Baghpat: आंखों की रोशनी गई तो हौसले से किया उजाला, अंकुर धामा ने देश के लिए एशियन पैरा गेम्स में जीता स्वर्ण
बागपत जनपद के अंकुर धामा ने एशियन पैरा गेम्स में पांच हजार मीटर दौड़ में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता है। अंकुर आंखों से देख नहीं सकते हैं लेकिन हौसलों से उन्होंने अपने जीवन में उजाला किया है।
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किसी की बचपन में आंखों की रोशनी चली जाए तो उसकी पूरी जिंदगी बेरंग हो जाती है, लेकिन खेकड़ा के मोहल्ला रामपुर के रहने वाले अंकुर धामा ने पांच साल की उम्र में आंखों की रोशनी जाने के बाद भी हौसले से जिंदगी में उजाला कायम किया।
उसने खेल को जिंदगी का सहारा बनाया और वह लगातार देश का नाम रोशन कर रहा है। अब उसने एशियन पैरा गेम्स में पांच हजार मीटर दौड़ में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता है।
यहीं से अंकुर की जिंदगी बदल गई। शिक्षकों ने अंकुर के खेलों के प्रति रुझान को देखकर उसे दौड़ में भाग लेने को प्रेरित किया। जहां अंकुर ने साबित किया कि इच्छाशक्ति से बड़ी कोई ताकत नहीं होती और वह खेलों में आगे बढ़ता चला गया।
पिछले कई साल से अंकुर के पैर में चोट भी लगी थी और उससे उबरकर अब एशियन पैरा गेम्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीत लिया।
मिल चुका है अर्जुन अवार्ड
अंकुर के भाई गौरव धामा बताते हैं कि अंकुर को वर्ष 2009 में बड़ी कामयाबी मिली। वर्ल्ड यूथ एंड स्टूडेंट चैंपियनशिप में अंकुर धामा ने दो स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवाया। अंकुर धामा ने साल 2014 में एशियन पैरा गेम्स में एक रजत और दो कांस्य पदक जीते।
पैरा ओलंपिक वर्ष 2016 में हिस्सा लिया, हालांकि वहां पदक नहीं मिल सका। इसके बाद वर्ष 2018 में अंकुर को अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया और वह बागपत के छह अर्जुन अवार्डी में इकलौते पैरा खिलाड़ी है।