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
अभियोजन अधिकारी के बताया इस मामले में कोतवाल मुकेश कुमार के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज किया। चार मई तक पुलिस अधीक्षक के माध्यम से अपना पक्ष न्यायालय में रख सकते हैं। उधर, बड़ौत कोतवाल मुकेश कुमार सिंह ने कहा इस संबंध में सभी केसों की जानकारी कोर्ट में पेश कर दी गई है।
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अभियोजन अधिकारी एसके सिंह के मुताबिक एक जनवरी 2017 से 12 अप्रैल 2017 तक बड़ौत कोतवाली से संबंधित 17 प्रार्थना पत्र पर सीजेएम कोर्ट ने संज्ञान लेकर 156(3) आईपीसी के तहत कोतवाल को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए और 24 घंटे में कोर्ट में एफआईआर की कॉपी पेश करने के आदेश दिए । कोतवाल मुकेश कुमार ने किसी भी केस को समय से दर्ज नहीं किया।
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एक सप्ताह, 10 दिन और 15 दिन में केस दर्ज किया। एक मामले को तो पांच महीने बाद पंजीकृत किया। इनमें से एक केस की रिपोर्ट दर्ज न होने पर पीड़ित ने दोबारा न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने मामले को संज्ञान लेकर कोतवाल से जानकारी मानी तो आख्या जानबूझकर गलत पेश की। कोतवाली में केस 7 जनवरी को दर्ज हुआ और कोतवाल की रिपोर्ट में 22 दिसंबर को बताया। इसके अलावा कोर्ट से 97 गैर जमानती वारंट जारी किए थे।
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इस संबंध में कोतवाल ने त्रुटि पूर्ण रिपोर्ट पेश की। वहीं कोर्ट द्वारा जारी साक्षीगण के सम्मन भी कोतवाल ने जीडी में दर्ज नहीं किया। जांच करने पर इसका पता चला। कोर्ट ने माना कोतवाल मुकेश कुमार द्वारा न्यायिक आदेश की जानबूझकर अवहेलना की जा रही है। जो न्यायिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
अभियोजन अधिकारी के बताया इस मामले में कोतवाल मुकेश कुमार के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज किया। चार मई तक पुलिस अधीक्षक के माध्यम से अपना पक्ष न्यायालय में रख सकते हैं। उधर, बड़ौत कोतवाल मुकेश कुमार सिंह ने कहा इस संबंध में सभी केसों की जानकारी कोर्ट में पेश कर दी गई है।