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Baghpat News: स्वर्ग सिधार गए गजराज को किया मुचलका पाबंद, न्यायालय से आता रहा बुलावा
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खेकड़ा। पांच साल पहले स्वर्ग सिधार गए बसी गांव के गजराज सिंह को पुलिस ने मुचलका पाबंद करके रिपोर्ट भी एसडीएम न्यायालय में दाखिल कर दी। न्यायालय में हाजिर होने के लिए एक साल तक गजराज सिंह का बुलावा आता रहा। परिजनों ने अब गजराज सिंह का मृत्यु प्रमाणपत्र जमा कराया तो मामला खत्म कराया। इसमें पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
बसी गांव के एक युवक और युवती के बीच एक साल पहले प्रेम-प्रसंग चल रहा था। दोनों शादी करना चाहते थे जिसका दोनों के परिवार वालों को पता लग गया। दोनों परिवारों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। 5 जनवरी 2024 को तत्कालीन हल्का प्रभारी एसआई दीपक कुमार ने शांतिभंग की आशंका जताते हुए गजराज सिंह और सुनील को मुचलका पाबंद कर दिया, जबकि गजराज सिंह की 23 मई 2020 में मौत हो चुकी थी। पुलिस ने एसडीएम न्यायालय में रिपोर्ट भी दाखिल कर दी।
एसडीएम न्यायालय में हाजिर होने के लिए कई बार नोटिस जारी किया गया और गजराज के नहीं पहुंचने पर वारंट जारी हो गया। इसका पता चलने पर परिवार वालों ने एसडीएम न्यायालय में पहुंचकर गजराज सिंह की मौत होने के बारे में बताया, लेकिन बिना प्रमाणपत्र उनकी बात नहीं मानी गई। गजराज सिंह के भाई सुनील ने बताया कि बार-बार नोटिस आने के बाद उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर एसडीएम न्यायालय में जमा किया। इसके बाद उसके भाई गजराज सिंह पर की गई कार्रवाई को निरस्त किया गया।
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पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर
मृतक गजराज सिंह को मुचलका पाबंद करने में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि जांच किए बिना ही गजराज सिंह को मुचलका पाबंद कर दिया। इसके बाद कार्रवाई की रिपोर्ट भी बिना जांच किए ही न्यायालय में दाखिल कर दी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को भी गजराज की मौत होने की जानकारी दी थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
एक मृतक को मुचलका पाबंद करने का मामला सामने आया है। इसमें परिजनों की तरफ से मृत्यु प्रमाणपत्र जमा कराया गया है। इसकी पूरी जांच कराकर लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। - निकेत वर्मा, एसडीएम खेकड़ा
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बसी गांव के एक युवक और युवती के बीच एक साल पहले प्रेम-प्रसंग चल रहा था। दोनों शादी करना चाहते थे जिसका दोनों के परिवार वालों को पता लग गया। दोनों परिवारों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। 5 जनवरी 2024 को तत्कालीन हल्का प्रभारी एसआई दीपक कुमार ने शांतिभंग की आशंका जताते हुए गजराज सिंह और सुनील को मुचलका पाबंद कर दिया, जबकि गजराज सिंह की 23 मई 2020 में मौत हो चुकी थी। पुलिस ने एसडीएम न्यायालय में रिपोर्ट भी दाखिल कर दी।
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एसडीएम न्यायालय में हाजिर होने के लिए कई बार नोटिस जारी किया गया और गजराज के नहीं पहुंचने पर वारंट जारी हो गया। इसका पता चलने पर परिवार वालों ने एसडीएम न्यायालय में पहुंचकर गजराज सिंह की मौत होने के बारे में बताया, लेकिन बिना प्रमाणपत्र उनकी बात नहीं मानी गई। गजराज सिंह के भाई सुनील ने बताया कि बार-बार नोटिस आने के बाद उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर एसडीएम न्यायालय में जमा किया। इसके बाद उसके भाई गजराज सिंह पर की गई कार्रवाई को निरस्त किया गया।
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पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर
मृतक गजराज सिंह को मुचलका पाबंद करने में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि जांच किए बिना ही गजराज सिंह को मुचलका पाबंद कर दिया। इसके बाद कार्रवाई की रिपोर्ट भी बिना जांच किए ही न्यायालय में दाखिल कर दी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को भी गजराज की मौत होने की जानकारी दी थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
एक मृतक को मुचलका पाबंद करने का मामला सामने आया है। इसमें परिजनों की तरफ से मृत्यु प्रमाणपत्र जमा कराया गया है। इसकी पूरी जांच कराकर लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। - निकेत वर्मा, एसडीएम खेकड़ा