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Baghpat News: यहां हवेलियों का नाम कराता है लोगों की पहचान
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बागपत : बामनौली स्थित हवेली।
- फोटो : BAGHPAT
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जयपाल राणा
दोघट। बामनौली... जिले ऐसा गांव है, जहां हवेली के नाम से लोगों और परिवार की पहचान होती है। गांव में आने वाले लोग हवेलियों के नाम से लोगों का पता पूछते हैं। गांव में भी लोगों और उनके परिवार को हवेली के नाम से जाना जाता है।
दो सौ साल पहले गांव बामनौली में बड़ी-बड़ी हवेलियां बनाने का कार्य शुरू हुआ और सबसे पहले तोताराम ने हवेली का निर्माण कराया था। उन्होंने बामनौली में आठ हवेली तो रामगढ़ में दो हवेली बनवाई थी। उन्होंने ही भरतपुर और बामनौली के बीच व्यापार शुरू कराया था।
इसके बाद गांव में 24 से ज्यादा हवेलियां बनवाई गईं। तुलसी राम, हरज्ञान सिंह, बालमुकंद बनिया, अहलुवालिया, रघुवीर सिंह, चंदन सिंह, गिरवर सिंह, रामप्रसाद सिंह, रामनारायण सिंह, भोपाल सिंह, राधेश्याम, ज्योति स्वरूप ने भी हवेलियों का निर्माण कराया था।
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इनके कारण गांव को हवेलियों वाला गांव भी कहा जाने लगा। गांव की 24 से अधिक हवेलियां पूर्वजों की गाथाओं को बताती हैं। हालांकि बदलते दौर में कुछ लोग गांव से हवेलियों को बेचकर शहरों में रहने चले गए, लेकिन 12 परिवार आज भी पूर्वजों की हवेलियों में रहकर अपने पूर्वजों के इतिहास को सहेजे हुए हैं। संवाद
ईंट बनाने को लगाई थी भट्ठी
गांव में जब हवेलियों का निर्माण शुरू हुआ तो उस समय अधिकांश लोग कच्चे मकानों में रहते थे। ऐसे में यहीं पर ईंट बनाने के लिए भट्ठियां लगाई गई थीं। हवेलियों में आज भी उन भट्ठियों से बनी ईंट लगी हैं।
बड़ौत नहीं तब व्यापार का बड़ा केंद्र था बामनौली
बामनौली तब व्यापार का बड़ा केंद्र था। चौधरी नीरज तोमर बताते हैं कि राजस्थान के जिला भरतपुर से बैलगाड़ियों से यहां माल आता-जाता था। क्षेत्र के लोग यहां से सामान की खरीदारी करते थे। उस समय बड़ौत एक छोटे गांव की तरह था। बड़ौत के लोग भी जरूरत का सामान खरीदने के लिए बामनौली ही आते थे।
11 एतिहासिक मंदिर भी गांव की पहचान
दोघट। गांव बामनौली में 11 एतिहासिक मंदिर भी गांव की पहचान है। ये सभी मंदिर गांव के चारों ओर बनाए गए हैं। गांव के नागेश्वर मंदिर, बाबा सुरजन दास मंदिर, ठाकुर द्वारा मंदिर, शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, बाबा काली सिंह मंदिर, दिगंबर जैन मंदिर, श्वेताम्बर स्थानक, शिव मंदिर, गुरु रविदास मंदिर, वाल्मीकि मंदिर की दूर-दूर तक मान्यता है। गांव के बाबा आरके देव बताते हैं कि दूर-दूर से श्रद्धालु इन मंदिरों में पूजा-अर्चना करने आते हैं। संवाद
- हमारे पूर्वज तोता राम ने दो सौ साल पहले गांव में कई हवेलियों का निर्माण कराया था। उन्होंने भरतपुर में भी दो गांव बसाए थे। इन हवेलियों में रहने से गर्व महसूस होता है। - हेमंत कुमार
- गांव की हवेलियों में आज भी 200 साल पुराना इतिहास जिंदा है। यह हवेलियां पूर्वजों की शान है। - चौधरी हरेंद्र सिंह
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दोघट। बामनौली... जिले ऐसा गांव है, जहां हवेली के नाम से लोगों और परिवार की पहचान होती है। गांव में आने वाले लोग हवेलियों के नाम से लोगों का पता पूछते हैं। गांव में भी लोगों और उनके परिवार को हवेली के नाम से जाना जाता है।
दो सौ साल पहले गांव बामनौली में बड़ी-बड़ी हवेलियां बनाने का कार्य शुरू हुआ और सबसे पहले तोताराम ने हवेली का निर्माण कराया था। उन्होंने बामनौली में आठ हवेली तो रामगढ़ में दो हवेली बनवाई थी। उन्होंने ही भरतपुर और बामनौली के बीच व्यापार शुरू कराया था।
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इसके बाद गांव में 24 से ज्यादा हवेलियां बनवाई गईं। तुलसी राम, हरज्ञान सिंह, बालमुकंद बनिया, अहलुवालिया, रघुवीर सिंह, चंदन सिंह, गिरवर सिंह, रामप्रसाद सिंह, रामनारायण सिंह, भोपाल सिंह, राधेश्याम, ज्योति स्वरूप ने भी हवेलियों का निर्माण कराया था।
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इनके कारण गांव को हवेलियों वाला गांव भी कहा जाने लगा। गांव की 24 से अधिक हवेलियां पूर्वजों की गाथाओं को बताती हैं। हालांकि बदलते दौर में कुछ लोग गांव से हवेलियों को बेचकर शहरों में रहने चले गए, लेकिन 12 परिवार आज भी पूर्वजों की हवेलियों में रहकर अपने पूर्वजों के इतिहास को सहेजे हुए हैं। संवाद
ईंट बनाने को लगाई थी भट्ठी
गांव में जब हवेलियों का निर्माण शुरू हुआ तो उस समय अधिकांश लोग कच्चे मकानों में रहते थे। ऐसे में यहीं पर ईंट बनाने के लिए भट्ठियां लगाई गई थीं। हवेलियों में आज भी उन भट्ठियों से बनी ईंट लगी हैं।
बड़ौत नहीं तब व्यापार का बड़ा केंद्र था बामनौली
बामनौली तब व्यापार का बड़ा केंद्र था। चौधरी नीरज तोमर बताते हैं कि राजस्थान के जिला भरतपुर से बैलगाड़ियों से यहां माल आता-जाता था। क्षेत्र के लोग यहां से सामान की खरीदारी करते थे। उस समय बड़ौत एक छोटे गांव की तरह था। बड़ौत के लोग भी जरूरत का सामान खरीदने के लिए बामनौली ही आते थे।
11 एतिहासिक मंदिर भी गांव की पहचान
दोघट। गांव बामनौली में 11 एतिहासिक मंदिर भी गांव की पहचान है। ये सभी मंदिर गांव के चारों ओर बनाए गए हैं। गांव के नागेश्वर मंदिर, बाबा सुरजन दास मंदिर, ठाकुर द्वारा मंदिर, शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, बाबा काली सिंह मंदिर, दिगंबर जैन मंदिर, श्वेताम्बर स्थानक, शिव मंदिर, गुरु रविदास मंदिर, वाल्मीकि मंदिर की दूर-दूर तक मान्यता है। गांव के बाबा आरके देव बताते हैं कि दूर-दूर से श्रद्धालु इन मंदिरों में पूजा-अर्चना करने आते हैं। संवाद
- हमारे पूर्वज तोता राम ने दो सौ साल पहले गांव में कई हवेलियों का निर्माण कराया था। उन्होंने भरतपुर में भी दो गांव बसाए थे। इन हवेलियों में रहने से गर्व महसूस होता है। - हेमंत कुमार
- गांव की हवेलियों में आज भी 200 साल पुराना इतिहास जिंदा है। यह हवेलियां पूर्वजों की शान है। - चौधरी हरेंद्र सिंह