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जैसा अपना आना प्यारे, वैसा अपना जाना रे
Updated Fri, 20 Jul 2018 01:08 AM IST
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बागपत। वयोवृद्ध गीतकार गोपालदास नीरज की कई यादें बागपत से भी जुड़ी रही है। किरठल गांव के कवि बलवीर सिंह करुण के घर नीरज का आना जाना लगा रहा। पहले किरठल और फिर करुण के अलवर स्थित आवास पर नीरज आते रहते थे। करुण का कहना है कि साहित्य जगत और कवि मंचों का सूर्य अस्त हो गया है। उन जैसा अनुशासन कविता के मंचों पर फिर देखने को नहीं मिलेगा।
बृहस्पतिवार को नीरज के निधन के बाद कवि करुण ने अमर उजाला से बातचीत में कई संस्मरण साझा किए। नीरज अपने गीत ‘हम तो मस्त फकीर, हमारा कोई नहीं ठिकाना रे, जैसा अपना आना प्यारे, वैसा अपना जाना रे’ को अक्सर गुनगुनाते थे। बलवीर सिंह बताते हैँ कि कविता के मंचों पर वह छा जाते थे। बेहद मिलनसार और मददगार लोगों में शुमार रहे। उनके निधन से साहित्य जगत को जो क्षति हुई है, उसे कभी नहीं भरा जा सकेगा। युवा पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
सुनाते रहते थे चिमटे से बीड़ी पकड़ाने का किस्सा
बागपत। ओज के कवि बलवीर सिंह करुण बताते हैं कि नीरज रात में हमेशा उनके ही घर रुकते थे। एक बार रात में ठहरने के बाद सुबह दूसरे कवि सम्मेलन के लिए निकलने लगे। इतने में मेरी पत्नी ने आवाज देकर गाड़ी रुकवाई। वह चिमटे में बीड़ी का बंडल लेकर पहुंची और नीरज को गाड़ी में पकड़ा दिया। यह देखकर वह हैरान रह गए। खुलेआम कवि मंचों से उन्होंने यह किस्सा सबको सुनाया कि चिमटे से उनके पास बीड़ी का बंडल पहुंचा था।
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साहित्य प्रेमियों में शोक की लहर
बागपत। साहित्य प्रेमियों में नीरज के निधन के बाद शोक की लहर है। एसपीआरसी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान, श्री यमुना इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य जयपाल शर्मा ने निधन पर शोक जताया।
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बृहस्पतिवार को नीरज के निधन के बाद कवि करुण ने अमर उजाला से बातचीत में कई संस्मरण साझा किए। नीरज अपने गीत ‘हम तो मस्त फकीर, हमारा कोई नहीं ठिकाना रे, जैसा अपना आना प्यारे, वैसा अपना जाना रे’ को अक्सर गुनगुनाते थे। बलवीर सिंह बताते हैँ कि कविता के मंचों पर वह छा जाते थे। बेहद मिलनसार और मददगार लोगों में शुमार रहे। उनके निधन से साहित्य जगत को जो क्षति हुई है, उसे कभी नहीं भरा जा सकेगा। युवा पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
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सुनाते रहते थे चिमटे से बीड़ी पकड़ाने का किस्सा
बागपत। ओज के कवि बलवीर सिंह करुण बताते हैं कि नीरज रात में हमेशा उनके ही घर रुकते थे। एक बार रात में ठहरने के बाद सुबह दूसरे कवि सम्मेलन के लिए निकलने लगे। इतने में मेरी पत्नी ने आवाज देकर गाड़ी रुकवाई। वह चिमटे में बीड़ी का बंडल लेकर पहुंची और नीरज को गाड़ी में पकड़ा दिया। यह देखकर वह हैरान रह गए। खुलेआम कवि मंचों से उन्होंने यह किस्सा सबको सुनाया कि चिमटे से उनके पास बीड़ी का बंडल पहुंचा था।
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बागपत। साहित्य प्रेमियों में नीरज के निधन के बाद शोक की लहर है। एसपीआरसी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान, श्री यमुना इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य जयपाल शर्मा ने निधन पर शोक जताया।