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गांव गोद लेने में पिछड़ रहे सांसद
Baghpat
Updated Fri, 07 Nov 2014 05:30 AM IST
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बागपत। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदर्श ग्राम विकास योजना का ऐलान 15 अगस्त को लाल किले से किया था। इसे ढाई माह से अधिक बीत जाने के बावजूद बागपत के सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें कौन सा गांव गोद लेना है? यह देरी शायद इसलिए भी हो रही है क्योंकि उनके पास एक साथ कई गांवों के प्रस्ताव आ गए हैं। ग्राम दत्तनगर के लोगों ने तो बाकायदा पंचायत करके गुजारिश की कि सांसद उनके गांव को गोद लेकर विकास कराएं। भाजपा नेताओं ने भी सांसद को कई गांवों के नाम सुझाए हैं।
सांसद का पैतृक गांव बासोली है। इसकी सूरत भी अच्छी नहीं है। यहां के विद्यालयों में शौचालय तक नहीं हैं। इसके बावजूद आदर्श ग्राम योजना के प्रावधान के तहत सांसद अपने गांव का चयन नहीं कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त भाजपा के बड़े नेताओं के गांवों में भी समस्याओं के अंबार हैं। ये भी सांसद को प्रस्ताव दे रहे हैं। इस तरह सांसद के पास 20 से ज्यादा गांवों के प्रस्ताव आ चुके हैं।
यही वजह है कि फैसला लेने में देरी हो रही है। इसके अतिरिक्त यह भी देखा जा रहा है कि कौन-कौन से गांव मानक पर फिट बैठ रहे हैं। इसीलिए आदर्श ग्राम विकास योजना की गाइड लाइन के अनुसार ही गांव देखे हैं। उधर, नैथला, निनाना, हिसावदा, बड़ौली, बदरखा और काकोर आदि गांवों के लोग भी मांग कर रहे हैं कि सांसद उनका गांव गोद लें। इनमें लोकसभा चुनाव में भाजपा को भरपूर वोट मिले थे। भाजपा जिलाध्यक्ष कुलप्रकाश का कहना है कि सांसद और जिला संगठन मिलकर गांव का चयन करेंगे। ऐसा गांव देखा जाएगा जो वास्तव में हकदार हो और वहां विकास की सबसे ज्यादा जरूरत हो।
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शराब और अपराध से विमुख गांव का चयन करेंगे : सांसद
बड़ौत। सांसद सत्यपाल सिंह ने बृहस्पतिवार को गांव बामनौली जाते समय जनता वैदिक इंटर कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उन्होंने कुछ गांवों की सूची तैयार कराई है। इनमें सुविधाओं और समस्याओं का अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि साढ़े तीन हजार जनसंख्या वाले गांवों का चयन किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि चयनित गांव के ग्रामीण शराब के सेवन और आपराधिक गतिविधियों से परे हों। आगामी दो-तीन दिन में चयनित गांव की घोषणा कर दी जाएगी।
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सांसद का पैतृक गांव बासोली है। इसकी सूरत भी अच्छी नहीं है। यहां के विद्यालयों में शौचालय तक नहीं हैं। इसके बावजूद आदर्श ग्राम योजना के प्रावधान के तहत सांसद अपने गांव का चयन नहीं कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त भाजपा के बड़े नेताओं के गांवों में भी समस्याओं के अंबार हैं। ये भी सांसद को प्रस्ताव दे रहे हैं। इस तरह सांसद के पास 20 से ज्यादा गांवों के प्रस्ताव आ चुके हैं।
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यही वजह है कि फैसला लेने में देरी हो रही है। इसके अतिरिक्त यह भी देखा जा रहा है कि कौन-कौन से गांव मानक पर फिट बैठ रहे हैं। इसीलिए आदर्श ग्राम विकास योजना की गाइड लाइन के अनुसार ही गांव देखे हैं। उधर, नैथला, निनाना, हिसावदा, बड़ौली, बदरखा और काकोर आदि गांवों के लोग भी मांग कर रहे हैं कि सांसद उनका गांव गोद लें। इनमें लोकसभा चुनाव में भाजपा को भरपूर वोट मिले थे। भाजपा जिलाध्यक्ष कुलप्रकाश का कहना है कि सांसद और जिला संगठन मिलकर गांव का चयन करेंगे। ऐसा गांव देखा जाएगा जो वास्तव में हकदार हो और वहां विकास की सबसे ज्यादा जरूरत हो।
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शराब और अपराध से विमुख गांव का चयन करेंगे : सांसद
बड़ौत। सांसद सत्यपाल सिंह ने बृहस्पतिवार को गांव बामनौली जाते समय जनता वैदिक इंटर कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उन्होंने कुछ गांवों की सूची तैयार कराई है। इनमें सुविधाओं और समस्याओं का अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि साढ़े तीन हजार जनसंख्या वाले गांवों का चयन किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि चयनित गांव के ग्रामीण शराब के सेवन और आपराधिक गतिविधियों से परे हों। आगामी दो-तीन दिन में चयनित गांव की घोषणा कर दी जाएगी।