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पानी की व्यवस्था नहीं, फिर उखाड़े जाएंगे प्रदूषित जल देने वाले हैंडपंप
Updated Fri, 13 Jul 2018 01:32 AM IST
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दाहा (बागपत)। वेस्ट यूपी के छह जिलों में मरकरी की अधिकता वाला पानी दे रहे हैंडपंपों और नलकूपों को एनजीटी ने उखाड़ने के निर्देश दिए हैं। जिले में प्रदूषित पानी पीने से कैंसर जैसी बीमारी कई गांव में फैल चुकी है। पिछले वर्ष भी 480 हैंडपंप उखाड़े गए थे, लेकिन अभी तक इन गांवों में पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
एनजीटी के जस्टिस एके गोयल ने बृहस्पतिवार को प्रदूषित जल पर सुनवाई की। गाजियाबाद, बागपत, शामली, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिले की रिपोर्ट के बाद आदेश जारी किया गया कि मरकरी की अधिवक्ता वाले हैंडपंपों और नलकूपों को हटा दिया जाए। एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने प्रत्येक जिले में अपनी टीम भेजकर पानी के नमूने लिए और जांच कराई थी। इसमें मरकरी की अधिकता वाले पानी की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। चौगामा क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल भी हैंडपंप उखाड़ दिए गए थे, लेकिन अभी तक पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई है। कई गांवों में पेयजल योजना लटकी हुई है।
अभिशाप बन गई कृष्णा
चार दशक पहले तक चौगामा क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी कृष्णा अब अभिशाप बन गई है। प्रदूषित जल बीमारियां परोस रहा है। अकेले दाहा, निरपुड़ा, भड़ल और गांगनौली में ब्लड कैंसर और लिवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक है। कृष्णा के उद्गम स्थल से जल स्रोत सूख चुका है, अब इसमें केवल फैक्ट्रियों का गंदा पानी बहता है। एक सौ फीट गहराई तक भूजल प्रभावित है। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में मरकरी, नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस और कैडियम की मात्रा अधिक है।
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बागपत से ऐसे बहती है कृष्णा
कृष्णा नदी बागपत में टीकरी और असारा गांव के बीच से एंट्री करती है। हिम्मतपुर, बूड़पुर, सूझती, इब्राहिमपुर माजरा, गांगनौली, कंडेरा, नांगल, इदरीशपुर, बामनौली, मांगरौली, रहतना, दादरी से होते हुए बरनावा में हिंडन और कृष्णा एक हो जाती हैं। नोएडा में जाकर दोनों यमुना में गिरती है।
पहले ही किया था आगाह, सफाई तो दिखावा
दोआबा पर्यावरण समिति दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने एनजीटी में रिट दायर की थी। वह बताते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण रोकने और ग्रामीणों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए वह लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने पहले ही पानी में मरकरी की अधिकता की बात कही थी। प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट से पुष्टि हो गई है। चौगामा क्षेत्र के लोग परेशानी झेल रहे हैं। सफाई अभियान सिर्फ दिखावा हैं, धरातल पर कुछ नहीं है। हिंडन और कृष्णा से बीमारी फैल रही हैं।
किससे क्या बीमारी?
लेड : इसकी अधिकता से गुर्दों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। एनीमिया, मुंह में जलन, मरोड़, उल्टी, पेट में दर्द, लकवा, मानसिक रोग व खून की कमी की संभावना भी रहती है।
कैडिमियम: गुर्दों की बीमारी, दिमागी बीमारियां, शरीर में ऐंठन, तनाव, मिचली, उल्टी, पेचिस और कैंसर आदि बीमारियां होती हैं।
क्रोमियम : फेफड़ों का कैंसर, त्वचा एवं नाक की श्लेषिभिक झिल्ली में अल्सर पैदा होने की संभावना रहती है।
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एनजीटी के जस्टिस एके गोयल ने बृहस्पतिवार को प्रदूषित जल पर सुनवाई की। गाजियाबाद, बागपत, शामली, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिले की रिपोर्ट के बाद आदेश जारी किया गया कि मरकरी की अधिवक्ता वाले हैंडपंपों और नलकूपों को हटा दिया जाए। एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने प्रत्येक जिले में अपनी टीम भेजकर पानी के नमूने लिए और जांच कराई थी। इसमें मरकरी की अधिकता वाले पानी की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। चौगामा क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल भी हैंडपंप उखाड़ दिए गए थे, लेकिन अभी तक पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई है। कई गांवों में पेयजल योजना लटकी हुई है।
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अभिशाप बन गई कृष्णा
चार दशक पहले तक चौगामा क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी कृष्णा अब अभिशाप बन गई है। प्रदूषित जल बीमारियां परोस रहा है। अकेले दाहा, निरपुड़ा, भड़ल और गांगनौली में ब्लड कैंसर और लिवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक है। कृष्णा के उद्गम स्थल से जल स्रोत सूख चुका है, अब इसमें केवल फैक्ट्रियों का गंदा पानी बहता है। एक सौ फीट गहराई तक भूजल प्रभावित है। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में मरकरी, नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस और कैडियम की मात्रा अधिक है।
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बागपत से ऐसे बहती है कृष्णा
कृष्णा नदी बागपत में टीकरी और असारा गांव के बीच से एंट्री करती है। हिम्मतपुर, बूड़पुर, सूझती, इब्राहिमपुर माजरा, गांगनौली, कंडेरा, नांगल, इदरीशपुर, बामनौली, मांगरौली, रहतना, दादरी से होते हुए बरनावा में हिंडन और कृष्णा एक हो जाती हैं। नोएडा में जाकर दोनों यमुना में गिरती है।
पहले ही किया था आगाह, सफाई तो दिखावा
दोआबा पर्यावरण समिति दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने एनजीटी में रिट दायर की थी। वह बताते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण रोकने और ग्रामीणों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए वह लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने पहले ही पानी में मरकरी की अधिकता की बात कही थी। प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट से पुष्टि हो गई है। चौगामा क्षेत्र के लोग परेशानी झेल रहे हैं। सफाई अभियान सिर्फ दिखावा हैं, धरातल पर कुछ नहीं है। हिंडन और कृष्णा से बीमारी फैल रही हैं।
किससे क्या बीमारी?
लेड : इसकी अधिकता से गुर्दों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। एनीमिया, मुंह में जलन, मरोड़, उल्टी, पेट में दर्द, लकवा, मानसिक रोग व खून की कमी की संभावना भी रहती है।
कैडिमियम: गुर्दों की बीमारी, दिमागी बीमारियां, शरीर में ऐंठन, तनाव, मिचली, उल्टी, पेचिस और कैंसर आदि बीमारियां होती हैं।
क्रोमियम : फेफड़ों का कैंसर, त्वचा एवं नाक की श्लेषिभिक झिल्ली में अल्सर पैदा होने की संभावना रहती है।