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शिक्षा नीति में बदलाव से होगा विद्यार्थियों का सर्वागीण विकास
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पढ़ाई के साथ साथ अपनी प्रतिभा भी दिखा सकेंगे विद्यार्थी
बड़ौत। सरकार ने हाल ही में शिक्षा नीति में परिवर्तन किया है। जिसके तहत विद्यार्थियों के लिए किताबी बोझ हटाकर सर्वांगीण विकास की ओर विशेष ध्यान दिया है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के साथ-साथ शोध, तकनीकी, खेलकूद आदि विषयों पर विशेष ध्यान देने के प्रावधान किए है ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके और वो राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
ये बोले शिक्षाविद-----
बड़ौत। दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डा. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कई वर्षों के शिक्षा नीति में परिवर्तन की चर्चा चल रही थी। मगर यह हो नहीं पाया। अब सरकार ने इस क्षेत्र में मूलभूत परिवर्तन किए हैं। जिनका सकारात्मक परिणाम हमें भविष्य में देखने को मिलेगा। शिक्षा के मूल ढांचे में परिवर्तन करना अति आवश्यक था क्योंकि बदलाव प्रकृति का नियम है। इस क्षेत्र में भी बदलाव होना स्वाभाविक है। सरकार ने यह सकारात्मक कदम उठाया है।
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दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की प्रोफेसर डा. किरण गर्ग का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में परिवर्तन के लिए आवश्यक है कि वो सही दिशा में होना चाहिए। सरकार ने शिक्षा नीति में जो परिवर्तन किया ह,ै वो एकदम सही कदम है। अब विद्यार्थियों को अनावश्यक किताबों के बोझ से छुटकारा मिल पाएगा। बच्चे स्कूलों में सिर्फ किताबी ज्ञान से ऊब चुके थे। अब उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अवसर मिलेगा।
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प्रोफेसर डा. शिंजिता अग्रवाल का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा नीति में बदलाव से काफी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इस परिवर्तन से शिक्षा के क्षेत्र का विकास होगा। शिक्षा के क्षेत्र के विकास से युवा परिपक्कव होंगे। जिससे राष्ट्र निर्माण में वो अपना योगदान दे सकेंगे। साथ ही बच्चों का पढ़ाई के प्रति रूझान भी देखने का मिलेगा। परंपरागत शिक्षा प्रद्धति से बच्चे मन चुराने लगे थे। अब जो परिवर्तन हुआ है वो सकारात्मक परिणामों के साथ हमें देखने को मिलेगा।
ये बोले छात्र------
बड़ौत। सिद्धार्थ गोस्वामी के अनुसार नई शिक्षा नीति से भारत मे एक नए युग का आरंभ होगा। हिंदी और संस्कृत भाषा को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण इलाके के क्षेत्रों को भी अच्छी शिक्षा मिलेगी। इस शिक्षा नीति से देश का बहुत भला होगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में लैंगिक समानता, स्कॉलरशिप, शोध को दिशा देने, निजी शैक्षिक संस्थानों में शुल्क के नियंत्रण से विद्यार्थियों को फायदा होगा।
बड़ौत। अंकुर ठाकुर व अमन गुप्ता का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के युवाओं के समग्र विकास का व्यावहारिक खाका है। इस शिक्षा नीति में विद्यार्थी के व्यक्तित्व एवं कौशल विकास, व्यवसायिक चेतना, मानसिक स्वास्थ्य, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्राथमिक स्तर पर स्थानीय या मातृभाषा में शिक्षा, संगीत, कला, खेल, विज्ञान, कॉमर्स आदि विषयों को रुचि अनुसार पढने के महत्वपूर्ण अवसर हैं।
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बड़ौत। सरकार ने हाल ही में शिक्षा नीति में परिवर्तन किया है। जिसके तहत विद्यार्थियों के लिए किताबी बोझ हटाकर सर्वांगीण विकास की ओर विशेष ध्यान दिया है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के साथ-साथ शोध, तकनीकी, खेलकूद आदि विषयों पर विशेष ध्यान देने के प्रावधान किए है ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके और वो राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
ये बोले शिक्षाविद-----
बड़ौत। दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डा. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कई वर्षों के शिक्षा नीति में परिवर्तन की चर्चा चल रही थी। मगर यह हो नहीं पाया। अब सरकार ने इस क्षेत्र में मूलभूत परिवर्तन किए हैं। जिनका सकारात्मक परिणाम हमें भविष्य में देखने को मिलेगा। शिक्षा के मूल ढांचे में परिवर्तन करना अति आवश्यक था क्योंकि बदलाव प्रकृति का नियम है। इस क्षेत्र में भी बदलाव होना स्वाभाविक है। सरकार ने यह सकारात्मक कदम उठाया है।
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दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की प्रोफेसर डा. किरण गर्ग का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में परिवर्तन के लिए आवश्यक है कि वो सही दिशा में होना चाहिए। सरकार ने शिक्षा नीति में जो परिवर्तन किया ह,ै वो एकदम सही कदम है। अब विद्यार्थियों को अनावश्यक किताबों के बोझ से छुटकारा मिल पाएगा। बच्चे स्कूलों में सिर्फ किताबी ज्ञान से ऊब चुके थे। अब उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अवसर मिलेगा।
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प्रोफेसर डा. शिंजिता अग्रवाल का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा नीति में बदलाव से काफी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इस परिवर्तन से शिक्षा के क्षेत्र का विकास होगा। शिक्षा के क्षेत्र के विकास से युवा परिपक्कव होंगे। जिससे राष्ट्र निर्माण में वो अपना योगदान दे सकेंगे। साथ ही बच्चों का पढ़ाई के प्रति रूझान भी देखने का मिलेगा। परंपरागत शिक्षा प्रद्धति से बच्चे मन चुराने लगे थे। अब जो परिवर्तन हुआ है वो सकारात्मक परिणामों के साथ हमें देखने को मिलेगा।
ये बोले छात्र------
बड़ौत। सिद्धार्थ गोस्वामी के अनुसार नई शिक्षा नीति से भारत मे एक नए युग का आरंभ होगा। हिंदी और संस्कृत भाषा को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण इलाके के क्षेत्रों को भी अच्छी शिक्षा मिलेगी। इस शिक्षा नीति से देश का बहुत भला होगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में लैंगिक समानता, स्कॉलरशिप, शोध को दिशा देने, निजी शैक्षिक संस्थानों में शुल्क के नियंत्रण से विद्यार्थियों को फायदा होगा।
बड़ौत। अंकुर ठाकुर व अमन गुप्ता का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के युवाओं के समग्र विकास का व्यावहारिक खाका है। इस शिक्षा नीति में विद्यार्थी के व्यक्तित्व एवं कौशल विकास, व्यवसायिक चेतना, मानसिक स्वास्थ्य, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्राथमिक स्तर पर स्थानीय या मातृभाषा में शिक्षा, संगीत, कला, खेल, विज्ञान, कॉमर्स आदि विषयों को रुचि अनुसार पढने के महत्वपूर्ण अवसर हैं।