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Baghpat News: विवेकानंद यूथ अवार्ड में अन्नू तोमर के नाम पर विवाद, जवाब तलब

Sun, 01 Sep 2024 02:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2024 02:51 AM IST
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Controversy over the name of Annu Tomar in Vivekananda Youth Award, answer sought
बागपत। राज्य स्तर के स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड में बेसिक शिक्षा विभाग की जिला समन्वयक अन्नूू तोमर का नाम भेजने पर विवाद खड़ा हो गया है। सीडीओ ने जिला युवा कल्याण अधिकारी को नोटिस भेजकर शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्याें के अभिलेख मांगे हैं।
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स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने पर दिया जाता है। राज्य स्तरीय अवार्ड के लिए शाहपुर बड़ौली गांव की रहने वाली बेसिक शिक्षा विभाग की जिला समन्वयक पद पर कार्यरत अन्नू तोमर का नाम जिला युवा कल्याण अधिकारी ने भेजा था। इसके बाद सीडीओ नीरज कुमार श्रीवास्तव ने मामले पर जांच बैठा दी है। उन्होंने युवा कल्याण अधिकारी से शिक्षा के क्षेत्र में क्या-क्या कार्य किए गए हैं और यह कार्य किस तरह से किए गए हैं। इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण अन्य लोग अवार्ड के लिए आवेदन नहीं कर पाए। क्या जिले में शिक्षा के क्षेत्र में अन्य कोई व्यक्ति कार्य नहीं कर रहा है। उन्होंने तीन दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा है। वहीं प्रभारी जिला युवा कल्याण अधिकारी अंकित चौधरी ने बताया कि सीडीओ के पत्र का जवाब जल्द ही भेजा जाएगा।
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शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर मिलता है अवार्ड



यह अवार्ड शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले ऐसे व्यक्ति को मिलता है जो सरकारी सेवा में नहीं हो। जिसने छात्रों को शिक्षित करने में अहम योगदान दिया हो। केवल कॉपी व पेंसिल बांटने पर कोई इसके लिए आवेदन नहीं कर सकता है। अन्नू तोमर सरकारी पद पर नहीं है और वह केवल एक कंपनी के माध्यम से कार्यरत है। अगर शिक्षा के क्षेत्र में इनका कोई अहम कार्य नहीं मिलता है तो इनका नाम भेजने वाले के लिए परेशानी हो सकती है।
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मेरा ज्यादा बड़ा कार्य नहीं, न अधिकारी का नाम लिया



इस पूरे मामले को लेकर जिला समन्वयक अन्नू तोमर का कहना है कि वह बच्चों को शिक्षण सामग्री कॉपी, किताब, पेंसिल बांटती है। वह अपने वेतन से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे खर्च करती है। मैने यह सभी बात बताकर कहा था कि अगर मेरा नाम जा सकता है तो भेज दिया जाए। वहीं इस पूरे मामले में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के नाम का सहारा लेकर नाम भिजवाने के आरोप पर उनका कहना है कि यह गलत है और उन्होंने खुद ही इसके लिए आग्रह किया था।
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