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Baghpat News: उत्खनन में पूर्ण मृदभांड मिले, पुरातत्वविदों को मिलेंगे अहम सुराग
Sat, 04 Jan 2025 12:22 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 04 Jan 2025 12:22 AM IST
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बड़ौत(बागपत)। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को तिलवाड़ा गांव में खंडित मृदभांडों के अलावा शुक्रवार को पूर्ण मृदभांड भी मिलने शुरू हो गए हैं। इनके मिलने से पुरातत्वविदों को इतिहास से जुड़े अहम सुराग मिलने की संभावना है। इसके साथ ही वहां खोदाई का कार्य तेज कर दिया गया है।
तिलवाड़ा के जंगल में आला टीला तकरीबन दो बीघा जमीन पर फैला हुआ है। उत्खनन के लिए इस पर छह ट्रेंच बनाकर पुरातत्वविदों, सहयोगियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। शुरुआती दौर में टीम को काफी खंडित मृदभांड, हड्डियां प्राप्त हो चुकी है। जहां से बृहस्पतिवार को टीम ने कुछ मृदभांड व हड्डियों के नमूने जांच के लिए भिजवा दिए थे।
इनके काल का जांच के बाद ही सही पता चल पाएगा। शुक्रवार को हुई खोदाई में टीम को बनाए गए ट्रेंच से अब पूर्ण मृदभांड भी मिलने शुरू हो गए हैं। इनकी आकृति घरों में दैनिक क्रियाओं में प्रयोग में लाए जाने वाले बर्तनों से मेल खाती है।
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पूर्ण मृदभांड से पुरातत्वविदों के लिए काफी सकारात्मकता की तरफ इशारा कर रहे हैं, क्योंकि इनसे इतिहास मिलने की संभावना है। वहीं सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद भूपेंद्र सिंह फोनिया का कहना है कि अभी उत्खनन का काम चल रहा है। अभी इन मृदभांड के आकार, प्रकार, बनावट, काल के विषय में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। इसके लिए अभी इंतजार करना होगा।
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तिलवाड़ा के जंगल में आला टीला तकरीबन दो बीघा जमीन पर फैला हुआ है। उत्खनन के लिए इस पर छह ट्रेंच बनाकर पुरातत्वविदों, सहयोगियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। शुरुआती दौर में टीम को काफी खंडित मृदभांड, हड्डियां प्राप्त हो चुकी है। जहां से बृहस्पतिवार को टीम ने कुछ मृदभांड व हड्डियों के नमूने जांच के लिए भिजवा दिए थे।
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इनके काल का जांच के बाद ही सही पता चल पाएगा। शुक्रवार को हुई खोदाई में टीम को बनाए गए ट्रेंच से अब पूर्ण मृदभांड भी मिलने शुरू हो गए हैं। इनकी आकृति घरों में दैनिक क्रियाओं में प्रयोग में लाए जाने वाले बर्तनों से मेल खाती है।
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पूर्ण मृदभांड से पुरातत्वविदों के लिए काफी सकारात्मकता की तरफ इशारा कर रहे हैं, क्योंकि इनसे इतिहास मिलने की संभावना है। वहीं सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद भूपेंद्र सिंह फोनिया का कहना है कि अभी उत्खनन का काम चल रहा है। अभी इन मृदभांड के आकार, प्रकार, बनावट, काल के विषय में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। इसके लिए अभी इंतजार करना होगा।