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किसान के आत्मदाह के प्रयास का मामला लखनऊ तक गूंजा

Wed, 12 Jun 2019 01:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2019 01:04 AM IST
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किसान के आत्मदाह के प्रयास का मामला लखनऊ तक गूंजा
बागपत। बामनौली गांव में किसान अनुज के आत्मदाह करने के प्रयास का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दोघट थानाध्यक्ष ने जिला अस्पताल पहुंचकर पीड़ित किसान के बयान दर्ज किए। किसान ने चकबंदी अधिकारियों पर जबरन उसकी कृषि भूमि की पैमाइश कर दूसरे किसान को देने का आरोप लगाया। किसान के भाई ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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बामनौली गांव में रविंद्र पुत्र राधेश्याम व अनुज पुत्र महिपाल के बीच जमीन की पैमाइश को लेकर विवाद चल रहा है। सोमवार को चकबंदी सीओ अजब सिंह, एसीओ कुंवर मोहम्मद अब्दुल्ला, चकबंदीकर्ता वेदपाल सिंह, मुकेश कुमार, चकबंदी लेखपाल कृष्ण गोपाल, कंवर पाल, अंकित कुमार की टीम पुलिस फोर्स के साथ जमीन की पैमाइश करने पहुंची । किसान अनुज ने पैमाइश का विरोध कर अपने चक में पैमाइश करने से मना कर दिया। पुलिस ने सख्ती कर किसान को वहां से हटाया दिया । पीड़ित किसान अनुज ने चकबंदी अधिकारियों व पुलिस के सामने केरोसिन अपने ऊपर छिड़क कर आग लगा ली । किसान आग से झुलस गया । किसान को जिला अस्पताल में भर्ती कराया ।
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मंगलवार को दोघट थानाध्यक्ष अजय शर्मा ने जिला अस्पताल पहुंचकर पीड़ित किसान के बयान दर्ज किए। किसान ने बताया कि चकबंदी अधिकारियों ने उसके चक की पैमाइश के दौरान ग्राम समाज व श्मशान की भूमि नाप दी और उसकी उपजाऊ भूमि विपक्षियों के चक में नाप दी। चकबंदी प्रक्रिया से बाहर की भूमि, इसमें उसकी आबादी भी बनी है, वह भी विपक्षी को दे दी। विरोध करने के बाद भी उसके खेत में डोल लगवाने लगे। इससे हताश होकर उसे आत्मदाह का प्रयास किया। किसान के भाई अरूण ने डीएम पवन कुमार को प्रार्थना पत्र देकर चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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आधी अधूरी चकबंदी प्रक्रिया, किसान परेशान
बागपत। बामनौली गांव में तीन दशक से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। चार साल पहले चकबंदी अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश पर आधी अधूरी चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर दी। कुछ किसानों को जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया । कुछ किसानों की जमीन पूरी नहीं हुई। किसान चकबंदी अधिकारियों के दफ्तरों की चक्कर काटते थक चुके हैं। चकबंदी प्रक्रिया से आहत एक किसान ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या भी कर ली थी। इसके बाद भी किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। किसान परेशान घूम रहे हैं। चकबंदी अधिकारी किसानों की भूमि पूरी नहीं करा पा रहे हैं।
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