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बागपत जेल में सुनील राठी तय करता था ड्यूटी
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बागपत जेल में सुनील राठी तय करता था ड्यूटी
बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद यहां फैली अव्यवस्थाओं की पोल खुलनी शुरू हुई। बर्खास्त किए गए जेल वार्डर माधव कुमार के नाम से मुख्य सचिव को पिछले महीने भेजे गए पत्र में वारदात को लेकर कईं सवाल उठाए गए थे। पत्र में कहा गया था कि एकल कक्षों पर सुनील राठी के विश्वसनीय नंबरदार की छह माह तक तैनाती रखी गई। इसकी जांच होनी चाहिए।
गाजियाबाद जेल अधीक्षक वधी राम की रिपोर्ट के बाद मथुरा जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रेय ने 23 अप्रैल को जेल वार्डर माधव राम और हेड जेल वार्डर अजेंद्र कुमार को बर्खास्त कर दिया था। पिछले महीने बर्खास्त जेल वार्डर माधव राम के नाम से मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में बागपत जेल की अव्यवस्थाओं और हत्या के दिन की कहानी पर कई सवाल उठाए गए थे। जेल प्रबंधन, ड्यूटी लगाने और वारदात पर माधव ने कई सवाल उठाते हुए पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
माधव ने चिट्ठी भेजकर बताई थी यह कहानी
- बैरिक संख्या एक डी से नरेश राठी अन्य बंदियों के साथ सुनील राठी से मिलने पहुंचा था। इसी समय वारदात हुई। इसी क्षेत्र के टैंक से पिस्टल बरामद हुआ था। यहां तैनात कर्मियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए
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- एकल कक्षों पर सुनील राठी के करीबी बंदी नंबरदार बबलू की ड्यूटी करीब छह माह से थी जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं हो सकता। बंदी नंबरदार की तैनाती जेल अधीक्षक करते हैं।
- एक जेल वार्डर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसी वार्डर के क्षेत्र में पिस्टल बरामद हुआ था। आरोप लगाया गया है कि वार्डर ने बंदियों को सुनील राठी के पास जाने से नहीं रोका, इसकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।
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जेलर और बंदीरक्षकों में भी हो गई थी तकरार
बागपत। विवादों में घिरी जिला जेल में जेलर और बंदीरक्षकों के बीच खुलकर विवाद हो चुका है। जेल में सुनील राठी की हुकूमत के किस्से आए दिन बाहर सुने और सुनाए जाते रहे थे। बागपत जेल में चम्मच के चाकू, चाकू और मोबाइल मिलना तो आम रहा है। तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ प्रभात कुमार ने जांच कराई तो एंड्रायड मोबाइल बरामद हुए थे। बंदियों और बंदी रक्षकों के बीच आए दिन झगड़े होते रहते हैं। जेलर और बंदी रक्षकों का मामला तत्कालीन डीएम ऋषिरेंद्र कुमार तक पहुंचा था। इसके अलावा बंदीरक्षकों की संख्या और स्टाफ के कम होने का रोना रोया जाता रहा था।
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बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद यहां फैली अव्यवस्थाओं की पोल खुलनी शुरू हुई। बर्खास्त किए गए जेल वार्डर माधव कुमार के नाम से मुख्य सचिव को पिछले महीने भेजे गए पत्र में वारदात को लेकर कईं सवाल उठाए गए थे। पत्र में कहा गया था कि एकल कक्षों पर सुनील राठी के विश्वसनीय नंबरदार की छह माह तक तैनाती रखी गई। इसकी जांच होनी चाहिए।
गाजियाबाद जेल अधीक्षक वधी राम की रिपोर्ट के बाद मथुरा जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रेय ने 23 अप्रैल को जेल वार्डर माधव राम और हेड जेल वार्डर अजेंद्र कुमार को बर्खास्त कर दिया था। पिछले महीने बर्खास्त जेल वार्डर माधव राम के नाम से मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में बागपत जेल की अव्यवस्थाओं और हत्या के दिन की कहानी पर कई सवाल उठाए गए थे। जेल प्रबंधन, ड्यूटी लगाने और वारदात पर माधव ने कई सवाल उठाते हुए पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
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माधव ने चिट्ठी भेजकर बताई थी यह कहानी
- बैरिक संख्या एक डी से नरेश राठी अन्य बंदियों के साथ सुनील राठी से मिलने पहुंचा था। इसी समय वारदात हुई। इसी क्षेत्र के टैंक से पिस्टल बरामद हुआ था। यहां तैनात कर्मियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए
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- एकल कक्षों पर सुनील राठी के करीबी बंदी नंबरदार बबलू की ड्यूटी करीब छह माह से थी जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं हो सकता। बंदी नंबरदार की तैनाती जेल अधीक्षक करते हैं।
- एक जेल वार्डर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसी वार्डर के क्षेत्र में पिस्टल बरामद हुआ था। आरोप लगाया गया है कि वार्डर ने बंदियों को सुनील राठी के पास जाने से नहीं रोका, इसकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।
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जेलर और बंदीरक्षकों में भी हो गई थी तकरार
बागपत। विवादों में घिरी जिला जेल में जेलर और बंदीरक्षकों के बीच खुलकर विवाद हो चुका है। जेल में सुनील राठी की हुकूमत के किस्से आए दिन बाहर सुने और सुनाए जाते रहे थे। बागपत जेल में चम्मच के चाकू, चाकू और मोबाइल मिलना तो आम रहा है। तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ प्रभात कुमार ने जांच कराई तो एंड्रायड मोबाइल बरामद हुए थे। बंदियों और बंदी रक्षकों के बीच आए दिन झगड़े होते रहते हैं। जेलर और बंदी रक्षकों का मामला तत्कालीन डीएम ऋषिरेंद्र कुमार तक पहुंचा था। इसके अलावा बंदीरक्षकों की संख्या और स्टाफ के कम होने का रोना रोया जाता रहा था।