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जिला अस्पताल में बच्ची की मौत, बाइक पर ले जाना पड़ा शव
Updated Wed, 21 Jun 2017 12:24 AM IST
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जिला अस्पताल में बच्ची की मौत, बाइक पर ले जाना पड़ा शव
बागपत। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम दावों के बीच जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही ने एक बच्ची की जान ले ली। इस बच्ची की मौत के साथ ही अस्पताल के स्टाफ की संवेदनाएं भी मरती नजर आईं जब परिजन काफी देर तक बच्ची का शव हाथों में लेकर अस्पताल के गेट पर खड़े रहे। लेकिन न तो एंबुलेंस पहुंची और न ही शव वाहन। परिजन बाद में बाइक पर ही बच्ची का शव लेकर घर पहुंचे। उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
गौरीपुर जवाहर नगर निवासी रेशमा (9) पुत्री इकबाल की मंगलवार सुबह बुखार होने के साथ अचानक हालत बिगड़ गई थी। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। थोड़ी देर बाद ही उसकी मौत हो गई। परिजन काफी देर तक शव को लेकर अस्पताल में ही बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने एंबुलेंस की व्यवस्था कराने की मांग अस्पताल स्टाफ से की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अस्पताल के गेट पर काफी देर तक एंबुलेंस के आने का इंतजार किया। बाद में परिजन एक बाइक लेकर आए और उस पर शव लेकर गए। परिवार के हर सदस्य की आंखों में आंसू थे। परिजनों का आरोप है कि उपचार के अभाव में बच्ची की मौत हुई है। परिजनों ने कहा कि एक तरफ तो सूबे के सीएम खुद अस्पताल में चिकित्सीय सेवाओं का जायजा ले रहे हैं। दूसरी तरफ मरीजों को न तो उचित उपचार मिल रहा और न ही शव ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन।
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इतना कुछ हो गया, सीएमएस अनजान
- बच्ची के उपचार में लापरवाही और फिर उसके शव ले जाने में अस्पताल स्टाफ की अनदेखी के बारे में जब सीएमएस डॉक्टर बीएलएस कुशवाहा से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि बच्ची की मौत का मामला उनके संज्ञान में ही नहीं है। अस्पताल में एंबुलेंस की व्यवस्था है। बच्ची को लेकर क्या दिक्कतें हुईं। इसकी जांच कराएंगे।
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बागपत। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम दावों के बीच जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही ने एक बच्ची की जान ले ली। इस बच्ची की मौत के साथ ही अस्पताल के स्टाफ की संवेदनाएं भी मरती नजर आईं जब परिजन काफी देर तक बच्ची का शव हाथों में लेकर अस्पताल के गेट पर खड़े रहे। लेकिन न तो एंबुलेंस पहुंची और न ही शव वाहन। परिजन बाद में बाइक पर ही बच्ची का शव लेकर घर पहुंचे। उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
गौरीपुर जवाहर नगर निवासी रेशमा (9) पुत्री इकबाल की मंगलवार सुबह बुखार होने के साथ अचानक हालत बिगड़ गई थी। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। थोड़ी देर बाद ही उसकी मौत हो गई। परिजन काफी देर तक शव को लेकर अस्पताल में ही बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने एंबुलेंस की व्यवस्था कराने की मांग अस्पताल स्टाफ से की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अस्पताल के गेट पर काफी देर तक एंबुलेंस के आने का इंतजार किया। बाद में परिजन एक बाइक लेकर आए और उस पर शव लेकर गए। परिवार के हर सदस्य की आंखों में आंसू थे। परिजनों का आरोप है कि उपचार के अभाव में बच्ची की मौत हुई है। परिजनों ने कहा कि एक तरफ तो सूबे के सीएम खुद अस्पताल में चिकित्सीय सेवाओं का जायजा ले रहे हैं। दूसरी तरफ मरीजों को न तो उचित उपचार मिल रहा और न ही शव ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन।
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इतना कुछ हो गया, सीएमएस अनजान
- बच्ची के उपचार में लापरवाही और फिर उसके शव ले जाने में अस्पताल स्टाफ की अनदेखी के बारे में जब सीएमएस डॉक्टर बीएलएस कुशवाहा से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि बच्ची की मौत का मामला उनके संज्ञान में ही नहीं है। अस्पताल में एंबुलेंस की व्यवस्था है। बच्ची को लेकर क्या दिक्कतें हुईं। इसकी जांच कराएंगे।
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