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दिलों में चौधरी साहब की यादें: बागपत को घर और लोगों को मानते थे परिवार, किसानों के हित में किए कई बड़े फैसले

Fri, 09 Feb 2024 05:44 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 09 Feb 2024 05:44 PM IST
सार

Bharat Ratna Award 2024 : चौधरी चरण सिंह आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं। चौधरी साहब का बागपत से गहरा लगाव था। वे बागपत को अपना घर और लोगों को परिवार मानते थे। उन्होंने किसानों के हित में कई बड़े फैसले किए थे।

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Chaudhary Charan Singh considered Baghpat as home and people as his family.
चौधरी चरण सिंह - फोटो : डेमो

विस्तार

किसान मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह आज भी बागपत के लोगों के दिलों में बसते हैं। वह बागपत को अपना घर और लोगों को परिवार मानते थे। किसानों के हित के लिए हमेशा लड़ाई लड़ते रहे और सत्ता में रहते हुए उनके लिए कई बड़े फैसले भी लिए।

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बागपत भले ही चौधरी चरण सिंह की जन्मभूमि नहीं थी, लेकिन बागपत उनकी कर्मभूमि रहा है और उनके पूरे जीवन का जुड़ाव बागपत से रहा। यहां की छपरौली सीट से पहली बार 1937 में विधायक बने और उसके बाद से लगातार यहां के लोगों ने उनको अपनी पलकों पर बैठाकर रखा। चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसानों के हितों के लिए फैसले लिए। उनके कारण ही प्रदेश में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और उन्होंने ही लेखपाल के पद का सृजन किया।

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चौधरी चरण सिंह ने किसानों के लिए 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित किया। तीन अप्रैल 1967 को वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और एक साल बाद ही इस्तीफा दे दिया। इसके बाद में मध्यावधि चुनाव में उन्हें सफलता मिली और दोबारा से 17 फरवरी 1970 को वह मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वह केंद्र में गृहमंत्री बने।

बताया गया कि 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री भी बने और इसके बाद भी बागपत के लोगों से उनका जुड़ाव कम नहीं हुआ। वह खुद कहते थे कि बागपत ही उनका घर है और यहां के लोग उनके परिवार के सदस्य है।

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राजनीतिक नुकसान की परवाह किए बिना किसानों का साथ दिया
चौधरी चरण सिंह ने राजनीतिक नुकसान की परवाह किए बिना किसानों का साथ दिया। बताया जाता है कि नागपुर में जनवरी 1959 में हुए अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने खुलकर सामूहिक खेती का विरोध किया और जवाहरलाल नेहरू की नीतियों का इस तरह से विरोध करने पर उनको राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। वह काफी लंबे समय तक कांग्रेस से बाहर रहे, लेकिन किसानों के हित के लिए अपनी बातों पर डटे रहे।

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चरण सिंह से जुड़ी यादें आज भी लोगों ने संजोकर रखीं
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह से जुड़ीं यादों को लोगों ने आज भी घरों में संजोकर रखा हुआ है। किसी के पास उनके साथ खींचे गए फोटो है तो किसी के पास उनके भेजे हुए पत्र मौजूद है। रालोद के वरिष्ठ नेता ओमबीर ढाका बताते है कि चौधरी चरण सिंह आज भी यहां के लोगों के दिलों में बसते हैं। उनसे जुड़ी यादें लोगों ने आज भी संजोकर रखी हुई हैं और उनसे जुड़े किस्से आज भी लोग सुनाते हैं। राजू तोमर सिरसली कहते है कि चौधरी चरण सिंह से जुड़े किस्से आज भी यहां सुनाए जाते हैं और उनकी निस्वार्थ राजनीति की मिसाल सभी राजनीतिक दल देते हैं।

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