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Baghpat News: आतंक पर रुके नहीं वार, जब तक न मिटे नाम-ओ-निशान
Sat, 10 May 2025 12:51 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 10 May 2025 12:51 AM IST
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आतंक पर रुके नहीं वार की खबर से संबंधित फोटो। बावली गांव स्थित शहीद स्मारक स्थल। संवाद
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बड़ौत। देश की सुरक्षा का जज्बा हर किसी में होता है, मगर जिला मुख्यालय से महज 25 किमी की दूरी पर बसा बावली गांव देशभक्ति की मिसाल है। युद्ध पाकिस्तान के साथ हुआ हो या चीन के साथ। चाहे कारगिल युद्ध हो या फिर गोवा ऑपरेशन। सभी में गांव के सैनिकों ने अपना पराक्रम दिखाया है। गांव के करीब दो हजार युवा सेना व अर्धसैनिक बलों में तैनात हैं। इनमें सौ से अधिक ऐसे हैं जो घर के इकलौते चिराग है और बॉर्डर पर तैनात हैं।
बावली गांव की आबादी करीब 25 हजार है। पश्चिम उत्तर प्रदेश का यह ऐसा गांव है, जिसके लिए कहा जाता है कि यहां युवा देश की सीमा की रखवाली के लिए जन्म लेते हैं। क्योंकि दो हजार से अधिक युवा सेना व अर्धसैनिक बलों में कार्यरत है। भारत-पाकिस्तान और चीन के साथ युद्ध में यहां के लाल खूब लड़े और इन जंग के किस्से सुनकर ही अब पीढ़ी दर पीढ़ी जोश बढ़ता जा रहा है।
अशोक चक्र भी बढ़ाता है गांव का मान
बावली गांव की एक विशेषता यह भी है कि यह ऐसा गांव है, जहां पर अशोक चक्र विजेता भी है। यह कहा जाता है कि पश्चिमी उप्र का यह अकेला ऐसा गांव है, जिसका अशोक चक्र मान बढ़ाता है। गांव के बिजेंद्रपाल सिंह तोमर ने 18 दिसंबर 1961 के गोवा ऑप्रेशन में अहम योगदान दिया था और देश को पुर्तगालियों से आजाद कराया था।
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बॉर्डर पर तैनात इकलौता चिराग, कार्रवाई हो ऐसी जो दुश्मन रखें याद
बावली की मुकेश देवी के इकलौते बेटे अनुज तोमर बॉर्डर पर तैनात हैं। मुकेश देवी का कहना है कि मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि बेटा इस समय बॉर्डर पर है और देश की सुरक्षा कर रहा है। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए यह सही समय है। सेना की कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो पाकिस्तान की सात पीढिया याद रखें।
हम भी युद्ध के लिए तैयार, बस एक मौका चाहिए
बावली गांव के रहने वाले एयरफोर्स में विंग कमांडर से सेवानिवृत्त हुए विरोहित तोमर ने कहा कि भारतीय सेना ने आतंकियों को शरण देने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारत की ओर से हुई कार्रवाई काबिले तारीफ है। हम भी युद्ध के लिए तैयार हैं, बस एक मौका चाहिए। एक बार बुलावे पर चंद मिनटों में बॉर्डर पर पहुंच जाएंगे। मैं ही नहीं, हर भारतीय देश की सुरक्षा के लिए खड़ा हुआ है।
पाकिस्तान नासूर है जड़ से हो खात्मा
छह महीने पहले सेवानिवृत्त हुए सूबेदार मेजर प्रवीण कुमार ने कहा कि पाकिस्तान नासूर है, एक बार इसे जड़ से खत्म कर देना चाहिए। अगर आतंकियों का सहारा लेकर पाकिस्तान हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ सकता है तो हम इनके सर धड़ से अलग कर सकते हैं। हम प्रधानमंत्री से विनती करते हैं कि हमें भी युद्ध के लिए मौका दिया जाए। सरकार से बदले में कुछ भी नहीं लेंगे। लेकिन पाकिस्तान का नाम मिटा देंगे।
सूझबूझ के साथ लिया पहलगाम का बदला
बीएसएफ में तैनात गांव के सब इंस्पेक्टर निशांत तोमर कहते हैं कि भारत ने पहलगाम के हमले का बदला सूझबूझ के साथ लिया है। इस आतंकवाद ने देश को खोखला कर दिया था। 90 के दशक से पाकिस्तान द्वारा भारत में आतंकवाद फैलाया जा रहा था। पाकिस्तान को कभी मौका नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह अपनी हरकत से कभी सुधरने वाला नहीं है।
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बावली गांव की आबादी करीब 25 हजार है। पश्चिम उत्तर प्रदेश का यह ऐसा गांव है, जिसके लिए कहा जाता है कि यहां युवा देश की सीमा की रखवाली के लिए जन्म लेते हैं। क्योंकि दो हजार से अधिक युवा सेना व अर्धसैनिक बलों में कार्यरत है। भारत-पाकिस्तान और चीन के साथ युद्ध में यहां के लाल खूब लड़े और इन जंग के किस्से सुनकर ही अब पीढ़ी दर पीढ़ी जोश बढ़ता जा रहा है।
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अशोक चक्र भी बढ़ाता है गांव का मान
बावली गांव की एक विशेषता यह भी है कि यह ऐसा गांव है, जहां पर अशोक चक्र विजेता भी है। यह कहा जाता है कि पश्चिमी उप्र का यह अकेला ऐसा गांव है, जिसका अशोक चक्र मान बढ़ाता है। गांव के बिजेंद्रपाल सिंह तोमर ने 18 दिसंबर 1961 के गोवा ऑप्रेशन में अहम योगदान दिया था और देश को पुर्तगालियों से आजाद कराया था।
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बॉर्डर पर तैनात इकलौता चिराग, कार्रवाई हो ऐसी जो दुश्मन रखें याद
बावली की मुकेश देवी के इकलौते बेटे अनुज तोमर बॉर्डर पर तैनात हैं। मुकेश देवी का कहना है कि मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि बेटा इस समय बॉर्डर पर है और देश की सुरक्षा कर रहा है। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए यह सही समय है। सेना की कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो पाकिस्तान की सात पीढिया याद रखें।
हम भी युद्ध के लिए तैयार, बस एक मौका चाहिए
बावली गांव के रहने वाले एयरफोर्स में विंग कमांडर से सेवानिवृत्त हुए विरोहित तोमर ने कहा कि भारतीय सेना ने आतंकियों को शरण देने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारत की ओर से हुई कार्रवाई काबिले तारीफ है। हम भी युद्ध के लिए तैयार हैं, बस एक मौका चाहिए। एक बार बुलावे पर चंद मिनटों में बॉर्डर पर पहुंच जाएंगे। मैं ही नहीं, हर भारतीय देश की सुरक्षा के लिए खड़ा हुआ है।
पाकिस्तान नासूर है जड़ से हो खात्मा
छह महीने पहले सेवानिवृत्त हुए सूबेदार मेजर प्रवीण कुमार ने कहा कि पाकिस्तान नासूर है, एक बार इसे जड़ से खत्म कर देना चाहिए। अगर आतंकियों का सहारा लेकर पाकिस्तान हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ सकता है तो हम इनके सर धड़ से अलग कर सकते हैं। हम प्रधानमंत्री से विनती करते हैं कि हमें भी युद्ध के लिए मौका दिया जाए। सरकार से बदले में कुछ भी नहीं लेंगे। लेकिन पाकिस्तान का नाम मिटा देंगे।
सूझबूझ के साथ लिया पहलगाम का बदला
बीएसएफ में तैनात गांव के सब इंस्पेक्टर निशांत तोमर कहते हैं कि भारत ने पहलगाम के हमले का बदला सूझबूझ के साथ लिया है। इस आतंकवाद ने देश को खोखला कर दिया था। 90 के दशक से पाकिस्तान द्वारा भारत में आतंकवाद फैलाया जा रहा था। पाकिस्तान को कभी मौका नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह अपनी हरकत से कभी सुधरने वाला नहीं है।