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अटारी बॉर्डर से एंट्री के बाद कहां गया नूर मोहम्मद?
Updated Wed, 09 Aug 2017 01:08 AM IST
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55 साल पहले कराची से बागपत के लिए चला था
तब नूर मोहम्मद की उम्र थी 25 साल, लोकेशन नहीं
बागपत। कराची से झूंडपुर गांव के लिए चला नूर मोहम्मद ने अटारी बॉर्डर से भारत में एंट्री की, लेकिन इसके बाद उसका सुराग नहीं लगा। धीरे-धीरे 55 साल बीत गए, लेकिन पुलिस और खुफिया विभाग अब तक हकीकत से पर्दा नहीं उठा सकी है। सवाल है कि आखिर नूर मोहम्मद कहां गया।
मुजफ्फरनगर में पकड़े गए बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला के बाद खुफिया एजेंसियां हरकत में आ गई है। पड़ोसी मुल्कों से भारत आए लोगों की छानबीन की जा रही है। रिश्तेदारों और अपने परिवार से मिलने आए लोगों पर एटीएस, खुफिया विभाग और पुलिस की निगाह है। पुरानी फाइलों को पलटा जा रहा है। ऐसा ही एक पुराना मामला जिले से भी जुड़ा हुआ है। असल में पाकिस्तान के कराची शहर का रहने वाला नूर मोहम्मद पुत्र शरीफ अहमद एक फरवरी 1962 को बागपत के झूंड़पुर गांव के लिए चला था। अटारी बार्डर से नूर मोहम्मद की भारत में एंट्री भी हुई, लेकिन इसके बाद उसकी कभी लोकेशन नहीं मिली। वह अपने रिश्तेदारों से मिलने झूंडपुर नहीं पहुंचा और न ही कभी यहां संपर्क किया। खुफिया विभाग ने उसकी तलाश की, लेकिन सुराग नहीं लगा। अब तक वह फाइलों में गुम है, खुफिया विभाग इस 55 साल पुराने मामले की पड़ताल भी कर रही है।
पाकिस्तान की नागरिकता ली, सोनीपत में गिरफ्तारी
बागपत। रमाला क्षेत्र के एक गांव की महिला पड़ोसी जिले शामली के कांधला के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ कराची चली गई। यही नहीं उसने पाकिस्तान की नागरिकता भी ले ली। साल 2001 में वह वीजा पर बागपत पहुंची, लेकिन लापता हो गई। वीजा अवधि खत्म होने के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की। कुछ दिन बाद महिला को सोनीपत से गिरफ्तार किया गया था।
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पुलिस और खुफिया तंत्र है अलर्ट
बागपत। मुजफ्फरनगर में बांग्लादेशी आतंकी पकड़े जाने के बाद प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। बागपत पुलिस और खुफिया तंत्र, होटल, ढाबों और भीड़ वाले स्थानों पर नजर लगाए हुए है। पुलिस ने कहचरी समेत कई स्थानों पर चेकिंग अभियान भी चलाया।
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तब नूर मोहम्मद की उम्र थी 25 साल, लोकेशन नहीं
बागपत। कराची से झूंडपुर गांव के लिए चला नूर मोहम्मद ने अटारी बॉर्डर से भारत में एंट्री की, लेकिन इसके बाद उसका सुराग नहीं लगा। धीरे-धीरे 55 साल बीत गए, लेकिन पुलिस और खुफिया विभाग अब तक हकीकत से पर्दा नहीं उठा सकी है। सवाल है कि आखिर नूर मोहम्मद कहां गया।
मुजफ्फरनगर में पकड़े गए बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला के बाद खुफिया एजेंसियां हरकत में आ गई है। पड़ोसी मुल्कों से भारत आए लोगों की छानबीन की जा रही है। रिश्तेदारों और अपने परिवार से मिलने आए लोगों पर एटीएस, खुफिया विभाग और पुलिस की निगाह है। पुरानी फाइलों को पलटा जा रहा है। ऐसा ही एक पुराना मामला जिले से भी जुड़ा हुआ है। असल में पाकिस्तान के कराची शहर का रहने वाला नूर मोहम्मद पुत्र शरीफ अहमद एक फरवरी 1962 को बागपत के झूंड़पुर गांव के लिए चला था। अटारी बार्डर से नूर मोहम्मद की भारत में एंट्री भी हुई, लेकिन इसके बाद उसकी कभी लोकेशन नहीं मिली। वह अपने रिश्तेदारों से मिलने झूंडपुर नहीं पहुंचा और न ही कभी यहां संपर्क किया। खुफिया विभाग ने उसकी तलाश की, लेकिन सुराग नहीं लगा। अब तक वह फाइलों में गुम है, खुफिया विभाग इस 55 साल पुराने मामले की पड़ताल भी कर रही है।
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पाकिस्तान की नागरिकता ली, सोनीपत में गिरफ्तारी
बागपत। रमाला क्षेत्र के एक गांव की महिला पड़ोसी जिले शामली के कांधला के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ कराची चली गई। यही नहीं उसने पाकिस्तान की नागरिकता भी ले ली। साल 2001 में वह वीजा पर बागपत पहुंची, लेकिन लापता हो गई। वीजा अवधि खत्म होने के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की। कुछ दिन बाद महिला को सोनीपत से गिरफ्तार किया गया था।
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पुलिस और खुफिया तंत्र है अलर्ट
बागपत। मुजफ्फरनगर में बांग्लादेशी आतंकी पकड़े जाने के बाद प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। बागपत पुलिस और खुफिया तंत्र, होटल, ढाबों और भीड़ वाले स्थानों पर नजर लगाए हुए है। पुलिस ने कहचरी समेत कई स्थानों पर चेकिंग अभियान भी चलाया।