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धर्म के मार्ग पर चलकर ही उन्नति संभव- शास्त्री
Updated Fri, 09 Feb 2018 12:52 AM IST
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दोघट (बागपत)। योगाचार्य अरविंद शास्त्री ने कहा धर्म के मार्ग पर चलकर ही मानव की उन्नति संभव है।
बृहस्पतिवार को आजमपुर मुलसम में पांच वेदी पर चल रहे सात दिवसीय चतुर्वेद पारायण यज्ञ के पांचवें दिन यज्ञ के ब्रह्मा पद पर योगाचार्य अरविंद शास्त्री ने कहा धर्म का अर्थ और परिभाषा सभी को बताते हुए सभी को धर्मानुसार जीवन में चलने की प्रेरणा प्रदान की और धर्म के दस लक्षणों का विस्तृत रूप से विवेचन किया। सभी को धृति, क्षमा आदि को समझाते हुए उनको जीवन में धारण करने की प्रेरणा दी। कई दिव्य औषधियों के बारे में भी बताया। स्वामी सत्यवेश ने कविता प्रस्तुत की। स्वामी ब्रह्म मुनि, आचार्य सुनील शास्त्री, आचार्य रोहित शास्त्री, अंकुर भारद्वाज, ब्रह्मचारी ऋषि, ब्रह्मचारी शुभ, मोहित शास्त्री, जयकृष्ण, निखिल, विशाल ने अपनी यज्ञशाला पर वेदपाठ किया। यज्ञमान रविंद्र, संजय, अनिल, नवीन, कपिल सपत्नीक रहे। इसमें ब्रह्मचारी आर्य, टिंकू, मास्टर संजीव, जयपाल, प्रधान कृष्णपाल, आर्य समाज के प्रधान कृष्णपाल, महेश, जितेंद्र, सतेंद्र आदि रहे।
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बृहस्पतिवार को आजमपुर मुलसम में पांच वेदी पर चल रहे सात दिवसीय चतुर्वेद पारायण यज्ञ के पांचवें दिन यज्ञ के ब्रह्मा पद पर योगाचार्य अरविंद शास्त्री ने कहा धर्म का अर्थ और परिभाषा सभी को बताते हुए सभी को धर्मानुसार जीवन में चलने की प्रेरणा प्रदान की और धर्म के दस लक्षणों का विस्तृत रूप से विवेचन किया। सभी को धृति, क्षमा आदि को समझाते हुए उनको जीवन में धारण करने की प्रेरणा दी। कई दिव्य औषधियों के बारे में भी बताया। स्वामी सत्यवेश ने कविता प्रस्तुत की। स्वामी ब्रह्म मुनि, आचार्य सुनील शास्त्री, आचार्य रोहित शास्त्री, अंकुर भारद्वाज, ब्रह्मचारी ऋषि, ब्रह्मचारी शुभ, मोहित शास्त्री, जयकृष्ण, निखिल, विशाल ने अपनी यज्ञशाला पर वेदपाठ किया। यज्ञमान रविंद्र, संजय, अनिल, नवीन, कपिल सपत्नीक रहे। इसमें ब्रह्मचारी आर्य, टिंकू, मास्टर संजीव, जयपाल, प्रधान कृष्णपाल, आर्य समाज के प्रधान कृष्णपाल, महेश, जितेंद्र, सतेंद्र आदि रहे।