{"_id":"51-78413","slug":"Baghpat-78413-51","type":"story","status":"publish","title_hn":"हमें जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमें जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए
Baghpat
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत। विहर्ष सागर सभागार में आचार्य विमर्श सागर महाराज के सानिध्य में कर्म सिद्धांत अनुशीलन विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय विहत गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा संसार में जितने भी जीवात्मा है, वो सभी प्रति समय कोई न कोई कर्म अवश्य करते हैं। संसार अवस्था में कर्म करना जीव की निति है। कोई शुभ और अशुभ कर्माें का बंध जीवों के भावों पर निर्भर करता है। शुभ जीवों के साथ जो कर्म किया जाते है, वो शुभ कर्म कहलाते हैं और अशुभ भावों के साथ जो कर्म किए जाते हैं। वे अशुभ कर्म कहलाते हैं। अशुभ कर्माें से आत्मा में पाप कर्म का बंध होता है। पाप और पुण्य पर ही जीवात्मा की सारी प्रति कूलताएं और अनुकूलताएं आधारित हैं। पुण्य कर्म जीवन में अनुकूताएं देता है। जबकि पाप के जीवन में प्रति कूलताएं उपस्थित करता है। अत: हमें जीवन में अच्छा कर्म करने चाहिए। गोष्ठी का संयोजन डॉ. श्रेयांस जैन ने किया। इसमें डॉ. शीतल प्रसाद, डॉ. जय कुमार, डॉ. सुशील, डॉ. अनेकांत, डॉ. नलिनी शास्त्री, डॉ. केसी जैन, डॉ. विजय जैन आदि ने विचार व्यक्त किए। इसमें महेंद्र जैन, वरदान जैन, सुदेश जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, आदीश जैन, संजय जैन, अशोक जैन, मदन लाल जैन, सुंदर लाल जैन, प्रेमचंद जैन आदि रहे।
विज्ञापन