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तहसील में खुलेआम हो रही स्टांप पेपर की कालाबाजारी

Sun, 07 Feb 2021 11:14 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2021 11:14 PM IST
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Black marketing of stamp papers being done openly in Tehsil
तहसील में खुलेआम हो रही स्टांप पेपर की कालाबाजारी
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बड़ौत। ई-स्टांपिंंग व्यवस्था लागू होने के बाद से छोटे स्टांप पेपरों का संकट खड़ा हो गया है। कोषागार से दस, बीस, 50 और सौ रुपये वाले स्टांप नहीं मिलने से तहसील में इनकी खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। स्टांप वेंडर दस रुपये का स्टांप 15 से 20 रुपये में बेच रहे हैं।
तहसील में ई स्टांप व्यवस्था लागू है। बड़े स्टांप पेपरों की जगह अब जमीन की रजिस्ट्री आदि कार्यों में लोग ई-स्टांप का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन शपथ पत्र आदि कार्यों में दस, बीस, 50 व सौ रुपये के छोटे स्टांप की जरूरत पड़ती है। छपाई बंद होने से कोषागार से स्टांप नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि दस रुपये का स्टांप 20 रुपये, 20 वाला 30, 100 रुपये का स्टांप 150 से 200 रुपये में मिल रहा है।
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घट गया वेंडरों का कमीशन
ई-स्टांप व्यवस्था के चलते वेंडरों को नुकसान हुआ है। तहसील के एक स्टांप वेंडर ने बताया कि पहले कोषागार के जरिये एक लाख रुपये के स्टांप पेपर खरीदने पर 1098 रुपये कमीशन मिलता था। लेकिन ई-स्टांप व्यवस्था प्रभावी होने के बाद से कमीशन घटकर मात्र 190 रुपये रह गया है। कई वेंडरों ने तो व्यवसाय ही बंद कर दिया है।
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ये बोले अधिवक्ता व लोग
वीरेंद्र शर्मा एडवोकेट ने बताया कि 10, 20 व 50 के स्टांप की कमी हो गई है। दिनभर कई लोगों को स्टांप न मिलने के कारण मायूस लौटना पड़ता है या ब्लैक में खरीदना पड़ रहा है। जयपाल सिंह का कहना है कि तहसील में खुलेआम स्टांप की कालाबाजारी हो रही है। लेकिन अफसरों को यह सब दिखाई नहीं दे रहा है और जनता की जेब काटी जा रही है। मोहिनी व हिमांशु ने बताया कि तहसील में कोई रसीदी टिकट भी नहीं मिल रहा है। इसके लिए दोगुनी राशि देनी पड़ रही है।

वर्जन
तहसील में ई-स्टांप व्यवस्था प्रभावी होने के कारण दस, बीस और 50 रुपये के स्टांप पेपरों की कमी जरूर है, लेकिन कालाबाजारी की जानकारी नहीं है। फिर भी यदि शिकायत मिली तो जांच कराकर आरोपी वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- दुर्गेश मिश्र, एसडीएम
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