{"_id":"5ba2a500867a557e86017994","slug":"71537385728-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छठे दिन जैन अनुयायियों ने उतम संयम धर्म अंगीकार किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छठे दिन जैन अनुयायियों ने उतम संयम धर्म अंगीकार किया
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत (बागपत)। दसलक्षण पर्व के छठे दिन श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में मुनि श्री सूरतन सागर जी महाराज के सानिध्य में धूप दशमी पर्व धूमधाम से मनाया गया तथा जैन श्रद्धालुओं के द्वारा दशलक्षण महामंडल विधान के अंतर्गत उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई।
धूप दशमी पर्व के अवसर पर आज सुबह से ही मंदिर में धूप चढ़ाने वालों का तांता लगा रहा। मुनि सुरतन सागर जी महाराज के सानिध्य में तथा ब्रह्मचारिणी मधु दीदी और सीमा दीदी के निर्देशन में जैन श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया तथा शांति धारा सौधर्म इंद्र सुनील जैन करनावल वालों द्वारा की गई। सुगंध दशमी के अवसर पर शीतलनाथ भगवान की विशेष पूजा भी की गई। अजितनाथ भगवान पूजन, नव देवता पूजन तथा सोलह कारण पूजन और दसलक्षण धर्म की पूजन की गई। संगीतकार विकास म्यूजिकल ग्रुप के सुंदर भजनों पेश किए। दसलक्षण विधान की पूजा के अंतर्गत उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई तथा जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म अंगीकार किया। मंगल प्रवचन करते हुए मुनि सुरत्न सागर जी महाराज ने कहा कि संयम हमें सिखाता है, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना तथा अपनी इंद्रियों को अपने वश में करना। इच्छाएं तो असीमित हैं लेकिन व्यक्ति को इच्छाओं पर अंकुश लगाना चाहिए, तभी वह एक अच्छी जिंदगी जी सकता है। आचार्य ने कहा है कि व्यक्ति को उसके मार्ग से भ्रमित करने वाले बहुत मिल जाते हैं लेकिन संयम सच्चे देव शास्त्र गुरु की आराधना से ही प्राप्त होता है। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, वरदान जैन, अशोक जैन, विपिन जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, शशि जैन, सुनीता जैन, रजनी जैन, सरला जैन आदि रहे। शाम को मंदिर जी में गुरु भक्ति और आरती हुई तथा ग्लोबल किड्स एकेडमी के बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। पुरस्कार वितरण वीरेंद्र जैन पिंटी ने किया। 23 सितंबर को मुनि सुरतन सागर जी महाराज के सानिध्य में साढ़े छह बजे से विहर्ष सभागार, सत्यवती जैन धर्मशाला में श्रावक महा प्रतिक्रमण का आयोजन किया जाएगा।
वहीं दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में तेरहदीप महामंडल विधान में पीत वस्त्र धारण करके विशेष पूजा-अर्चना की। पंडित आशुतोष शास्त्री के निर्देशन में चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद नित्य नियम व दसलक्षण धर्म की पूजाएं की गई। विधान में दक्षिण दिशा भारत क्षेत्र, रूपांचल पर जिन मंदिर पूजा, उत्तर दिशा अहरावत क्षेत्र, दक्षिण उत्तर दिशा षट कुलाचल पर धातु के दीप, मध्य विजय अचल मेरू के दक्षिण दिशा, धातुदीप मध्य विजयांचल मेरू के भरत क्षेत्र, उत्तर ईशान कोण जम्बू वृक्ष पर मंदिर मेरू पश्चिम विजय क्षेत्र आदि की दस पूजाएं की गई। बीच-बीच में पं. आशुतोष शास्त्री ने विधान की महत्ता पर प्रकाश ड़ाला। छोटा जैन मंदिर, अतिथि भवन में भी पूजा-अर्चना की गई। शाम को बड़ा जैन दिगंबर जैन मंदिर में भगवान की आरती उतारी गई। छोटे जैन मंदिर व जैन अतिथि भवन में भगवान की आरती उतारी गई। दिगंबर जैन अतिथि भवन में जैन धर्म पर एक नाटिका भरत बाहुबली एवं वैराग्य नामक नाटिका का मंचन किया गया। प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुभाष जैन, अतुल, सुंदर जैन, शीलचंद, पंकज जैन, आनंद, अंकुश, अनुज जैन, विपिन जैन आदि का सहयेाग रहा।
विज्ञापन
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मेें उत्तम धर्म की विवचेना करते हुए मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि संयम दो प्रकार का होता है। एक इंद्रिय संयम व दूसरा प्राणी संयम धर्म। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। इसमें रमेश जग्गरी डयरेेेवाले, मांगे लाल, सतीश जैन, अनिल, ब्रजेश, सुशील, जयप्रकाश आदि रहे।
विज्ञापन
धूप दशमी पर्व के अवसर पर आज सुबह से ही मंदिर में धूप चढ़ाने वालों का तांता लगा रहा। मुनि सुरतन सागर जी महाराज के सानिध्य में तथा ब्रह्मचारिणी मधु दीदी और सीमा दीदी के निर्देशन में जैन श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया तथा शांति धारा सौधर्म इंद्र सुनील जैन करनावल वालों द्वारा की गई। सुगंध दशमी के अवसर पर शीतलनाथ भगवान की विशेष पूजा भी की गई। अजितनाथ भगवान पूजन, नव देवता पूजन तथा सोलह कारण पूजन और दसलक्षण धर्म की पूजन की गई। संगीतकार विकास म्यूजिकल ग्रुप के सुंदर भजनों पेश किए। दसलक्षण विधान की पूजा के अंतर्गत उत्तम संयम धर्म की पूजा की गई तथा जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म अंगीकार किया। मंगल प्रवचन करते हुए मुनि सुरत्न सागर जी महाराज ने कहा कि संयम हमें सिखाता है, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना तथा अपनी इंद्रियों को अपने वश में करना। इच्छाएं तो असीमित हैं लेकिन व्यक्ति को इच्छाओं पर अंकुश लगाना चाहिए, तभी वह एक अच्छी जिंदगी जी सकता है। आचार्य ने कहा है कि व्यक्ति को उसके मार्ग से भ्रमित करने वाले बहुत मिल जाते हैं लेकिन संयम सच्चे देव शास्त्र गुरु की आराधना से ही प्राप्त होता है। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, वरदान जैन, अशोक जैन, विपिन जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, शशि जैन, सुनीता जैन, रजनी जैन, सरला जैन आदि रहे। शाम को मंदिर जी में गुरु भक्ति और आरती हुई तथा ग्लोबल किड्स एकेडमी के बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। पुरस्कार वितरण वीरेंद्र जैन पिंटी ने किया। 23 सितंबर को मुनि सुरतन सागर जी महाराज के सानिध्य में साढ़े छह बजे से विहर्ष सभागार, सत्यवती जैन धर्मशाला में श्रावक महा प्रतिक्रमण का आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन
वहीं दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में तेरहदीप महामंडल विधान में पीत वस्त्र धारण करके विशेष पूजा-अर्चना की। पंडित आशुतोष शास्त्री के निर्देशन में चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद नित्य नियम व दसलक्षण धर्म की पूजाएं की गई। विधान में दक्षिण दिशा भारत क्षेत्र, रूपांचल पर जिन मंदिर पूजा, उत्तर दिशा अहरावत क्षेत्र, दक्षिण उत्तर दिशा षट कुलाचल पर धातु के दीप, मध्य विजय अचल मेरू के दक्षिण दिशा, धातुदीप मध्य विजयांचल मेरू के भरत क्षेत्र, उत्तर ईशान कोण जम्बू वृक्ष पर मंदिर मेरू पश्चिम विजय क्षेत्र आदि की दस पूजाएं की गई। बीच-बीच में पं. आशुतोष शास्त्री ने विधान की महत्ता पर प्रकाश ड़ाला। छोटा जैन मंदिर, अतिथि भवन में भी पूजा-अर्चना की गई। शाम को बड़ा जैन दिगंबर जैन मंदिर में भगवान की आरती उतारी गई। छोटे जैन मंदिर व जैन अतिथि भवन में भगवान की आरती उतारी गई। दिगंबर जैन अतिथि भवन में जैन धर्म पर एक नाटिका भरत बाहुबली एवं वैराग्य नामक नाटिका का मंचन किया गया। प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुभाष जैन, अतुल, सुंदर जैन, शीलचंद, पंकज जैन, आनंद, अंकुश, अनुज जैन, विपिन जैन आदि का सहयेाग रहा।
विज्ञापन
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मेें उत्तम धर्म की विवचेना करते हुए मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि संयम दो प्रकार का होता है। एक इंद्रिय संयम व दूसरा प्राणी संयम धर्म। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। इसमें रमेश जग्गरी डयरेेेवाले, मांगे लाल, सतीश जैन, अनिल, ब्रजेश, सुशील, जयप्रकाश आदि रहे।