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Baghpat News: 25 करोड़ ईंटों का उत्पादन हुआ कम, 1.37 अरब रुपये का कारोबार कम होगा
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बागपत। यहां भट्ठों पर इस बार 25 करोड़ ईंटों का कम उत्पादन हुआ है। इससे 1.37 अरब रुपये का कारोबार कम होना तय है। इसका सबसे बड़ा कारण मौसम है। इस तरह अगले कुछ महीनों में ईंटों की कमी हुई तो भवन निर्माण करने वाले आम लोगों की जेब पर भार बढ़ेगा।
जिले में वर्तमान में 404 ईंट भट्ठे हैं। इन भट्ठों पर पिछली बार 95-100 करोड़ ईंटों का उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार यह 70-75 करोड़ ईंटों तक सीमित रह गया। इनमें भी भट्ठों पर इस समय केवल 50 करोड़ ईंटों का स्टॉक रह गया। क्योंकि ईंटों की बिक्री लगातार चल रही है। जिस तरह से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा में ईंटों की सप्लाई हो रही है, उसको देखते हुए कुछ महीनों बाद ही ईंटों की किल्लत झेलनी पड़ सकती है। इसका असर ईंटों के दाम पर भी पड़ सकता है। ईंटों का दाम 5200-5500 प्रति एक हजार चल रहा है जो बढ़ने पर भवन निर्माण के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।
बारिश से बिगड़ी स्थिति, 40 करोड़ रुपये का नुकसान भी हुआ
ईंट भट्ठों को एक मार्च से शुरू किया जाता है जो 30 जून को बंद होते हैं। इनमें मई का महीना सबसे अहम होता है और ईंटों का उत्पादन भी सबसे ज्यादा होता है। धूप कड़ी रहने और हवा में नमी नहीं होने के कारण ईंट जल्दी सूखती हैं। तब तक भट्ठों में आग भी पूरी तरह से फैल जाती है और ईंटों की पकाई भी अच्छी व जल्दी होती है। मगर इस बार मई में शुरुआत से यहां लगातार बारिश होती रही। कच्ची ईंटों को बनाते ही बारिश हो जाती थी। इस कारण करीब 40 करोड़ ईंट खराब हुईं। इस तरह एक ईंट पर एक रुपया खर्च आने से 40 करोड़ रुपये का नुकसान भट्ठा मालिकों को हुआ है। इस कारण ही ईंटों का उत्पादन भी कम हुआ।
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इस बार मौसम ने स्थिति काफी खराब कर दी। बारिश लगातार होने के कारण ईंटों का उत्पादन बहुत कम हुआ और ईंटों के खराब होने से नुकसान अलग से उठाना पड़ा। कच्ची ईंटों के नहीं होने के कारण भट्ठे समय से पहले बंद हो गए।
-नीरज नैन, महामंत्री ईंट निर्माता समिति
हमारे यहां शुरुआत में मजदूरों की समस्या रही। काफी भट्ठों पर मजदूर नहीं आ सके। इसके बाद मई में लगातार बारिश ने सबसे ज्यादा नुकसान किया। ईंट भट्ठों की स्थिति पूरे सीजन में काफी खराब रही। करीब 25 करोड़ ईंटों का कम उत्पादन हुआ है।
-विनोद गोयल, ईंट भट्ठा मालिक
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जिले में वर्तमान में 404 ईंट भट्ठे हैं। इन भट्ठों पर पिछली बार 95-100 करोड़ ईंटों का उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार यह 70-75 करोड़ ईंटों तक सीमित रह गया। इनमें भी भट्ठों पर इस समय केवल 50 करोड़ ईंटों का स्टॉक रह गया। क्योंकि ईंटों की बिक्री लगातार चल रही है। जिस तरह से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा में ईंटों की सप्लाई हो रही है, उसको देखते हुए कुछ महीनों बाद ही ईंटों की किल्लत झेलनी पड़ सकती है। इसका असर ईंटों के दाम पर भी पड़ सकता है। ईंटों का दाम 5200-5500 प्रति एक हजार चल रहा है जो बढ़ने पर भवन निर्माण के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।
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बारिश से बिगड़ी स्थिति, 40 करोड़ रुपये का नुकसान भी हुआ
ईंट भट्ठों को एक मार्च से शुरू किया जाता है जो 30 जून को बंद होते हैं। इनमें मई का महीना सबसे अहम होता है और ईंटों का उत्पादन भी सबसे ज्यादा होता है। धूप कड़ी रहने और हवा में नमी नहीं होने के कारण ईंट जल्दी सूखती हैं। तब तक भट्ठों में आग भी पूरी तरह से फैल जाती है और ईंटों की पकाई भी अच्छी व जल्दी होती है। मगर इस बार मई में शुरुआत से यहां लगातार बारिश होती रही। कच्ची ईंटों को बनाते ही बारिश हो जाती थी। इस कारण करीब 40 करोड़ ईंट खराब हुईं। इस तरह एक ईंट पर एक रुपया खर्च आने से 40 करोड़ रुपये का नुकसान भट्ठा मालिकों को हुआ है। इस कारण ही ईंटों का उत्पादन भी कम हुआ।
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इस बार मौसम ने स्थिति काफी खराब कर दी। बारिश लगातार होने के कारण ईंटों का उत्पादन बहुत कम हुआ और ईंटों के खराब होने से नुकसान अलग से उठाना पड़ा। कच्ची ईंटों के नहीं होने के कारण भट्ठे समय से पहले बंद हो गए।
-नीरज नैन, महामंत्री ईंट निर्माता समिति
हमारे यहां शुरुआत में मजदूरों की समस्या रही। काफी भट्ठों पर मजदूर नहीं आ सके। इसके बाद मई में लगातार बारिश ने सबसे ज्यादा नुकसान किया। ईंट भट्ठों की स्थिति पूरे सीजन में काफी खराब रही। करीब 25 करोड़ ईंटों का कम उत्पादन हुआ है।
-विनोद गोयल, ईंट भट्ठा मालिक