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जिला पंचायत अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो गई भाजपा
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- अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है जिला पंचायत अध्यक्ष पद
- भाजपा ने ज्योति जाटव और गीता वाल्मीकि पर लगाया था दांव, दोनों ही हार गई
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। भाजपा के लिए जिला पंचायत सदस्य पद के नतीजे काफी निराशाजनक रहे। पार्टी के कुल 20 में से 16 प्रत्याशी हार गए। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। पार्टी की कोई भी महिला प्रत्याशी ही नहीं जीती। ऐसे में अध्यक्ष पद की रेस शुरू होने से पहले ही भाजपा बाहर हो गई है।
किसान आंदोलन का असर ग्रामीण क्षेत्र में जानने के लिए भाजपा पूरी तैयारी के साथ पंचायत चुनाव में उतरी थी। प्रदेश स्तर से इन चुनावों की निगरानी की जा रही थी। सभी जिलों में पार्टी ने पंचायत चुनाव के जिला प्रभारी भी नियुक्त किए थे। सांसद और विधायकों को भी पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिस पर सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह, बागपत विधायक योगेश धामा, छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला और बड़ौत विधायक केपी मलिक प्रत्याशियों के प्रचार के लिए मैदान में उतरे। गांवों में जाकर पार्टी प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे। लेकिन परिणाम अच्छे नहीं आए। जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। भाजपा ने वार्ड-13 से ज्योति जाटव और वार्ड-18 से गीता वाल्मीकि को चुनावी मैदान में उतारा था। इन दोनों में से कोई एक जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदार मानी जा रही थी। लेकिन ये दोनों ही प्रत्याशी चुनाव हार गईं। वार्ड-13 से रालोद समर्थित ममता जयकिशोर और वार्ड-18 से समाजवादी पार्टी की बबली वाल्मीकि ने जीत दर्ज की। ऐसे में भाजपा के पास जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कोई चेहरा नहीं बचा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि भाजपा अध्यक्ष पद की रेस शुरू होने से पहले ही हार गई।
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- भाजपा ने ज्योति जाटव और गीता वाल्मीकि पर लगाया था दांव, दोनों ही हार गई
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। भाजपा के लिए जिला पंचायत सदस्य पद के नतीजे काफी निराशाजनक रहे। पार्टी के कुल 20 में से 16 प्रत्याशी हार गए। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। पार्टी की कोई भी महिला प्रत्याशी ही नहीं जीती। ऐसे में अध्यक्ष पद की रेस शुरू होने से पहले ही भाजपा बाहर हो गई है।
किसान आंदोलन का असर ग्रामीण क्षेत्र में जानने के लिए भाजपा पूरी तैयारी के साथ पंचायत चुनाव में उतरी थी। प्रदेश स्तर से इन चुनावों की निगरानी की जा रही थी। सभी जिलों में पार्टी ने पंचायत चुनाव के जिला प्रभारी भी नियुक्त किए थे। सांसद और विधायकों को भी पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिस पर सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह, बागपत विधायक योगेश धामा, छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला और बड़ौत विधायक केपी मलिक प्रत्याशियों के प्रचार के लिए मैदान में उतरे। गांवों में जाकर पार्टी प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे। लेकिन परिणाम अच्छे नहीं आए। जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। भाजपा ने वार्ड-13 से ज्योति जाटव और वार्ड-18 से गीता वाल्मीकि को चुनावी मैदान में उतारा था। इन दोनों में से कोई एक जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदार मानी जा रही थी। लेकिन ये दोनों ही प्रत्याशी चुनाव हार गईं। वार्ड-13 से रालोद समर्थित ममता जयकिशोर और वार्ड-18 से समाजवादी पार्टी की बबली वाल्मीकि ने जीत दर्ज की। ऐसे में भाजपा के पास जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कोई चेहरा नहीं बचा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि भाजपा अध्यक्ष पद की रेस शुरू होने से पहले ही हार गई।
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