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शिवानी के आंसू पूछते हैं, कब तक चलेगा खनन का खेल?
Updated Mon, 25 Jun 2018 01:00 AM IST
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बागपत। विजय यमुना में डूब गया है। किनारे पर बैठी शिवानी की पीड़ा यमुना से भी गहरी है। उसके हाथों पर लगी मेहंदी अभी तो खिलनी ही शुरू हुई थी। आंखों से बहते आंसू जिले के सिस्टम से सवाल पूछ रहे हैं। यमुना में खनन का खेल कब तक चलेगा। पॉकलेन कब तक यमुना नदी का सीना चीरती रहेगी। खनन के गहरे गड्ढे कितने लोगों की जिंदगी लेंगे, कितने परिवार उजड़ेंगे।
बिनौली थाना क्षेत्र के सिरसली से आया पूरा परिवार यमुना किनारे बिलख रहा था। जिस यमुना की पूजा करने के लिए विजय का परिवार पिछले तीन दशक से आता रहा है, उसी ने गहरा सदमा दिया है। लेकिन अकेली यमुना तो जिम्मेदार नहीं है। जिम्मेदार तो बागपत जिले का सिस्टम है। सूखी यमुना में अवैध खनन किया गया, गहरे कुंड बना दिए गए। यमुना से करीब ढाई घंटे बाद विजय को निकाला गया। जिंदगी की उम्मीद खत्म हो चुकी थी। सीएचसी में डॉक्टरों ने कहा कि विजय मर चुका है। सवाल है कि अगर विजय डूब गया था, दो घंटे शव की तलाश हुई तो क्या एक एंबुलेंस भी यमुना तक नहीं लाई जा सकती थी। क्या किसी अफसर को नहीं पहुंचना चाहिए था। बिलखता परिवार एक-दूसरे का सहारा बना। लेकिन शिवानी और इस परिवार को क्या पता कि बागपत जिले का यह वह सिस्टम है जो काठा गांव में 19 लोगों की मौत के बाद भी नहीं जागता। कार्रवाई के नाम पर अफसरों की सिर्फ रस्म अदायगी ही होती है।
भाई बेहोश, परिवार बेहाल
बागपत। विजय यमुना में खनन के गड्ढ़ों में जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। किनारे पर परिवार बिलख रहा था। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। करीब दो घंटे बाद विजय का शव बाहर निकाला गया तो बड़ा भाई राजेश बेहोश हो गया। पत्नी को किसी तरह किनारे से उठाकर ले जाया गया। अपनी जेठानी व ननद से लिपट कर पति की मौत पर रो रही थी।
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बड़े भाई ने पाल-पोसकर किया था बड़ा
बागपत। विजय पांच भाइयों में सबसे छोटा था। सबसे बड़ा भाई बालेश, उससे छोटा राजेश, ब्रजेश, बबलू व सबसे छोटा विजय था। भाई राजेश ने बताया कि माता-पिता की मौत के बाद उसने ही विजय का पालन पोषण किया है। हम ही उसे माता-पिता थे। वे सिरसली के रहने वाले हैं, लेकिन कई वर्ष पहले परिवार सहित दिल्ली में जाकर बस गए थे।
अब यमुना नदी की नहीं करेंगे पूजा
बागपत। बिलखते भाई राजेश का कहना था कि वह तो सालों से यमुना नदी की पूजा करते आए है, लेकिन यमुना ने ही उसके भाई को मौत दी है, अब उसकी पूजा नहीं करेंगे और कभी यमुना नदी में स्नान भी नहीं करेंगे।
यमुना नदी में चल रही बोगियों की नाव
बागपत। यमुना नदी में पक्का घाट के पास बोगियों की नाव चल रही है। लोग जान जोखिम में डालकर यमुना नदी पार कर रहे हैं। बागपत के कई युवक बोगियों से बाइकों व लोगों को यमुना पार कराते हैं और उनसे इसके बदले रुपये लेते हैं। यहां धंधा जोर-शोर से चला रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
गोताखोरों के साथ पुलिस की बदसलूकी
बागपत। अभी तक सैंकड़ों लोगों की जान बचा चुके गोताखोरों के साथ पुलिस ने बदसलूकी की। गोताखोर इरफान ने बताया कि वह हादसे के बाद कोतवाली पहुंची और पुलिस से कहा कि आधे घंटे पहले अगर सूचना मिल जाती तो विजय की जान बचाई जा सकती थी। उनके पास वाहन नहीं था और पुलिस ने देरी से सूचना दी। ऐसे मौके के लिए उन्हें पुलिस की तरफ से बाइक दी जानी चाहिए, ताकि वह जल्दी से मौके पर पहुंच सकें। आरोप है कि पुलिस ने गोताखोरों के साथ अभद्रता की। गोताखोरों ने कहा कि अब वह पुलिस के कहने के बजाए एसडीएम के आदेश पर ही यमुना में जाएंगे। गौरतलब है कि बागपत के गोताखार अब तक सैकड़ों लोगों की जान बचा चुके हैं। केदारनाथ की तबाही में भी बागपत के गोताखारों ने सैंकड़ों लोगों की जान बचाई थी।
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बिनौली थाना क्षेत्र के सिरसली से आया पूरा परिवार यमुना किनारे बिलख रहा था। जिस यमुना की पूजा करने के लिए विजय का परिवार पिछले तीन दशक से आता रहा है, उसी ने गहरा सदमा दिया है। लेकिन अकेली यमुना तो जिम्मेदार नहीं है। जिम्मेदार तो बागपत जिले का सिस्टम है। सूखी यमुना में अवैध खनन किया गया, गहरे कुंड बना दिए गए। यमुना से करीब ढाई घंटे बाद विजय को निकाला गया। जिंदगी की उम्मीद खत्म हो चुकी थी। सीएचसी में डॉक्टरों ने कहा कि विजय मर चुका है। सवाल है कि अगर विजय डूब गया था, दो घंटे शव की तलाश हुई तो क्या एक एंबुलेंस भी यमुना तक नहीं लाई जा सकती थी। क्या किसी अफसर को नहीं पहुंचना चाहिए था। बिलखता परिवार एक-दूसरे का सहारा बना। लेकिन शिवानी और इस परिवार को क्या पता कि बागपत जिले का यह वह सिस्टम है जो काठा गांव में 19 लोगों की मौत के बाद भी नहीं जागता। कार्रवाई के नाम पर अफसरों की सिर्फ रस्म अदायगी ही होती है।
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भाई बेहोश, परिवार बेहाल
बागपत। विजय यमुना में खनन के गड्ढ़ों में जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। किनारे पर परिवार बिलख रहा था। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। करीब दो घंटे बाद विजय का शव बाहर निकाला गया तो बड़ा भाई राजेश बेहोश हो गया। पत्नी को किसी तरह किनारे से उठाकर ले जाया गया। अपनी जेठानी व ननद से लिपट कर पति की मौत पर रो रही थी।
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बड़े भाई ने पाल-पोसकर किया था बड़ा
बागपत। विजय पांच भाइयों में सबसे छोटा था। सबसे बड़ा भाई बालेश, उससे छोटा राजेश, ब्रजेश, बबलू व सबसे छोटा विजय था। भाई राजेश ने बताया कि माता-पिता की मौत के बाद उसने ही विजय का पालन पोषण किया है। हम ही उसे माता-पिता थे। वे सिरसली के रहने वाले हैं, लेकिन कई वर्ष पहले परिवार सहित दिल्ली में जाकर बस गए थे।
अब यमुना नदी की नहीं करेंगे पूजा
बागपत। बिलखते भाई राजेश का कहना था कि वह तो सालों से यमुना नदी की पूजा करते आए है, लेकिन यमुना ने ही उसके भाई को मौत दी है, अब उसकी पूजा नहीं करेंगे और कभी यमुना नदी में स्नान भी नहीं करेंगे।
यमुना नदी में चल रही बोगियों की नाव
बागपत। यमुना नदी में पक्का घाट के पास बोगियों की नाव चल रही है। लोग जान जोखिम में डालकर यमुना नदी पार कर रहे हैं। बागपत के कई युवक बोगियों से बाइकों व लोगों को यमुना पार कराते हैं और उनसे इसके बदले रुपये लेते हैं। यहां धंधा जोर-शोर से चला रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
गोताखोरों के साथ पुलिस की बदसलूकी
बागपत। अभी तक सैंकड़ों लोगों की जान बचा चुके गोताखोरों के साथ पुलिस ने बदसलूकी की। गोताखोर इरफान ने बताया कि वह हादसे के बाद कोतवाली पहुंची और पुलिस से कहा कि आधे घंटे पहले अगर सूचना मिल जाती तो विजय की जान बचाई जा सकती थी। उनके पास वाहन नहीं था और पुलिस ने देरी से सूचना दी। ऐसे मौके के लिए उन्हें पुलिस की तरफ से बाइक दी जानी चाहिए, ताकि वह जल्दी से मौके पर पहुंच सकें। आरोप है कि पुलिस ने गोताखोरों के साथ अभद्रता की। गोताखोरों ने कहा कि अब वह पुलिस के कहने के बजाए एसडीएम के आदेश पर ही यमुना में जाएंगे। गौरतलब है कि बागपत के गोताखार अब तक सैकड़ों लोगों की जान बचा चुके हैं। केदारनाथ की तबाही में भी बागपत के गोताखारों ने सैंकड़ों लोगों की जान बचाई थी।