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चिकित्सकों ने बीमार अनशनकारियों की जांच कर दवा दी
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बड़ौत (बागपत)।
तहसील में चकबंदी में धांधली को लेकर बामनौली गांव के एक पक्ष का चौथे दिन भी आमरण अनशन जारी रहा। हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने अनशनकारियों की जांच कर दवा दी। वहीं उनके विरोधी पक्ष ने दूसरे दिन शाम को धरना समाप्त किया।
बामनौली गांव के पांच परिवार 21 जनवरी से तहसील मेें आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा 15 दिन पहले प्रशासन के आश्वासन पर उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्हें फिर आमरण अनशन पर बैठना पड़ा। पीड़ित कमल पुत्र राम कुमार का कहना हे कि चकबंदी अधिकारियों ने धोखाधड़ी कर उनकी जमीन दूसरे काश्तकारों को दे दी, वहीं सतेंद्र पुत्र परशुराम का कहना है कि उनकी जमीन को कब्रिस्तान मेें दे दिया गया। नीरज पुत्र किशन कुमार का कहना है कि उनकी छह बीघा जमीन पैमाईश मेें कम कर दी। गुलवीर पुत्र जीत सिंह ने कहा उनकी जमीन पर दूसरों को कब्जा दिलाया, रामवीर ने कहा उनके पास 27 बीघे जमीन है। चकबंदी विभाग द्वारा उन्हेें जमीन से वंचित रखा गया है।
बृहस्पतिवार को भी वे धरने पर बैठे रहे, उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। आमरण परिवार ने निर्णय लिया है कि यदि समाधान नहीं किया जाता, तब तक आमरण अनशन जारी रखेंगे, यदि प्रशासन या किसी प्रकार का कोई दबाव बनाकर उठाने का प्रयास किया तो वे आत्मदाह करने पर मजबूर होंगे, उनके समर्थन में रोशन, खिलारी, राज कुमार, रणवीर, हेमंत, राजन, धर्मपाल आदि भी आमरण स्थल पर बैठे। उनके बीच सहायक चकबंदी अधिकारी अजब सिंह, तहसीलदार प्रदीप कुमार पहुंचे और बातचीत की, लेकिन कोई हल नहीं हुआ, वहीं इनके विरोधी पक्ष कृष्णपाल व सुक्रम पाल ने भी बुधवार को तहसील पर धरना शुरू किया था, दूसरे दिन शाम को एसडीएम के कहने पर कि तुम्हार कुछ नहीं होगा, धरने से उठकर चले गए। इस परिवार मेें कृष्णपाल, सुरेशवती, रूपेश, विशाल वैशाली आदि रहे।
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तहसील में चकबंदी में धांधली को लेकर बामनौली गांव के एक पक्ष का चौथे दिन भी आमरण अनशन जारी रहा। हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने अनशनकारियों की जांच कर दवा दी। वहीं उनके विरोधी पक्ष ने दूसरे दिन शाम को धरना समाप्त किया।
बामनौली गांव के पांच परिवार 21 जनवरी से तहसील मेें आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा 15 दिन पहले प्रशासन के आश्वासन पर उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्हें फिर आमरण अनशन पर बैठना पड़ा। पीड़ित कमल पुत्र राम कुमार का कहना हे कि चकबंदी अधिकारियों ने धोखाधड़ी कर उनकी जमीन दूसरे काश्तकारों को दे दी, वहीं सतेंद्र पुत्र परशुराम का कहना है कि उनकी जमीन को कब्रिस्तान मेें दे दिया गया। नीरज पुत्र किशन कुमार का कहना है कि उनकी छह बीघा जमीन पैमाईश मेें कम कर दी। गुलवीर पुत्र जीत सिंह ने कहा उनकी जमीन पर दूसरों को कब्जा दिलाया, रामवीर ने कहा उनके पास 27 बीघे जमीन है। चकबंदी विभाग द्वारा उन्हेें जमीन से वंचित रखा गया है।
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बृहस्पतिवार को भी वे धरने पर बैठे रहे, उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। आमरण परिवार ने निर्णय लिया है कि यदि समाधान नहीं किया जाता, तब तक आमरण अनशन जारी रखेंगे, यदि प्रशासन या किसी प्रकार का कोई दबाव बनाकर उठाने का प्रयास किया तो वे आत्मदाह करने पर मजबूर होंगे, उनके समर्थन में रोशन, खिलारी, राज कुमार, रणवीर, हेमंत, राजन, धर्मपाल आदि भी आमरण स्थल पर बैठे। उनके बीच सहायक चकबंदी अधिकारी अजब सिंह, तहसीलदार प्रदीप कुमार पहुंचे और बातचीत की, लेकिन कोई हल नहीं हुआ, वहीं इनके विरोधी पक्ष कृष्णपाल व सुक्रम पाल ने भी बुधवार को तहसील पर धरना शुरू किया था, दूसरे दिन शाम को एसडीएम के कहने पर कि तुम्हार कुछ नहीं होगा, धरने से उठकर चले गए। इस परिवार मेें कृष्णपाल, सुरेशवती, रूपेश, विशाल वैशाली आदि रहे।
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