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गुजिया और मिज कीट आम के पेड़ों का पहुंचा सकते हैं नुकसान
Updated Mon, 27 Nov 2017 01:02 AM IST
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बागपत। दिसंबर माह में आम के पेड़ों को गुजिया और मिज गाल मेकर कीट नुकसान पहुंचाते है। पत्ती और फूलों का रस चूस लेते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि दिसंबर के प्रथम सप्ताह में आम के बाग को हानिकारक कीट एवं रोगों से बचाने के लिए उचित प्रबंध की जरूरत है। गुजिया एवं जिम गाल मेकर कीट के अंडों से छोटे-छोटे कीट निकलते है और पेड़ के सहारे चढ़कर पत्ती और फूलों के रस को चूसकर नुकसान पहुंचाते है। शीशु कीट गुलाबी रंग के होते हैं। इसके नियंत्रण के लिए नवंबर माह में गहरी जुताई, गुड़ाई की जाए। शिशु कीट को पेड़ों से चढ़ने से रोकने के लिए आम के मुख्य शाखा पर भूमि से आधे मीटर की ऊंचाई पर 400 गेज मोटी, 50 सेमी चौड़ी पट्टी शाखा के चारों तरफ लपेटकर ऊपर और नीचे सुतली से कस कर बांध दें। पॉलीथीन के निचले और ऊपरी हिस्से में इस प्रकार ग्रीस लगाएं। जिससे कीट पेड पर न चढ़ सके। दवा का पेड़ के चारो और छिड़काव करें। उद्यान अधिकारी ने बताया कि जब पेड़ पर बोर पूर्ण खिल जाए तो ऐसी स्थिति में कम से कम दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए।
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जिला उद्यान अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि दिसंबर के प्रथम सप्ताह में आम के बाग को हानिकारक कीट एवं रोगों से बचाने के लिए उचित प्रबंध की जरूरत है। गुजिया एवं जिम गाल मेकर कीट के अंडों से छोटे-छोटे कीट निकलते है और पेड़ के सहारे चढ़कर पत्ती और फूलों के रस को चूसकर नुकसान पहुंचाते है। शीशु कीट गुलाबी रंग के होते हैं। इसके नियंत्रण के लिए नवंबर माह में गहरी जुताई, गुड़ाई की जाए। शिशु कीट को पेड़ों से चढ़ने से रोकने के लिए आम के मुख्य शाखा पर भूमि से आधे मीटर की ऊंचाई पर 400 गेज मोटी, 50 सेमी चौड़ी पट्टी शाखा के चारों तरफ लपेटकर ऊपर और नीचे सुतली से कस कर बांध दें। पॉलीथीन के निचले और ऊपरी हिस्से में इस प्रकार ग्रीस लगाएं। जिससे कीट पेड पर न चढ़ सके। दवा का पेड़ के चारो और छिड़काव करें। उद्यान अधिकारी ने बताया कि जब पेड़ पर बोर पूर्ण खिल जाए तो ऐसी स्थिति में कम से कम दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए।