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आचार्य ने अयोध्या कांड की कथा सुनाई
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कस्बे के श्री राधा कृष्ण ठाकुरद्वारा मंदिर में चल रही राम चरित मानस के पाठ का दूसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटरी। कस्बे के श्री राधा कृष्ण ठाकुरद्वारा मंदिर में चल रहे राम चरित मानस के पाठ के दूसरे दिन अयोध्या कांड की कथा सुनाई। मंदिर के आचार्य विनोद शास्त्री ने अयोध्या कांड, बाल कांड, राम का विवाह, और पिता का वचन पुरा करने के लिए राम का सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास जाने की कथा सुनाई।
उन्होंने बाल कांड में भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राक्षस महर्षि विश्वामित्र की तपस्पा में व्यवधान डाल रहे थे। यज्ञ पूर्ण करने के लिए विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ लेकर चले जाते है, जहां भगवान श्रीराम व लक्ष्मण राक्षसों का संहार कर मुनि का यज्ञ पूर्ण कराते है। इसके बाद दोनों भाई महर्षि के साथ सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं, जहां भगवान श्रीराम महर्षि की आज्ञा पाकर शिव धनुष को तोड़ते हैं। भगवान श्रीराम अपने पिता का वचन निभाने के लिए राज का मोह छोड़कर सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वन चले जाते हैं और उनके वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने पृथ्वी पर मानव के आदर्श को स्थापित किया, इसके लिए उन्हें पुरुषोत्तम राम के नाम से पुकारा जाता है। इस दौरान देवांश, शशांक, सभासद राजीव गोयल, पूर्व सभासद देवेंद्र, विनोद कुमार चौधरी, हिम्मत सिंह, गौरव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटरी। कस्बे के श्री राधा कृष्ण ठाकुरद्वारा मंदिर में चल रहे राम चरित मानस के पाठ के दूसरे दिन अयोध्या कांड की कथा सुनाई। मंदिर के आचार्य विनोद शास्त्री ने अयोध्या कांड, बाल कांड, राम का विवाह, और पिता का वचन पुरा करने के लिए राम का सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास जाने की कथा सुनाई।
उन्होंने बाल कांड में भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राक्षस महर्षि विश्वामित्र की तपस्पा में व्यवधान डाल रहे थे। यज्ञ पूर्ण करने के लिए विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ लेकर चले जाते है, जहां भगवान श्रीराम व लक्ष्मण राक्षसों का संहार कर मुनि का यज्ञ पूर्ण कराते है। इसके बाद दोनों भाई महर्षि के साथ सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं, जहां भगवान श्रीराम महर्षि की आज्ञा पाकर शिव धनुष को तोड़ते हैं। भगवान श्रीराम अपने पिता का वचन निभाने के लिए राज का मोह छोड़कर सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वन चले जाते हैं और उनके वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने पृथ्वी पर मानव के आदर्श को स्थापित किया, इसके लिए उन्हें पुरुषोत्तम राम के नाम से पुकारा जाता है। इस दौरान देवांश, शशांक, सभासद राजीव गोयल, पूर्व सभासद देवेंद्र, विनोद कुमार चौधरी, हिम्मत सिंह, गौरव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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