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बोर्ड परीक्षा...बेसिक पर भरोसा, वित्तविहीन पर अविश्वास
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बेसिक पर भरोसा, वित्त विहीन शिक्षकों पर अविश्वास
बड़ौत। यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षकों की तैनाती में कुप्रबंधन हावी है। डीआईओएस कार्यालय ने जिले के 25 वित्त विहीन इंटर कॉलेजों में तैनात सैकड़ों शिक्षकों का समुचित इस्तेमाल करने के बजाए बेसिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों को हायर कर लिया है। मामला गरमाया तो परीक्षा से महज चार दिन पहले डीआईओएस ने पत्र जारी कर वित्त विहीन शिक्षकों की ड्यूटी का रास्ता साफ किया। हालांकि अब पत्र की भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के पास जिले के 25 वित्त विहीन विद्यालयों में 400 से ज्यादा शिक्षक हैं, मगर उनका समुचित उपयोग करने के बजाए पहले बेसिक शिक्षा विभाग से सूची मंगाकर सहायक अध्यापकों को परीक्षक बना दिया गया। वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों को तैनाती ही नहीं दी। इस पर माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा ने डीआईओएस से एतराज जताया। इसके बाद वित्त विहीन शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ हुआ। मोटे तौर पर देखा जाए तो उपलब्धता के सापेक्ष आधे से भी कम वित्त विहीन शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा में लगाया गया है।
विश्वसनीयता के सवाल पर उठा विवाद
डीआईओएस की तरफ से केंद्र व्यवस्थापकों को 14 फरवरी को जारी पत्र में तैनात किए जाने वाले वित्त विहीन शिक्षकों के लिए विश्वसनीय शब्द का प्रयोग किया गया। इस पर माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश संगठन मंत्री रामपाल सिंह जांगड़ा ने आपत्ति दर्ज कर डीआइओएस से आपत्तिजनक शब्द हटाकर नया पत्र जारी करने की मांग की। आरोप है कि शिक्षाधिकारी शिक्षकों की निष्ठा पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। हालांकि पत्र में अभी तक कोई संशोधन नहीं किया। इससे आक्रोशित शिक्षकों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इस संबंध में डीआईओएस ओमदत्त सिंह ने कहा कि कहीं कोई विवाद नहीं है। वित्त विहीन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
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19 को लर्निंग आउटकम, मार्च में सालाना परीक्षा
शिक्षकों की कमी से जूझ रहे परिषदीय स्कूलों में 19 को लर्निंग आउट कम की परीक्षा होनी है। वहीं कई ब्लॉक में निष्ठा का प्रशिक्षण भी प्रगति पर है। इसके बाद मार्च में सालाना परीक्षा प्रस्तावित है। बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगने से सारा शेड्यूल गड़बड़ा गया है। वहीं इस बीच बच्चों की पढ़ाई का हर्जा होना तो तय है।
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बड़ौत। यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षकों की तैनाती में कुप्रबंधन हावी है। डीआईओएस कार्यालय ने जिले के 25 वित्त विहीन इंटर कॉलेजों में तैनात सैकड़ों शिक्षकों का समुचित इस्तेमाल करने के बजाए बेसिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों को हायर कर लिया है। मामला गरमाया तो परीक्षा से महज चार दिन पहले डीआईओएस ने पत्र जारी कर वित्त विहीन शिक्षकों की ड्यूटी का रास्ता साफ किया। हालांकि अब पत्र की भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के पास जिले के 25 वित्त विहीन विद्यालयों में 400 से ज्यादा शिक्षक हैं, मगर उनका समुचित उपयोग करने के बजाए पहले बेसिक शिक्षा विभाग से सूची मंगाकर सहायक अध्यापकों को परीक्षक बना दिया गया। वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों को तैनाती ही नहीं दी। इस पर माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा ने डीआईओएस से एतराज जताया। इसके बाद वित्त विहीन शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ हुआ। मोटे तौर पर देखा जाए तो उपलब्धता के सापेक्ष आधे से भी कम वित्त विहीन शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा में लगाया गया है।
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विश्वसनीयता के सवाल पर उठा विवाद
डीआईओएस की तरफ से केंद्र व्यवस्थापकों को 14 फरवरी को जारी पत्र में तैनात किए जाने वाले वित्त विहीन शिक्षकों के लिए विश्वसनीय शब्द का प्रयोग किया गया। इस पर माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश संगठन मंत्री रामपाल सिंह जांगड़ा ने आपत्ति दर्ज कर डीआइओएस से आपत्तिजनक शब्द हटाकर नया पत्र जारी करने की मांग की। आरोप है कि शिक्षाधिकारी शिक्षकों की निष्ठा पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। हालांकि पत्र में अभी तक कोई संशोधन नहीं किया। इससे आक्रोशित शिक्षकों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इस संबंध में डीआईओएस ओमदत्त सिंह ने कहा कि कहीं कोई विवाद नहीं है। वित्त विहीन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
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19 को लर्निंग आउटकम, मार्च में सालाना परीक्षा
शिक्षकों की कमी से जूझ रहे परिषदीय स्कूलों में 19 को लर्निंग आउट कम की परीक्षा होनी है। वहीं कई ब्लॉक में निष्ठा का प्रशिक्षण भी प्रगति पर है। इसके बाद मार्च में सालाना परीक्षा प्रस्तावित है। बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगने से सारा शेड्यूल गड़बड़ा गया है। वहीं इस बीच बच्चों की पढ़ाई का हर्जा होना तो तय है।