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अशरफाबाद थल के प्रधान ने निर्मल हिंडन कार्यक्रम में की पहल
Updated Tue, 17 Apr 2018 01:12 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत कृष्णा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अशरफाबाद थल के प्रधान ने एक अच्छी पहल की है। प्रधान के हस्तक्षेप के बाद अब ग्रामीणों ने घरों से निकलने वाले गंदे पानी को नदी में बहाने के बजाए फसलों की सिंचाई करने का निर्णय लिया है। इसकी रूपरेखा भी तैयार कर ली है।
उल्लेखनीय है कि कृष्णा नदी के किनारे बसे गांवों में प्रदूषित पानी से लोग कैंसर, चर्म रोग, खुजली आदि बीमारियों से लोग बीमार हो रहे हैं। अब तक क्षेत्र के दर्जनों लोगों की कैंसर के चलते मौत हो चुकी है। कई लोग प्रदूषित पानी का सेवन करने से दिव्यांग हो चुके हैं। तो सैकड़ों लोग अभी भी बीमारियों से जूझ रहे हैं। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने मामले को गंभीरता से लेकर कृष्णा नदी के किनारे बसे रंछाड, दादरी, रहतना, कंडेरा और बामनौली में निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत हेल्थ सेंटर खोलने के निर्देश दिए।
अब कमिश्नर डॉ. प्रभात से प्रेरणा लेकर अशरफाबाद थल गांव के प्रधान जुल्ला ने एक नई पहल शुरू की है। प्रधान के हस्तक्षेप के बाद अब ग्रामीणों ने अपने घरों के गंदे पानी को नदी में बहाने के बजाए फसलों की सिंचाई करने का निर्णय लिया है। सोमवार को प्रधान जुल्ला और ग्राम सचिव सतीश कुमार ने बीडीओ प्रेमचन्द से मिलकर घरों के पानी से फसलों की सिंचाई करने व गंदे पानी को नदी तक जाने से रोकने की रणनीति बनाई। बीडीओ प्रेमचंद ने कहा यह पहल अच्छी है। इससे नदी प्रदूषित होने से बचेगी। दूसरी तरफ प्रधान जुल्ला ने कहा लोगों से घरों का गंदा पानी नदी में न भेजने व गंदे पानी से फसलों की सिंचाई कराने को कहा जा रहा है। लोगों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी को नालियों के माध्यम से खेतों में भेजने की तैयारी की जा रही है।
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निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत कृष्णा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अशरफाबाद थल के प्रधान ने एक अच्छी पहल की है। प्रधान के हस्तक्षेप के बाद अब ग्रामीणों ने घरों से निकलने वाले गंदे पानी को नदी में बहाने के बजाए फसलों की सिंचाई करने का निर्णय लिया है। इसकी रूपरेखा भी तैयार कर ली है।
उल्लेखनीय है कि कृष्णा नदी के किनारे बसे गांवों में प्रदूषित पानी से लोग कैंसर, चर्म रोग, खुजली आदि बीमारियों से लोग बीमार हो रहे हैं। अब तक क्षेत्र के दर्जनों लोगों की कैंसर के चलते मौत हो चुकी है। कई लोग प्रदूषित पानी का सेवन करने से दिव्यांग हो चुके हैं। तो सैकड़ों लोग अभी भी बीमारियों से जूझ रहे हैं। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने मामले को गंभीरता से लेकर कृष्णा नदी के किनारे बसे रंछाड, दादरी, रहतना, कंडेरा और बामनौली में निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत हेल्थ सेंटर खोलने के निर्देश दिए।
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अब कमिश्नर डॉ. प्रभात से प्रेरणा लेकर अशरफाबाद थल गांव के प्रधान जुल्ला ने एक नई पहल शुरू की है। प्रधान के हस्तक्षेप के बाद अब ग्रामीणों ने अपने घरों के गंदे पानी को नदी में बहाने के बजाए फसलों की सिंचाई करने का निर्णय लिया है। सोमवार को प्रधान जुल्ला और ग्राम सचिव सतीश कुमार ने बीडीओ प्रेमचन्द से मिलकर घरों के पानी से फसलों की सिंचाई करने व गंदे पानी को नदी तक जाने से रोकने की रणनीति बनाई। बीडीओ प्रेमचंद ने कहा यह पहल अच्छी है। इससे नदी प्रदूषित होने से बचेगी। दूसरी तरफ प्रधान जुल्ला ने कहा लोगों से घरों का गंदा पानी नदी में न भेजने व गंदे पानी से फसलों की सिंचाई कराने को कहा जा रहा है। लोगों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी को नालियों के माध्यम से खेतों में भेजने की तैयारी की जा रही है।
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