फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Ahoi Ashtami 2023 in Ravi Pushp Yoga today, check the best time for worship

अहोई अष्टमी आज: बन रहा रविपुष्य योग, व्रत का दोगुना फल मिलेगा, यह रहेगा पूजन का उत्तम समय

Sun, 05 Nov 2023 11:19 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 05 Nov 2023 11:19 AM IST
सार

आज अहोई अष्टमी का का व्रत रखकर माताएं अपनी संतान के स्वस्थ, दीर्घायु व सुख समृद्धि की कामना करती हैं। अहोई माता के रूप में इस दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस बाद अहोई अष्टमी के दिन शुभ संयोग बन रहा है।  

विज्ञापन
Ahoi Ashtami 2023 in Ravi Pushp Yoga today, check the best time for worship
अहोई अष्टमी - फोटो : self

विस्तार

अहोई अष्टमी व्रत पर इस बार रवि पुष्य योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग का विशेष महत्व बताया गया है। इस योग में किए गए प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है। अहोई पर इस बार रविपुष्य योग के अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग, शुभ योग और शुक्ल योग बनने से बच्चों को आरोग्यता का वरदान और दीर्घायु का लाभ मिलेगा।

विज्ञापन

ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि नारदपुराण के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कर्काष्टमी व्रत का विधान है। इसी व्रत को अहोई अष्टमी का व्रत कहा जाता है। अहोई का शाब्दिक अर्थ है-अनहोनी को होनी में बदलने वाली माता से है। सृष्टि में अनहोनी या दुर्भाग्य को टालने वाली आदिशक्ति देवी पार्वती हैं। इस दिन माता पार्वती की पूजा अहोई माता के रूप में की जाती है।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें: Meerut: स्मॉग में लिपटा शहर, AQI 340 पहुुंचा, सांस लेना दूभर, चिकित्सक दे रहे ये काम करने की सलाह

विज्ञापन
विज्ञापन

अहोई अष्टमी का व्रत पांच नवंबर को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि चार नवंबर की रात्रि 1 बजे से शुरू होगी और पांच नवंबर रात 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि पांच नवंबर को है। पांच नवंबर को रवि पुष्य योग का शुभ संयोग बनने से व्रत का दोगुना फल मिलेगा।

मान्यता है कि विधि-विधान से अहोई अष्टमी का व्रत करने से माता और संतान दोनों के जीवन में सुख की प्राप्ति होती है। अहोई अष्टमी की पूजा का विधान सांयकाल प्रदोष बेेला में करना श्रेष्ठ बताया गया है। इस बार शाम को पांच बजकर 35 मिनट से शाम छह बजकर 35 तक का समय पूजन के लिए उत्तम है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed