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किस कार्यो पर सचिवों का नहीं है ध्यान
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बड़ौत (बागपत)।
ब्लाक मुख्यालय के अंतर्गत पड़ने वाले अधिकांश गांवों में विकास कार्य कछुआ की चाल पर है और न ही सचिव गांव में पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं एडीओ पंचायत द्वारा लगातार कराएं गए विकास कार्यों की रिपोर्ट मांगने के बावजूद सचिव उन्हें रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भी आक्रोश पनपता जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि ब्लाक मुख्यालय के अंतर्गत 44 गांव आते हैं। फिलहाल जनपद में चुनाव आचार संहिता लगी हुई है, लेकिन जो कार्य चुनाव आचार संहिता से पहले चल रहे थे, वे ठप हो चुके हैं, इसका मुख्य कारण सचिवों का गांव के विकास कार्यों पर ध्यान न देना है। बृहस्पतिवार को कई गांवों के ग्रामीणों ने ब्लाक में पहुंचकर नाराजगी जताई और कहा कि उनके गांव में अभी न तो शौचालय पूरे हुए हैं और न ही अन्य कार्य पूरे हुए हैं।
उन्होंने कहा ग्राम सचिव न तो गांवों में मिलते हैं और न ही कार्यालय पर । अधिकांश सचिव प्रधान के मकान पर बैठकर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। इससे उनमें आक्रोश पनप रहा है। एडीओ पंचायत रणधोल सिंह लगातार ग्राम सचिवों से चल रहे विकास कार्यों व संपन्न हो चुके विकास कार्यों की रिपोर्ट मांग रहे हैं, लेकिन एक-दो सचिवों को छोड़कर अन्य किसी सचिव ने अभी तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। इस संबंध में एडीओ पंचायत रणधोल सिंह का कहना था कि सचिवों से गांव मेें कराएं गए विकास कार्यों की रिपोर्ट मांगी जा रही है, लेकिन एक-दो सचिव को छोड़कर अभी तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
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ब्लाक मुख्यालय के अंतर्गत पड़ने वाले अधिकांश गांवों में विकास कार्य कछुआ की चाल पर है और न ही सचिव गांव में पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं एडीओ पंचायत द्वारा लगातार कराएं गए विकास कार्यों की रिपोर्ट मांगने के बावजूद सचिव उन्हें रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भी आक्रोश पनपता जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि ब्लाक मुख्यालय के अंतर्गत 44 गांव आते हैं। फिलहाल जनपद में चुनाव आचार संहिता लगी हुई है, लेकिन जो कार्य चुनाव आचार संहिता से पहले चल रहे थे, वे ठप हो चुके हैं, इसका मुख्य कारण सचिवों का गांव के विकास कार्यों पर ध्यान न देना है। बृहस्पतिवार को कई गांवों के ग्रामीणों ने ब्लाक में पहुंचकर नाराजगी जताई और कहा कि उनके गांव में अभी न तो शौचालय पूरे हुए हैं और न ही अन्य कार्य पूरे हुए हैं।
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उन्होंने कहा ग्राम सचिव न तो गांवों में मिलते हैं और न ही कार्यालय पर । अधिकांश सचिव प्रधान के मकान पर बैठकर खानापूर्ति कर चले जाते हैं। इससे उनमें आक्रोश पनप रहा है। एडीओ पंचायत रणधोल सिंह लगातार ग्राम सचिवों से चल रहे विकास कार्यों व संपन्न हो चुके विकास कार्यों की रिपोर्ट मांग रहे हैं, लेकिन एक-दो सचिवों को छोड़कर अन्य किसी सचिव ने अभी तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। इस संबंध में एडीओ पंचायत रणधोल सिंह का कहना था कि सचिवों से गांव मेें कराएं गए विकास कार्यों की रिपोर्ट मांगी जा रही है, लेकिन एक-दो सचिव को छोड़कर अभी तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
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