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संत रामपाल के अनुयाइयों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
Updated Thu, 02 Aug 2018 01:05 AM IST
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बागपत। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/ एसटी एक्ट में किए बदलाव के विरोध में सर्व यथार्थ कबीरपंथी और संत रामपाल के अनुयाइयों ने कलक्ट्रेट में प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इसमें पूर्व के कानून को बहाल करने की मांग की।
बुधवार को सर्व यथार्थ कबीरपंथी और संत रामपाल के अनुयायी कलक्ट्रेट में एकत्र हुए। उन्होंने कलक्ट्रेट में जयकारे लगाए। बाद में प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इसमें उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी/ एसटी कानून को कमजोर के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के लोगों के सम्मान से जीने के हक पर कुठाराघात किया है। 1989 में बनाए गए कानून में पिछड़ा और अति पिछड़ा समाज के हकों की रक्षा और समाज में सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार प्राप्त हुआ । सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस कानून की हवा निकाल दी। अब समाज के लोगों को 100 साल पुराने समय की तरह नरक का जीवन जीने को बाध्य किया। यह सब सरकार का अपने वोटरों को खुश करने के लिए करवाया फैसला है। इस फैसले के बाद पूरे भारत में लोग ठगा सा महसूस कर रहे हैं। संत रामपाल ने दोबारा से इस कानून को बहाल करने के लिए आवाज उठाई है। अनुयाइयों ने बताया कि संत रामपाल के सानिध्य में राष्ट्रीय समाज सेवा समिति समुदाय के साथ सहयोग करने में तत्पर रहेगी जो सरकार के खिलाफ समाज के लिए लड़ाई लड़ती है। कानून को बहाल करने की मांग की। इस दौरान अमित दास, सुशील दास, अंकित दास, सुरेंद्र, संजय, जितेंद्र, कमल, सुभाष, रविंद्र, राजू, सुरेश, लवकुश आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को सर्व यथार्थ कबीरपंथी और संत रामपाल के अनुयायी कलक्ट्रेट में एकत्र हुए। उन्होंने कलक्ट्रेट में जयकारे लगाए। बाद में प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इसमें उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी/ एसटी कानून को कमजोर के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के लोगों के सम्मान से जीने के हक पर कुठाराघात किया है। 1989 में बनाए गए कानून में पिछड़ा और अति पिछड़ा समाज के हकों की रक्षा और समाज में सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार प्राप्त हुआ । सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस कानून की हवा निकाल दी। अब समाज के लोगों को 100 साल पुराने समय की तरह नरक का जीवन जीने को बाध्य किया। यह सब सरकार का अपने वोटरों को खुश करने के लिए करवाया फैसला है। इस फैसले के बाद पूरे भारत में लोग ठगा सा महसूस कर रहे हैं। संत रामपाल ने दोबारा से इस कानून को बहाल करने के लिए आवाज उठाई है। अनुयाइयों ने बताया कि संत रामपाल के सानिध्य में राष्ट्रीय समाज सेवा समिति समुदाय के साथ सहयोग करने में तत्पर रहेगी जो सरकार के खिलाफ समाज के लिए लड़ाई लड़ती है। कानून को बहाल करने की मांग की। इस दौरान अमित दास, सुशील दास, अंकित दास, सुरेंद्र, संजय, जितेंद्र, कमल, सुभाष, रविंद्र, राजू, सुरेश, लवकुश आदि मौजूद रहे।
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